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सुपरिंटेंडेंट से शीतल मांग रही थी एक फ्लैट, 50 लाख
इकबाल ने चली डबल चाल...पिछले दाे साल पहले कुलविंदर और शीतल की दोस्ती के बीच संगरूर का रहने वाला व प्रापर्टी डीलर इकबाल आ गया। इसने जहां पहले धीरे-धीरे कुलविंदर और शीतल की दोस्ती पर सेंध लगाई वहीं उसने कुलविंदर के पैसों पर भी आंख रखी। पूछताछ के दौरान इकबाल ने पुलिस को बताया कि दिसंबर माह से लेकर अब तक कुलविंदर से वह 30 लाख रुपए ले चुका है।
पंजाब इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में सीनियर सुपरिटेंडेंट के पद पर आसीन कुलविंदर सिंह को न केबल उसकी महिला दोस्त शीतल शर्मा लूट रही थी बल्कि शीतल का करीब दो साल पहले बना नया दोस्त संगरूर निवासी इकबाल भी लूट रहा था। वह कुलविंदर और महिला दोनों से अपना फायदा उठा रहा था और महिला के कहने पर कुलविंदर ने इकबाल को कुछ समय पहले
30 लाख रुपए भी दिया था।
उधार के तौर पर लिया यह 30 लाख वापिस न करना पड़े इसलिए इकबाल ने प्लांड तरीके से कुलविंदर को पहले चंडीगढ़ के एक होटल में शराब पिलाई और फिर घुमाने के बहाने एयरपोर्ट रोड पर ले आया। यहां पर पेशाब करने के बहाने कार से नीचे उतरे इकबाल और उसके पीछे उतरे कुलविंदर को आरोपी ने पास पड़े पत्थर मार-मार कर मर्डर कर दिया और शव को वहीं फैंक ऊपर गाडी से निकाल कर प्लास्टिक का लिफाफा चढ़ा दिया। ताकि किसी की नजर शव पर न पड़ सके। आरोपी मर्डर करने के बाद फिर से सेक्टर-23 स्थित शीतल के
घर आया और सारी बात बताई। उसके बाद से यह दोनों फरार हो गए। लेकिन पुलिस ने इनको कत्ल के चंद घंटों बाद पकड़ लिया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से इनको चार दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
शीतल व इकबाल को आज कोर्ट में पेश कर चार दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया है। इकबाल ने कुलविंदर से 30 लाख उधार लिए जोकि वापिस नहीं करना चाहता था और प्लांड तरीके से मर्डर कर दिया। मर्डर के बाद इकबाल शीतल के घर आया और वहां से फऱार हो गए। पुलिस पूछताछ कर रही है।
दलजीत सिंह, एसएचओ सोहाना पुलिस स्टेशन
2006 से ही थी शीतल और कुलविंदर की दोस्ती...वर्ष 2006 से ही शीतल और कुलविंदर में दोस्ती थी। कई सालों की इस दोस्ती को शीतल अब शादी का नाम देना चाहती थी लेकिन जानती थी कि कुलविंदर कभी भी इसको लेकर नहीं मानेगा। इसलिए उसने काफी चलाकी से कुलविंदर के आगे दो रास्ते रख दिए थे। या तो वह उससे शादी कर उसके अवैध रिश्ते को वैध का नाम दे या फिर उसको 50 लाख और एक फ्लैट लेकर दे। ताकि वह अपनी बची हुई जिंदगी आराम से गुजार सके। लेकिन इतनी बडी रकम देने से भी कुलविंदर मना ही कर रहा था।