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डाउनलोड करेंजमशेदपुर. मिनी बेंगलुरु कहे जाने वाले जमशेदपुर से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर तुपुडांग, सरजामदा क्षेत्र के हजारों ग्रामीण पिछले 34 साल से मन्नत पूरी होने पर अजीबोगरीब करतब करते हैं। इन गांवों में जिस व्यक्ति की मन्नत पूरी होती है, वह अपनी पीठ में लोहे की हुक घुसाकर चड़क पूजा मेला कमेटी की ओर से गांव के मैदान में लकड़ी से बने 40 फीट ऊंची कोल्हू में चार चक्कर लगाते हैं। इस दौरान गांव के महिला-पुरुष ही नहीं बल्कि शहर के लोग भी उपस्थित रहते हैं।
ये है पूरा किस्सा
- श्री श्री चड़क पूजा मेला कमेटी, तुपुडांग (सरजामदा) के अध्यक्ष भीमसेन भूमिज ने बताया- हर साल चड़क पूजा के बाद मेले का आयोजन किया जाता है।
- छऊ के अलावा कई नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। चड़क में शिव-पार्वती की पूजा होती है।
- पूजा के दौरान श्रद्धालु मन्नत मांगते हैं और जिनकी मन्नत पूरी होती है, वे स्वेच्छा से लकड़ी के बने चालीस फीट ऊंचे कोल्हू में से चार चक्कर लगाते हैं।
- ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से श्रद्धालु की जो मनोरथ पूरी हुई होती है वह आगे भी कायम रहती है।
इस वर्ष चार भोक्ता (जिनकी मन्नत पूरी होती है) क्रमश
- मिथुन कर्मकार, शंकर कर्मकार, भानू कोंकल व जुमन कोंकल हैं।
- इनकी कौन-सी मनोकामना पूर्ण हुई, इसकी जानकारी भोक्ता और कमेटी के लोगों ने नहीं दी।
- ऐसी मान्यता है- मन्नत की जानकारी दूसरे को देने पर अनिष्ट होता है।
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