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12वीं के 6 विषयों में कोई शिक्षक नहीं पर हर वर्ष पास कर रहे हजारों स्टूडेंट्स
राज्य में इंटर कला स्ट्रीम में पढ़ाई की सबसे खराब स्थिति है। इस स्ट्रीम के छह सब्जेक्ट में पिछले 20 वर्ष से एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। लेकिन प्रत्येक वर्ष स्टूडेंट्स परीक्षा बिना पढ़ाई के ही परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। पास भी कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य में छात्रों को किस तरह की क्वालिटी एजुकेशन दी जा रही है। जिन विषयों में शिक्षकों की संख्या शून्य है या नियुक्ति नहीं हुई है, उनमें राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा, साइकोलॉजी, फिलॉस्फी और एंथ्रोपोलॉजी शामिल हैं। यानि कुल मिलाकर इन विषयों के स्टूडेंट्स अपने भरोसे पढ़ाई कर रहे हैं। इन विषयों में नियुक्ति के लिए कई बार पूर्ववर्ती सराकर को आवेदन देकर ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन इस दिशा में आज तक कार्यवाही शुरू नहीं की गई है।
स्नातक एनवायर्नमेंटल साइंस में अबतक किसी शिक्षक की नियुक्ति ही नहीं हुई
राज्य में रांची यूनिवर्सिटी समेत सात विश्वविद्यालय हैं। स्नातक स्तर पर एनवायर्नमेंटल साइंस की पढ़ाई होती है। लेकिन इस विषय में एक भी शिक्षक नहीं है। इसके बावजूद प्रति वर्ष राज्य के सातों विश्वविद्यालयों से एक लाख स्टूडेंट्स पास कर रहे हैं। इस विषय के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। यूजीसी की पहल पर इस विषय को स्नातक स्तर पर लागू कर दिया गया। लेकिन इस विषय में शिक्षकों का पद सृजित नहीं किया गया, इसलिए वर्तमान में इस विषय में एक भी शिक्षक नहीं है।
विषयवार छात्रों की संख्या
राजनीति विज्ञान 1,51,405
सोशियोलॉजी 97,535
मनोविज्ञान 30,309
दर्शनशास्त्र 20,099
मानव शास्त्र 12,789
विद्यार्थियों की विवशता बिना क्लास किए परीक्षा में शामिल हो रहे
पीजीटी की तीन बार नियुक्ति, पर इन विषयों पर ध्यान नहीं
राज्य गठन के बाद इंटर के लिए तीन बार पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड (पीजीटी) टीचर की नियुक्ति हुई है। लेकिन इन छह विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति की ओर ध्यान नहीं दिया गया। इन विषय के अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
पद सृजित कर नियुक्ति करे सरकार
12वीं के छह विषयों में एक भी शिक्षक नहीं है। जबकि इन विषयों में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी नहीं है। छह विषयों में बिना पढ़ाई किए स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। सरकार को इन विषयों के लिए शिक्षकों के पद सृजित कर नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन मिल सके। -तालेश्वर महतो, प्रशिक्षित अभ्यर्थी
विषय छात्रों की संख्या