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रांची के 50 में से 39 एटीएम में कैश नहीं, कई के हैं लिंक फेल

3 वर्ष पहले
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रांची. राजधानी में बीते तीन-चार दिनों से एटीएम व्यवस्था लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। एटीएम से पैसे नहीं निकलने की वजह से लोग परेशान हैं। वैसे तो लगभग अधिकतर बैंको के एटीएम में पैसे नहीं हैं। लेकिन, सबसे खराब स्थिति एसबीआई बैंक के एटीएम की है। शहर के लगभग हर इलाके में स्थित एटीएम से पैसे की निकासी या तो न के बराबर हो रही है अथवा नो कैश कैश के बोर्ड लगे हैं। कहीं मशीन शराब है कि सूचना टंगी है। कहीं सिर्फ 2000 के नाेट निकल रहे हैं, तो कहीं सिर्फ 500 रुपए के। कहीं-कहीं तो बीते तीन-चार दिनों से एटीएम में पैसे डाले ही नहीं गए। लोगों की लगातार आ रही शिकायतों के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने मंगलवार को सुबह से देर शाम तक शहर के 12 इलाके के 50 एटीएम की पड़ताल की। परिणाम चौंकानेवाले मिले। 39 एटीएम में या तो कैश नहीं थे या उनमें किसी न किसी तरह की खराबी थी। कई के लिंक फेल थे।


अवैध रूप से जमा हो रहे कैश 
- कालाधन के रूप में 2000 के नोटों के संग्रह से भी संकट खड़ा रहा है। नोटबंदी के बाद जिस तेजी से बैंकों नोट लिए गए, उस तेजी से बैंकों को वापस नहीं आए। रिजर्व बैंक की मानें तो नोटबंदी के बाद से अबतक झारखंड में 2000 के करीब 47 हजार करोड़ और 500 के 80 हजार करोड़ नोट आ चुके हैं। वहीं ग्राहक बैंकों से लेते हैं बड़े नोट  और जमा करते हैं छोटे। इससे बड़े नोटों की किल्लत हाे गई है। 

 

#कैश की कमी के ये हैं 6 प्रमुख कारण

 

ऐसे समझें कैश का अभाव : नोटबंदी के बाद एक बार फिर एटीएम और बैंकों में कैश का संकट हो गया है। एसबीआई में हर दिन लेनदेन के लिए 1600 करोड़ होते हैं, लेकिन मंगलवार को मात्र 52 करोड़ ही थे।

 

1. एनपीए : बढ़ते एनपीए ने बैंकों की साख हिला दी है। जनवरी के बाद से एकाउंट से पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है। इससे लोड बढ़ा है। 
2. 200 नोट कैलीब्रेट नहीं : 200 के नोटों के लिए पर्याप्त एटीएम का कैलीब्रेट नहीं हो रहा है। राज्य में अभी महज 32 फीसदी एटीएम ही 200 रुपए के नोट के लिए कैलीब्रेट हुए हैं यानी 68 फीसदी एटीएम 200 के नोट देने में सक्षम नहीं हैं।
3. पीएनबी घोटाला : पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के बाद लोगों में घबराए हुए हैं। एटीएम से ज्यादा कैश निकालना शुरू हो गया है। लगातार पैसे निकाले जाने के कारण एटीएम जल्दी खाली हो रहे हैं। 
4. 2 हजार के नोट की छपाई बंद : मई से 2000 के नोटों की छपाई बंद है। उसकी जगह 500 और 200 के नोट लाए गए। 2000 के नोटों की कमी से एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो जाती है।
5. एटीएम में नोट वैल्यू में कमी : एसबीआई के एक अधिकारी के अनुसार अगर 2000 के नोटों से एटीएम को भरा जाए, तो 60 लाख रुपए तक आ जाते हैं, जबकि 500 और 200 के नोटों से यह क्षमता मात्र 18 से 20 लाख ही पहुंचती है। एटीएम खाली होने का यह भी कारण है।
6. कई एटीएम खराब : करीब 33 फीसदी एटीएम औसतन हर समय खराब रहते हैं। ऐसे में जो एटीएम काम कर रहे हैं, उनमें लोड स्वतः बढ़ जाता है। 

 

नोटों की किल्लत अस्थाई समस्या है। इसके निदान के लिए कैश मैनेजमेंट सिस्टम का पालन करना हाेगा। 2000 के नोटों  की कमी भी पूरी करना जरूरी है। सुनील गुप्ता, उप महाप्रबंधक, एसबीआई

 

लोगों ने जरूरत से ज्यादा पैसे निकाल लिए हैं। बड़े नोटों की जमाखोरी हो रही है। इसके मूल में भ्रष्टाचार है। निश्चित रूप से बड़े नोट तिजोरियों में भरे जा रहे हैं। 

-दयाशंकर, उप महाप्रबंधक, एसबीआई

 

 

 

 

 

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