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डाउनलोड करेंभोपाल। केरल में निपाह वायरस से 16 लोगों की मौत हो गई। मध्य प्रदेश के भोपाल, बैतूल, खंडवा, नरसिंहपुर, ग्वालियर और इंदौर जिले के घोड़ों में ग्लैंडर्स के लक्षण देखे गए हैं। भोपाल में किसी भी व्यक्ति में ग्लैंडर्स की पुष्टि नहीं हुई है। जिन चार नए घोड़ों में बीमारी की पुष्टि हुई है, उनमें से एक की पहले ही मौत हो चुकी है। जबकि तीन को शनिवार को जहर देकर मार दिया गया। जबकि चार लोगों की ब्लड सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आई है।
भोपाल के हमीदिया अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आईडी चौरसिया के मुताबिक, निपाह और ग्लैंडर्स वायरस एक ही फैमिली (Paramyxoviridae) के हैं। निपाह वायरस नमी वाले इलाकों में ज्यादा असर करता है। केरल में इसके फैलने का सबसे बड़ा कारण यही है। ज्यादा तापमान और शुष्क इलाकों में इसके फैलने की संभावना नहीं होती है।
प्रथम विश्वयुद्ध में हुआ पहला प्रयोग
- 2011 में प्रकाशिक जर्नल अॉफ बॉयोटेरिरज्म एंड बॉयोडिफेंस के अनुसार, पहले विश्वयुद्ध में कई तरह की बीमारियों का उपयोग शत्रु सेना में बीमारी फैलाने के लिए हथियार के रूप में किया गया। प्लेग, एन्थ्रेस, ग्लैंडर्स से पीड़ित लोगों और जानवरों को शत्रु सेना में भेज दिया जाता था।
क्या है निपाह वायरस
- निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है। इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत और दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है। इसकी इंसान या जानवरों के लिए कोई वैक्सीन नहीं है।
क्या है ग्लैंडर्स वायरस
- राज्य पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला के एडिशनल डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जयंत तपासे के अनुसार, इस बीमारी में घोड़े को बुखार के साथ शरीर पर चकते हो जाते हैं और निमोनिया के समान लक्षण सामने आते हैं। इस बीमारी में घोड़ा खाना-पीना छोड़ देता है और उसकी हालत गिरती जाती है।
घोड़े के संपर्क से मनुष्य में फैल सकती है यह बीमारी
बीमार घोड़े के संपर्क में आने वाले लोगों को भी यही बीमारी हो जाती है और मनुष्यों में भी इसी तरह के लक्षण देखे जाते हैं। अभी तक भारत में किसी भी मनुष्य में इस बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं।
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