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डाउनलोड करेंभोपाल. यूजीसी के सातवें वेतनमान को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री और विभागीय अफसरों से मिले आश्वासन के बाद सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसर्स ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। प्रोफेसर पिछले एक महीने से अपनी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रोफेसर्स ने फिलहाल अपना आंदोलन एक महीने के लिए स्थगित किया है। प्रोफेसर्स का कहना है कि यदि एक महीने में शासन द्वारा यूजीसी का सातवां वेतनमान लागू नहीं किया जाता है तो दोबारा से आंदोलन शुरू करेंगे।
-संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. कैलाश त्यागी के अनुसार, सातवें वेतनमान के लागू होने से सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के टीचिंग और नॉन टीचिंग के करीब आठ हजार शिक्षकों को इस वेतनमान का फायदा मिलेगा।
उच्च शिक्षामंत्री से मुलाकात के बाद आंदोलन स्थगित
-यह निर्णय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की बुधवार को हुई साधारण सभा की बैठक में लिया गया। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. कैलाश त्यागी के अनुसार सातवें वेतनमान की मांग को लेकर संघ के पदाधिकारियों ने उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, उच्च शिक्षा विभाग के एसीएस बीआर नायडू व आयुक्त नीरज मंडलोई से मुलाकात की थी।
आगामी कैबिनेट में रखेंगे मुद्दा
-मंत्री और अधिकारियों ने फाइल अप्रूव करने के लिए समय मांगा है। उच्च शिक्षा मंत्री ने आगामी केबिनेट में यूजीसी के सातवें वेतनमान को रखने का आश्वासन दिया है। इस आश्वासन के बाद संघ ने एक महीने के लिए अपना आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया।
इस महीने 2 हजार एसोसिएट बनेंगे प्रोफेसर
-उन्होंने बताया कि शासन की मंजूरी के बाद सरकारी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के करीब 8000 टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को इस वेतनमान का फायदा होगा। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों ने इसी माह 2000 एसोसिएट प्रोफेसर्स के प्रोफेसर बनाए जाने की भी जानकारी दी है।
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