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एनआईए करेगी नक्सलियों की लेवी वसूली की जांच, बैठक के बाद लिया गया फैसला

3 वर्ष पहले
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रांची.    आम्रपाली और मगध कोल परियोजना समेत अन्य प्रोजेक्ट से लेवी वसूलकर करोड़पति बने नक्सलियों और उनके करीबियों के 22 केसों की जांच एनआईए करेगी। अभी पुलिस और सीआईडी इसकी जांच कर रही है। मंगलवार को रांची आए एनआईए के डीजी योगेश चंद्र मोदी और डीजीपी डीके पांडेय ने दोनों विभागों के आला अफसरों की मौजूदगी में नक्सलियों की आर्थिक कमर तोड़ने पर करीब दो घंटे तक विचार-विमर्श किया। इस दौरान विशेष शाखा और सीआईडी की अलग-अलग रिपोर्ट और दर्ज केसों पर पुलिस अफसरों ने प्रजेंटेशन दिया। 

 

22 केसों पर गंभीरता से हुई बात

एनआईए डीजी को उनके आर्थिक स्रोत और उनके प्रत्यक्ष व छद्म मददगारों से अवगत कराया। मोदी ने टीपीसी के अर्थतंत्र और उगाही की संरचना को भी जाना। इन 22 केसों की गंभीरता पर बात की। डीजीपी से कहा कि समान प्रकृति और स्थान वाले इन केसों को कंपाइल कर चार-पांच केस बनाए जा सकते हैं। इस पर डीजीपी ने विशेष शाखा और सीआईडी अफसरों से कहा कि इन 22 केसों की स्क्रूटनी कर कंपाइल करने के सुझाव के साथ जल्दी रिपोर्ट दें। डीजी ने आईजी मुकेश सिंह को झारखंड से समन्वय बनाकर इन केसों के बारे में जल्दी रिपोर्ट दर्ज करने को कहा, ताकि एफआईआर दर्ज की जा सके।


दैनिक भास्कर ने 11 मई को मगध और आम्रपाली कोल परियोजना में टीपीसी नक्सलियों द्वारा डीओ होल्डर्स व ट्रांसपोर्टर्स से हर माह करोड़ों की लेवी वसूली का खुलासा किया था। शुक्रवार को रांची आए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि नक्सलियों की लेवी वसूली बंद की जाएगी। अब इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो गई है।

11 मई को दैनिक भास्कर ने किया था खुलासा 

मगध व आम्रपाली कोल परियोजना में टीपीसी नक्सली डीओ होल्डर और ट्रांसपोर्टर्स से हर माह करोड़ों की लेवी वसूल रहे हैं। इसका खुलासा दैनिक भास्कर ने 11 मई को अरबपति नक्सली खदानों के ट्रकों से रोज 1.64 करोड़ की वसूली, सालाना 599 करोड़ रुपए की कमाई शीर्षक से प्रकाशित खबर में किया था। इस पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि लेवी वसूली बंद की जाएगी।

 

नक्सली छोटू रजवार के केस ने दिए अहम सूत्र

एनआईए डीजी ने कहा कि नक्सली जोनल कमांडर छोटू रजवार के केस ने अहम सूत्र दिया है। एनआईए ने 21 मार्च को छोटू रजवार पर नकेल कसने के लिए कई जगह छापेमारी की। इसमें पता चला कि छोटू ने विकास म्युचुअल फंड बेनीफिट निधि नामक संस्था में लेवी के रूप से वसूले गए 15 लाख रुपए निवेश कर रखा है। इसकी जानकारी होने पर एनआईए ने उसके दो सहयोगियों लातेहार के गुरु थाना क्षेत्र के चम्पी कोरम निवासी संतोष उरांव और विजकम निवासी रोशन उरांव को गिरफ्तार किया था। डीजी ने बताया कि इस खुलासे के बाद यह मामला सामने आ गया कि नक्सली लेवी के पैसे बैंकों में जमा करते हैं।

 

नक्सली इलाकों में बैंकों से सामंजस्य की रणनीति

एनआईए डीजी को बताया गया कि नक्सली लेवी का बड़ा हिस्सा बैंकों में जमा करते हैं। इसके लिए बैंकों से सामंजस्य बनाया जा रहा है। इस पर डीजी ने कहा कि इसके बेहतर परिणाम आएंगे। नक्सली और उनके करीबी बड़ी रकम लेकर शहरों की बैंक शाखाओं में जाने से परहेज करते हैं। लिहाजा ग्रामीण क्षेत्र में बैंकों से सामंजस्य बनाने से संदिग्ध खातों के साथ पैसों की जमा-निकासी पर कारगर सूचनाएं आएंगी। इसके लिए भी बैठक में रणनीति बनी।

 

बेहतर तालमेल के लिए बनी संयुक्त योजना

पुलिस और एनआईए के बीच कैसे बेहतर तालमेल बने और कारगर परिणाम निकले, इसके लिए संयुक्त कार्ययोजना भी बनाई गई। भरोसा जताया गया कि पुलिस-एनआईए में समन्वय से नक्सलियों को नेस्तनाबूद किया जा सकेगा और उन्हें पैर पसारने का मौका नहीं मिलेगा। बैठक में एडीजी हेडक्वार्टर पीआरके नायडू, स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता, सीआईडी एडीजी प्रशांत सिंह, एडीजी अॉपरेशन आरके मल्लिक आदि मौजूद थे।

 

मुख्यमंत्री से भी मिले एनआईए डीजी

पुलिस मुख्यालय में संयुक्त बैठक के बाद एनआईए डीजी ने मुख्यमंत्री रघुवर दास से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने नक्सलियों के खिलाफ झारखंड पुलिस की मुहिम और आशातीत कामयाबी पर प्रसन्नता जताई। साथ ही इनके समूल नाश के लिए एनआईए का सहयोग भी मांगा। यह भी भरोसा जताया कि दोनों विभागों के बेहतर तालमेल से परिणाम सकारात्मक आएंगे।

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