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डाउनलोड करेंफ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, रायगडा ओडिशा से
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ओडिशा सरकार 12 गाँवों में ग्रामसभा करा रही है.
उड़ीसा में रायगडा ज़िले के बातूड़ी गाँव में हुई ग्राम सभा की बैठक ने नियामगिरि पर्वत में बॉक्साइट के खनन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया है. यहां ब्रितानी वेदांता कंपनी एल्युमीनियम प्लांट लगाना चाहती है.
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल के अपने एक फ़ैसले में आदिवासियों के \'पवित्र पर्वत\' पर खुदाई की इजाज़त दिए जाने या नकारने का निर्णय ग्राम सभाओं पर छोड़ दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने नियामगिरि के इर्दगिर्द बसे रायगडा और कालाहांडी ज़िलों के 12 गावों में ग्राम सभा गठन की घोषणा की.
इस क्रम में पहली ग्रामसभा रायगडा ज़िले के सेरकापाड़ी गाँव में 18 जुलाई को हुई थी. इस ग्रामसभा में भी प्रस्ताव को सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया गया था. शनिवार को इस कड़ी में छठी ग्रामसभा बातूड़ी गाँव में हुई थी. अब तक हुई तमाम ग्रामसभाओं में ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज किया है.
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इससे पहले हुई पाँच ग्रामसभाओं में भी खनन प्रस्ताव ख़ारिज हो गया है.
यहाँ स्थानीय भाषा में ग्रामसभा की बैठक को पल्ली सभा कहा जाता है. शुक्रवार को हुई सभा में सदस्यों ने कुई भाषा में अपनी बात रखी जिसे अनुवादक की मदद से अधिकारियों को समझाया गया. अधिकारियों ने उड़िया भाषा में तैयार दस्तावेज पर ग्रामीणों के दस्तख़त और अंगूठे के निशान भी लिए.
नियामगिरी सुरक्षा समीति के कार्यकर्ता भालचंद्र सडन्गी ने बीबीसी से कहा, \"आने वाले दिनों में होने वाली ग्रामसभाओं में भी यह प्रस्ताव गिरने की संभावना है. सरकार बड़ी बेईमानी से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अपने तरीके से मतलब निकालते हुए 112 गाँव के बजाए सिर्फ 12 गाँवों में ही ग्राम सभाएँ आयोजित कर रही है. लेकिन इसमें भी सरकार कामयाब होती नहीं दिख रही है. नियामगिरी के लोगों ने प्रस्ताव को गिराने का मन बना लिया है.\"
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देवतासभा में मौजूद प्रकाश कारसिका ने कहा, \"नियामगिरी हमारे देवता हैं और उन्हीं से हमारी संस्कृति और जीवनयापन जुड़ा हुआ है. अगर यहाँ बॉक्साइट खनन होगा तो इससे सारी नदियाँ और नालें सूख जाएँगे और पर्यावरण को नुकसान पहुँचेगा. हम किसी भी सूरत में अपने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने नहीं देंगे.\"
नियामगिरि सुरक्षा समिति ने घोषणा की है कि वह 112 गावों में ग्राम सभा आयोजित करेगी तथा बैठक की विडियो रिकॉर्डिंग और उनमें पारित प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के पास भेजेगी.
नियामगिरी पर्वत पर बसे आदिवासी खनन का विरोध करते रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि नियामगिरि में खनन पर पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लगाए गए प्रतिबन्ध के कारण पर्वत के निकट कालाहांडी ज़िले के लांजिगढ़ में वेदांत द्वारा लगाई गई एक मिलियन टन की रिफ़ाइनरी पिछले दिसम्बर पांच से बंद पड़ी है.
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प्लांट पर ख़तराअगर वेदांता को नियामगिरि में खुदाई की अनुमति नहीं मिलती तो न केवल यह रिफ़ाइनरी बल्कि झारसुगुडा में कंपनी के स्मेल्टर प्लांट के भी बंद होने की नौबत आ जाएगी और कंपनी द्वारा चालीस हजार करोड़ की लागत पर बनी यह पूरी परियोजना ख़तरे में पड़ जाएगी.
सन 2003 में वेदांता और राज्य सरकार के उपक्रम ओडिशा माइनिंग कंपनी या ओएमसी के बीच हुए समझौते के अनुसार वेदांता अगले 30 सालों में क़रीब 150 मिलियन टन बॉक्साइट का खनन करने वाली थी.
लेकिन स्थानीय डोंगरिया कोंध आदिवासियों के विरोध और अदालत में चल रहे मामलों के कारण कंपनी अभी तक यहाँ से एक ग्राम बॉक्साइट भी नहीं निकाल पाई है.
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