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इटली से लौटे स्टूडेंट ने यूबीएस में लगाई क्लास, न साथी स्टूडेंट और न टीचर हुए आइसोलेट

एक वर्ष पहले
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सेनेटाइजर मंगवाने के आदेश जारी...रजिस्ट्रार प्रो करमजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने पुसा की डिमांड के अनुसार सेनेटाइजर एवं मास के इंतजाम के लिए आदेश कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्टूडेंट्स और टीचर्स को भी आइसोलेट किया जाएगा तो पैनिक क्रिएट हो सकता है इसलिए यूनिवर्सिटी ने सिर्फ इटली से लौटे स्टूडेंट को ही 14 दिन के लिए छुट्टी पर भेजा है।

पीयू स्थित यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (यूबीएस) में एमबीए एंटरप्रेन्योरशिप के एक स्टूडेंट ने इटली से लौटकर अपने इंस्टिट्यूट में क्लास लगाई व दोपहर तक इंस्टिट्यूट में ही रहा। कोरोना वायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस है कि बाहर से आने वाले हर एक व्यक्ति के लिए 14 दिन तक आइसोलेट होकर रहना जरूरी है। यदि इस बीच में विदेश यात्रा कर लौटे व्यक्ति किसी के संपर्क में आता है तो उसको भी आइसोलेट करना जरूरी है। कोरोना वायरस से प्रभावित होने के सिस्टम्स 14 दिन बाद दिखाई देते हैं, लेकिन 25 स्टूडेंट की क्लास में ना तो किसी को आइसोलेट किया गया और ना ही क्लास लेने वाले टीचर्स को आइसोलेट किया गया है। उस पर यूनिवर्सिटी दावा कर रही है कि स्टूडेंट में कोई सिमटम नहीं थे। एक स्टूडेंट नेता ने बताया कि डिपार्टमेंट की एक पूरी क्लास लगाने का मामला सामने आते ही तुरंत पूरे इंस्टीट्यूट को सैनेटाइज कराने के लिए कहा था लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि इटली से लौटे स्टूडेंट ने छुट्टी मांगी थी लेकिन डिपार्टमेंट ने नहीं दी और बाद में एक सीनियर प्रोफेसर के दखल पर आनन-फानन में सिचुएशन संभाली गई । उनका सवाल था कि अगर बाद में स्टूडेंट को इंफेक्शन पाया जाता है तो इस बीच उसके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए भी खतरा रहेगा। यदि सेनेटाइजेशन कर दिया जाता तो स्टूडेंट्स की चिंता खत्म हो जाती सूत्रों के अनुसार डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन (डीयूआई) प्रो शंकरजी झा की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग के दौरान यह मुद्दा उठा तो किसी ने जवाब दिया कि जिस दिन उसने क्लास लगाई है, दूसरे दिन छुट्टी थी और वायरस किसी भी सतह पर 24 घंटे तक ही जीवित रहता है, इसलिए चिंता की बात नहीं है। यूनिवर्सिटी के पास सेनेटाइजेशन का कोई इंतजाम भी नहीं है। रजिस्ट्रार प्रो करमजीत सिंह ने बताया कि स्टूडेंट के इटली से आने की जानकारी जैसे ही मिली तो तुरंत चीफ मेडिकल ऑफिसर सीएमओ डॉ डीके धवन को इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने यूटी प्रशासन से संपर्क किया। पीजीआई की टीम भी उस स्टूडेंट को चेक कर चुकी है और अभी तक उसमें कोई सिमटम नहीं पाया गया है। यह अफवाह है कि उसको क्लास में जुकाम लगा हुआ था हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास इस बात का जवाब नहीं है कि क्लास के दौरान जो भी उसके साथ ही स्टूडेंट्स और टीचर उसके संपर्क में आए थे। उनको छुट्टी पर क्यों नहीं भेजा गया है। यूबीएस के ही एक स्टूडेंट ने बताया कि टीचर्स जानबूझ कर सच्चाई छुपाना चाह रहे हैं। स्टूडेंट को स्नीजिंग हो रही थी और उसको एक टीचर ने उठा कर अलग बिठाया। कुछ टीचरों से कहा गया था कि उसका टेस्ट पोस्टपोन कर दें लेकिन वह माने नहीं।

नॉन टीचिंग स्टाफ मांगे सैनेटाइजर और मास्क...पीयू नॉन टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन (पुसा) नए वॉइस चांसलर को लेटर लिखा है कि जो भी लोग विदेश से आ रहे हैं उनकी सेहत संबंधी जांच करने के बाद ही उनको कैंपस में प्रवेश दिया जाए। पब्लिक डीलिंग वाले डिपार्टमेंट और जिन जगहों पर साफ ज्यादा है, वहां पर तुरंत सेनेटाइजर और मास्क का इंतजाम किया जाए। अपनी इस डिमांड के साथ उन्होंने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की प्रति भी लगाई है।

हमारे पास जानकारी आई थी और डेराबस्सी का स्टूडेंट होने के कारण हमने पंजाब को इन्फॉर्म कर दिया है। स्टूडेंट पंजाब हेल्थ डिपार्टमेंट की निगरानी में है। अभी तक उसमें वायरस के कोई सिम्टम्स नहीं है।

डाॅ वीरेंद्र नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, सेक्टर-16 हॉस्पिटल
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