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डाउनलोड करेंरांची. रिम्स का कार्डियोलॉजी विभाग करीब-करीब ठप हो गया है। यहां के कई महत्वपूर्ण उपकरण खराब हो गए हैं। यहां कैथलैब के अलावा टीएमटी और इको कार्डियोग्राफी मशीनें खराब हो गई हैं। कैथलैब खराब होने से दर्जनों मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी टाल दी गई है। कई ऐसे मरीज विभाग में भरती हैं, जिन्हें तत्काल हार्ट प्रोसिजर करने की आवश्यकता है। लेकिन मशीन खराब होने की वजह से यह काम नहीं हो रहा है।
टीएमटी मशीन भी नौ दिनों से खराब है। यहां लगाई गई दो ईको-कार्डियोग्राफी मशीन में से एक खराब है। मशीनों के खराब होने से कामकाज करीब-करीब ठप है। विभाग में भर्ती मरीज अब इन मशीनों के ठीक होने के इंतजार में हैं। इधर, प्रबंधन का कहना है कि उन्हें मशीनों के खराब होने की आधिकारिक सूचना नहीं है। कैथलैब मशीन शनिवार से ही खराब है। ठीक करने के लिए रिम्स पहुंचे सीएमसी कंपनी के अधिकारी का कहना है कि अभी एक सप्ताह और लगेगा। अभी तक उन्हें सीएमसी के पैसे का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि रिम्स प्रबंधन को दिसंबर में ही पैसे का भुगतान कर देना था।
मंत्री ने दिया है नया कैथलैब लगाने का आदेश
स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने रिम्स निदेशक डॉ. अारके श्रीवास्तव को छह माह के भीतर कार्डियोलॉजी विभाग में नया कैथलैब लगाने का निर्देश दिया है। मंत्री ने रिम्स निदेशक को निर्देश दिया है कि कार्डियोलॉजी में जो वर्तमान कैथलैब है, उसकी आयु खत्म होने को है। उसका एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट (एएमसी) भी खत्म होने वाला है। ऐसे में एएमसी खत्म होने से पहले ही नए कैथलैब की खरीद कर ली जाए। हालांकि मंत्री के आदेश के बाद भी अभी तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
16 मार्च को भी खराब हो गया था कैथलैब
रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग का कैथलैब 16 मार्च को भी खराब हो गया था। कैथलैब करीब 10 दिनों तक खराब रहा। इस कारण दर्जनों मरीजों का उपचार नहीं हो सका। एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी के लिए विभाग पहुंचे दर्जनों मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा। एक सप्ताह पहले ही मशीन ठीक कराई गई थी।
यह हो रहा नुकसान
कैथलैब : मरीजों की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर लगाने का कार्य नहीं हो रहा।
टीएमटी मशीन : ट्रेड मिल टेस्ट एक तरह का कॉर्डियोलॉजिस्ट टेस्ट है। मशीन एक तरह की मूविंग बेल्ट है, जिस पर चलते समय सांस फूलने, हार्ट ब्लॉकेज जैसी बीमारी का ईसीजी के जरिए पता लगाया जाता है।
इको कार्डियोग्राफी- हृदय की धमनियों के कार्य करने का इमेज स्क्रीन पर देखा जाता है। अभी एक मशीन खराब होने के कारण दूसरी मशीन पर वर्क लोड बढ़ गया है।
...तो बंद हो जाएगा कार्डियोलॉजी यूनिट
कार्डियोलॉजी विभाग के कैथलैब की उम्र समाप्त हो चुकी है। अगस्त के बाद संबंधित कंपनी 10 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कैथलैब का सीएमसी (विस्तृत रखरखाव अनुबंध) नहीं करेगी। कैथलैब यदि बंद हो गया तो न ही एंजियोग्राफी होगी, न एंजियोप्लास्टी, न तो पेस मेकर लगेंगे, न ही होगी बैलूनिंग। यानी, कैथलैब के अभाव में कार्डियोलॉजी के साथ-साथ कार्डियक सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग भी ठप हो जाएगा।
मनपसंद कंपनी से खरीद के कारण फंसा मामला : रिम्स में कैथलैब खरीदने की प्रक्रिया लगभग तीन वर्ष पहले शुरू की गई थी। तत्कालीन कार्डियोलॉजिस्टों ने राष्ट्रीय मानक के अनुरूप कैथलैब का स्पेसिफिकेशन प्रबंधन को जमा कर दिया था। लेकिन वह स्पेसिफिकेशन किसी एक कंपनी की बजाए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर लागू हो रही थी, जो क्रय समिति को पसंद नहीं था। हालांकि, क्रय समिति के द्वारा कैथलैब का स्पेसिफिकेशन पूर्व निर्धारित एक कंपनी के अनुरूप बनाने की पूरी कोशिश की गई। लेकिन, सफलता नहीं मिलने पर प्रक्रिया ही ठंडे बस्ते में चली गई।
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