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सायरस मिस्त्री के आरोप बेबुनियाद: एनसीएलटी; कहा- टाटा परिवार निजी हितों के लिए गलत फैसले नहीं ले सकता

ट्रिब्यूनल ने सोमवार को मिस्त्री की याचिका खारिज की, फैसले की कॉपी अब सामने आई

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2018, 03:18 PM IST
टाटा संस के खिलाफ सायरस मिस्त् टाटा संस के खिलाफ सायरस मिस्त्

- सायरस मिस्त्री 24 अक्टूबर 2016 को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए गए

- मिस्त्री ने रतन टाटा के दखल की वजह से ग्रुप को नुकसान का आरोप लगाया था

मुंबई. सायरस मिस्त्री के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के फैसले की कॉपी गुरुवार को सामने आई। इसके मुताबिक रतन टाटा पर मिस्त्री ने जो आरोप बेबुनियाद लगाए वो बेबुनियाद हैं। ट्रिब्यूनल की स्पेशल बेंच ने कहा कि टाटा संस के डायरेक्टर रहते हुए सायरस मिस्त्री ने निरंकुश तरीके से कंट्रोल करने की कोशिश की। बेंच ने टाटा परिवार, इसकी कारोबारी नैतिकता और उदारता की तारीफ करते हुए टाटा फैमिली को 'सोसाइटी फॉर डिकेड' बताया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि टाटा ग्रुप के बारे में ब्रिटानिका और विकीपीडिया से जानकारी जुटाई। इसके इतिहास को देखते हुए यह भरोसा करना मुश्किल है कि निजी हितों के लिए समूह पक्षपातपूर्ण कारोबारी फैसला ले सकता है। ट्रिब्यूनल ने रतन टाटा और एन सूनावाला के खिलाफ आरोप लगाने पर सायरस मिस्त्री की निंदा की।
एनसीएलटी ने सोमवार को सायरस मिस्त्री की याचिका खारिज कर दी। मिस्त्री ने दो साल पहले उन्हें टाटा के चेयरमैन पद से हटाए जाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए यह याचिका दायर की थी। ट्रिब्यूनल ने कहा, ‘‘टाटा सन्स के बोर्ड के फैसले में कोई गड़बड़ी नहीं है। सायरस 24 अक्टूबर 2016 को चेयरमैन पद से इसलिए हटाए गए क्योंकि वे बोर्ड मेंबर्स का भरोसा खो चुके थे।’’ मिस्त्री इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में चुनौती देंगे। मिस्त्री के ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, "हम टाटा सन्स के प्रबंधन में सुधार और शेयरधारकों के हितों के लिए लड़ते रहेंगे। आगे टीटीएसएल, एयर एशिया, कारोबारी सी शिवशंकरन से बकाया की वसूली, घाटे में चल रही टाटा नैनो और टाटा स्टील यूरोप समेत दूसरे गंभीर मामले उठाए जाएंगे।

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