सेक्टर-17 है सबसे ज्यादा बेघरों का डेरा
बेघर लोगों में सबसे ज्यादा यूपी के...बेघर लोगों में सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश के लोगों की है यानि 64.2 फीसदी हैं। उसके बाद बिहार यानि 574 लोग हैं जबकि चंडीगढ़ के ही 29 लोग हैं। हिमाचल प्रदेश के आठ, उत्तराखंड के 14, पंजाब के 31 और तामिलनाड़ू के 14 लोग पाए हैं। लगभग 20 राज्यों के लोग इनमें शामिल हैं। इसमें से 34 लोग डिसएबल्ड थे और 12 मानसिक तौर पर बीमार। तंबाकू खानेवाले सबसे ज्यादा 526 स्टूडेंट्स थे ओर सिगरेट व शराब पीने वाले 316 स्टूडेंट्स थे। इनमें से 90 फीसदी से अधिक लोग ऐसे हैं जिनको सरकारी योजनाआंे का कोई लाभ नहीं मिलता। प्रधानमंत्री आवास योजना, सुकन्या समृद्धी योजना आदि के बारे में उनको पता ही नहीं। इनमें से 60 फीसदी के बैंक अकाउंट हैं।
सिटी ब्यूटीफुल में बसने वाले बेघर लोगों में सबसे ज्यादा का ठिकाना सेक्टर-17 है। कुल 2064 लोगों को शहर में बेघर पाया गया, जिसमें से 337 सेक्टर-17 प्लाजा में रहते हैं। पीयू के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क और डिपार्टमेंट ऑफ स्टेटिक्स के चंडीगढ़ होमलेस सर्वे 2019 की ये रिपोर्ट बुधवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. राज कुमार ने रिलीज की। ये रिपोर्ट स्टेट अर्बन पोवर्टी एलीविएशन सेल, नगर निगम के लिए तैयार की गई है। लगभग छह महीने की मेहनत से तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ पुरुष ही नहीं महिलाएं भी बेघर रहती हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है कि वह यहां पर कमाई के लिए हैं और किराए पर कमरा लेकर वह खर्च बढ़ाना नहीं चाहते। 2064 बेघरों में से 51 फीसदी ऐसे थे जिनके पास आईडी प्रूफ था ओर 95 फीसी के पास आधार कार्ड था, जबकि 1.8 फीसदी के पास ड्राइविंग लाइसेंस। अन्य के पास वोटर कार्ड। सबसे ज्यादा संख्या 31 से 40 साल उम्र वालों की यानि 5 सौ पाई गई। उसके बाद 41 से 50 आयु वर्ग और फिर 25 से 30 आयु वर्ग वालों की संख्या रही। प्रो मोनिका मंुजियाल सिंह, डॉ मनोज कुमार, डॉ अमर नाथ गिल, डॉ गौरव गौड़ की इस टीम में डॉ चरनप्रीत सिंह, डॉ आदित्य परिहार, डॉ अभिषेक आदि शामिल थे। बेघर लोगों में 2036 मेल, 26 फीमेल और ट्रांसजेडर की संख्या दो रही। बेघर लोगों में से 28 ग्रेजुएट हैं। 101 सेकेंडरी पास और दसवीं पास 215 पाए गए। करीब 69.6 फीसदी बेघर शादीशुदा थे और 30.1 फीसदी अनमैरिड। बेघर लोगों में 683 मजदूरी करते हैं, 378 रिक्शा चालक हैं, 204 ऑटो रिक्शा चलाते हैं, 15 वॉचमैन, 37 भिखारी। 733 ऐसे हैं जिनके पास कोई परमानेंट काम नहीं है यानि वह कभी मजदूरी करते हैं, कभी रिक्शा चलाते हैं, जो काम मिलता है वह कर लेते हैं और कभी-कभी भीख भी मांग लेते हैं। वेंडर, होटल, ढाबा और कूूड़ा उठाने का काम करते हैं।