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24 जून को निर्जला एकादशी, सौभाग्य बढ़ाने के लिए क्या करें और क्या नहीं

महाभारत के अनुसार अगर कोई व्यक्ति पूरे साल की एकादशियों पर व्रत नहीं करता है तो उसे निर्जला एकादशी पर व्रत करना चाहिए।

Danik Bhaskar | Jun 19, 2018, 07:37 PM IST

रिलिजन डेस्क। रविवार, 24 जून को निर्जला एकादशी है। हिन्दी पंचांग में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस एक एकादशी के व्रत से सालभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिल सकता है। इस दिन निर्जल रहकर यानी व्रत करने वाले व्यक्ति को पानी भी नहीं पीना चाहिए। सुबह-शाम भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

स्कंद पुराण के एकादशी महात्म्य अध्याय में सालभर की सभी एकादशियों की जानकारी दी गई है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशियों का महत्व बताया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस संबंध में पांडव पुत्र भीम से जुड़ी कथा प्रचलित है। जानिए निर्जला एकादशी से जुड़ी कथा...

# ये है कथा

> महाभारत में महर्षि वेदव्यास पांडवों को चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाली एकादशी व्रत का संकल्प करवा रहे थे।

> तब भीमसेन ने वेदव्यास से कहा कि पितामाह, आपने प्रति पक्ष (एक माह में दो पक्ष होते हैं। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। यानी एक माह में दो एकादशी आती हैं।) एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं। मैं दिन में कई बार भोजन करता हूं। इस कारण मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर संकूगा।

> इसके बाद महर्षि वेदव्यास ने कहा कि भीम, पूरे वर्ष में सिर्फ एक एकादशी ऐसी है जो वर्षभर की सभी 24 एकादशियों का पुण्य दिला सकती है। वह एकादशी है ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी। भीम तुम इस एकादशी का व्रत करो।

> इसके बाद भीम निर्जला एकादशी का व्रत करने के लिए तैयार गए। इसीलिए इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

# निर्जला एकादशी पर क्या करें

> निर्जला एकादशी पर पानी के बिना व्रत करने का नियम है। अगर ये संभव ना हो तो इस दिन फलाहार और दूध का सेवन करके भी व्रत किया जा सकता है।

> सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प करें। अपने नाम और गौत्र बोलकर निर्जला एकादशी व्रत करने का संकल्प करना चाहिए।

> भगवान विष्णु की पूजा सुबह-शाम करें, मंत्रों का जाप करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण को खाना खिलाएं, दान करें। इसके बाद भोजन करना चाहिए।

# निर्जला एकादशी पर क्या न करें

> इस दिन तुलसी और बिल्व पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। भगवान के भोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लेना चाहिए।

> एकादशी पर चावल भूलकर भी नहीं खाना चाहिए।

> घर में क्लेश न करें। प्रेम से रहें। जिन घरों में अशांति होती है, वहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है।

> किसी भी प्रकार के नशे से बचें। अधार्मिक कामों से दूर रहें।

> सुबह देर तक न सोएं। दिन में और शाम को भी नहीं सोना चाहिए।

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