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Ex CM, MLAs और मंत्रियों के करीबियों को प्रमोशन, पूर्व विस अध्यक्ष को नोटिस

3 वर्ष पहले
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रांची. झारखंड विधानसभा ने नियमों की अनदेखी कर अपने सचिवालय के 75 सहायकों को प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर प्रोन्नत कर दिया। इसके लिए बिना अधिकार के प्राेन्नति नियम को बदला, फिर पूर्व सीएम, मंत्री और विधायकों के करीबियों को प्रोन्नत कर दिया। इसकी जांच कर रहे न्यायिक जांच आयोग ने इस प्रोन्नति को अवैध माना है। अंतिम फैसले से पहले विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 


- 10 अप्रैल को जारी नोटिस में आयोग ने भोक्ता से पूछा है कि क्यों नहीं माना जाए कि इन सभी गड़बड़ियों में आपकी संलिप्तता थी। नियम विरुद्ध फाइल आपके पास आई और आपने इस पर अनुमोदन कर दिया। आयोग ने कहा है कि भोक्ता का पक्ष नहीं आने पर वह अपना फैसला ले लेगा। वहीं पूछे जाने पर शशांक शेखर भोक्ता ने बताया कि उन्होंने अपना पक्ष आयोग को भेज दिया है।
- आयोग ने जांच में पाया है कि विधानसभा सचिवालय में नियुक्ति और प्रोन्नति विधानसभा नियमावली 2003 के तहत होती है। इसमें किसी प्रकार का बदलाव राज्यपाल की सहमति से ही हो सकता है। पर वर्ष 2014 में कुछ लोगों को प्रोन्नति देने के लिए एक आदेश जारी किया गया। परीक्षा लेकर प्राेन्नति दे दी गई। यह विधि सम्मत नहीं था। प्रमोशन पाए लोगों में 15 ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जो किसी न किसी विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों के करीबी थे। हालांकि नोटिस में अभी नामों का खुलासा नहीं किया गया है।

 

प्रोन्नति के नियम बदले, बिना उत्तर देखे ही दे दिए मनमाने मार्क्स 

 

- विधानसभा में कर्मचारियों की प्रोन्नति विधानसभा नियमावली 2003 के प्रावधानों के अनुसार होती है। पर वर्ष 2014 मे तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ने इसमें अपने स्तर से ही संशोधन कर दिया। जबकि ऐसा करने का अधिकार केवल राज्यपाल को है। संशोधन के बाद 4 मार्च 2014 को यह नियम बनाया गया कि सहायक से प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर 50 फीसदी वरीयता और 50 फीसदी सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से प्रोन्नति दी जाएगी। इसके आधार पर ही परीक्षा ली गई और प्रोन्नति दे दी गई। 

 

- प्रोन्नति नियमावली अपने स्तर से बदल दिया जो अवैध है
- परीक्षा में सारे ऑबजेक्टिव प्रश्न थे। एक ही प्रश्न का उत्तर “ख’ और “घ’ लिखने वाले सभी को पूरा मार्क्स दे दिया गया, यानी मूल्यांकन मनमाने ढंग से हुआ।
- 15 व्यक्ति किसी न किसी विशिष्ट या अति विशिष्ट व्यक्ति के करीबी थे, इनकी उत्तरपुस्तिकाओं में बिना कुछ देखे मार्क्स बिठा दिए गए।
- आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं हुअा, बिना प्रावधान के ओबीसी को आरक्षण का लाभ दे दिया गया।
- नियमों की अनदेखी वाली संचिका पर अध्यक्ष ने अनुमोदन कर दिया।

 

प्रमोशन पाने वाले ये हैं रसूखदारों के करीबी

विवेकानंद राउत- पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के करीबी

एकरामुल हसन- पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का रिश्तेदार
उत्तम कुमार यादव- पूर्व मंत्री अन्नपूर्णा देवी के करीबी
राजीव रंजन- पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह के करीबी
मंजू कुमारी- स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी की पुत्रवधु
संजीव कुमार सिंह- पूर्व विधायक मलखान सिंह के करीबी
बलदेव सिंह वानरा- विधायक दीपक बिरुआ के करीबी
राजेन्द्र हेम्ब्रम- पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम के करीबी
अनुप कच्छप- पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत के करीबी
 
पूर्व स्पीकर बोले-आयोग को जवाब दे दिया
आयोग का नोटिस मिलने के बाद मैंने इसका जवाब दे दिया है। सारी कार्रवाई नियम संगत की गई है। विधानसभा और राज्य सरकार में प्रोन्नति की नियमावली अलग अलग है। आयोग को मैंने यह बता दिया है।
-शशांक शेखर भोक्ता, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
 
24 जून के पहले फाइनल रिपोर्ट दूंगा 
मामले की जांच तीन साल से चल रही है। संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया है। उनके जवाब को देखने के बाद मैं अपनी अनुशंसा करूंगा। 24 जून के पहले फाइनल रिपोर्ट सौंप दूंगा।
-विक्रमादित्य प्रसाद, न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष

 

 

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