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पेक के बजाय टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के नाम हुई जमीन
}पेक को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने का प्रोसेस 2003 में शुरू हुआ... पेक को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने का प्रोसेस 2003 में शुरू हुआ। यूजीसी की ओर से इंस्टीट्यूट को ऑटोनॉमी देने पर सहमति दे दी गई। इसके लिए पेक मैनेजमेंट के लिए सोसायटी का गठन कर दिया गया जिसमें यूटी के सभी अधिकारी हैं। होम सेक्रेटरी, टेक्निकल एजुकेशन सेक्रेटरी और फाइनेंस सेक्रेटरी इसके बोर्ड ऑफ गवर्नेंस में रहते हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी से एफिलिएशन खत्म करके कॉलेज अपने नाम से डिग्री देने लगा। 2004 में सोसायटी को लैंड ट्रांसफर के आदेश हुए। उस समय लापरवाही के कारण इस दिशा में काम नहीं हुआ। 2012 में नए आदेश आ गए कि सरकारी जमीन ट्रांसफर नहीं की जाएगी। इसी बीच यूजीसी से इंस्टीट्यूट की परिस्थिति पर अपडेट लिया जाता रहा। लेकिन शर्त पूरी नहीं होने के कारण बीते साल ही पेक का डीम्ड यूनिवर्सिटी स्टेटस खत्म करने के लिए लिख दिया है। हालांकि फिलहाल ये लेटर एमएचआरडी में ही पड़ी है। पेक ने इस बारे में यूटी प्रशासन को जब भी लिखा तो यही जवाब मिलता है कि अब सरकारी जमीन किसी सोसायटी के नाम पर ट्रांसफर नही की जा सकती। इस बीच पेक अपनी हर इमारत के लिए यूटी को किराया अदा करता है। हर हॉस्टल के कमरे के लिए तीन सौ रुपये और हर मकान के लिए छह सौ से लेकर एक हजार रुपये तक सरकारी खजाने में जमा होता है। हालात ये है कि इंस्टीट्यूट अपनी जरूरत अनुसार किसी इमारत में कोई बदलाव नहीं कर सकता। पेक के अधिकारियों ने आईआईटी का हवाला दिया था जिसमें एमएचए के आदेश अनुसार बेशक सरकारी जमीन ट्रांसफर नहीं हो सकती एक रुपये प्रति वर्ष के किराए पर उनको सभी इमारतें दे दी गईं। पेक डायरेक्टर प्रो धीरज सांघी का कहना है कि अब वह यूजीसी को अपनी लेटर वापिस लेने के लिए लिखेंगे। यूजीसी ने तीन आधार पर डीम्ड यूनिवर्सिटी स्टेटस कैंसिल करने के लिए लिखा कि एनबीए एक्रीडिएशन हो, नैक एक्रीडिशन कराया जाए और जमीन पेक के नाम पर हो। बेशक जमीन पेक के नाम नहीं है लेकिन ये सिर्फ पेक के लिए ही इस्तेमाल हो सकती है। उम्मीद है कि इस बारे में पॉजिटिव डिसिजन होगा।
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) के डीम्ड यूनिवर्सिटी स्टेटस के खतरे को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने ये 131 एकड़ जगह डिपार्टमेंट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के नाम पर ये कहते हुए ट्रांसफर कर दी है कि जमीन सिर्फ पेक सोयायटी ऑफ रनिंग पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के द्वारा ही इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि यूजीसी की शर्त के अनुसार ये जमीन पेक के नाम पर ट्रांसफर होनी चाहिए। चंडीगढ़ प्रशासक ने मंजूरी दी जिस पर चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव कम फाइनेंस सेक्रेटरी ने ये नोटिफिकेशन जारी किया है। कैपिटल ऑफ पंजाब डवलपमेंट एंड रैगुलेशन एक्ट 1952 के अंतर्गत क्लॉज पांच में विभिन्न सोसायटीज व संस्थाओं को लीज होल्ड बेस पर जमीन देने की योजना के तहत ये नोटिफिकेशन हुआ है। वर्ष 2004 में आदेश होने के बावजूद पेक के पास न तो अपनी इमारत है और ना ही अपनी जमीन। यूजीसी ने इसी वजह से पेक का डीम्ड यूनिवर्सिटी स्टेटस कैंसिल करने के लिए लिखा है। 2018 से लेकर अब तक पेक प्रशासन इस बारे में कई लेटर लिख चुका है। पहले यूटी प्रशासनिक अधिकारियों के कारण जमीन ट्रांसफर नहीं की गई और बाद में नियम में बदलाव के कारण ऐसा संभव नहीं हुआ। पेक प्रशासन ने इस मामले में पंजाब के गवर्नर और यूटी के एडमिनिस्ट्रेटर वीपी सिंह बदनौर के पास भी गुहार लगाई थी।
{अब यूजीसी की इच्छा पर निर्भर डीम्ड यूनिवर्सिटी स्टेटस