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ऑपरेशन मच्छी बाजार : टूटे मकानों के मलबे से काम का सामान बटोर रहे लाेग, मंगलवार को मलबा हटाने नहीं पहुंची निगम की टीम

3 वर्ष पहले
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इंदौर। जवाहर मार्ग के समानांतर बनने वाली सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड तक की सड़क के लिए मच्छी बाजार से दरगाह चौराहे तक लगभग 70 मकानों को नगर निगम ने सोमवार को तोड़ दिया। तोड़फोड़ पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद  निगम ने क्षेत्र में तोड़फोड़ रोक दी। मंगलवार को मच्छी बाजार, दरगाह चौराहे पर टूटे मकानों के मलबे में से लोग अपने काम का सामान बटोरते नजर आए। 


- गौरतलब है कि सोमवार को नगर निगम द्वारा मच्छी बाजार से दरगाह चौराहे तक 70 से ज्यादा बाधक निर्माण तोड़े गए थे। इनमें से कुछ तो तीन से चार मंजिला तक के थे। छह मकानों पर हाई कोर्ट से स्टे के कारण कार्रवाई नहीं की गई। इस बीच हाई कोर्ट ने एक अन्य जनहित याचिका पर मध्य क्षेत्र में कार्रवाई पर स्टे देकर निगम से जवाब मांगा है। मामले में 19 अप्रैल को सुनवाई होगी। इसके चलते मंगलवार को निगम की टीम क्षेत्र  में नहीं पहुंची। अभी भी इस हिस्से में 40 से ज्यादा बाधाएं मौजूद हैं। 

 

हाई कोर्ट ने मांगा नगर निगम से जवाब 
1)
हाई कोर्ट ने मध्य क्षेत्र में तोड़फोड़ पर अंतरिम रोक लगाते हुए 19 अप्रैल तक स्टे कर दिया है। सोमवार को चंद्रभागा के अभय शुक्ला और नया पीठा, मच्छी बाजार के अब्दुल समद की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस पीके जायसवाल व जस्टिस एसके अवस्थी की बेंच ने सुनवाई की। 

 

2) एडवोकेट अभिनव धनोतकर के मुताबिक याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि मध्य क्षेत्र में मास्टर प्लान लागू नहीं होता क्योंकि मास्टर प्लान के चैप्टर छह में लिखा है कि शहर के मध्य क्षेत्र में कोई चौड़ीकरण और तोड़फोड़ नहीं होगी। 


3) भूमि विकास नियम 2012 में भी यही लिखा है कि इस तरह के भवन डीम सेंशन होते हैं यानी इन्हें तोड़ने की जरूरत ही नहीं। जब तक कि आसपास के लोगों को इससे कोई परेशानी न हो या जब तक भवन जर्जर घोषित न किया गया हो। 


4) टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में भी यही कहा गया है कि जो प्लान बन गया है, उससे बाहर जाकर नगर निगम या संबंधित एजेंसी काम नहीं कर सकती। नगर निगम की ओर से एडवोकेट मनोज मुंशी ने कहा इन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो चुकी है। दोनों पक्ष सुनकर कोर्ट ने 19 अप्रैल तक तोड़फोड़ पर रोक लगाते हुए नगर निगम से जवाब मांगा है। 

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