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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. प्राइवेट स्कूलों में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वेतन न मिलने की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया। दिल्ली सरकार के वकील रमेश सिंह ने तर्क दिया कि अभी तक किसी टीचिंग या नॉन टीचिंग स्टाफ ने शिकायत नहीं की है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह क्यों आपको शिकायत करेंगे यह आपकी ड्यूटी है कि यह तय करें कि उन्हें सातवें वेतन आयोग के मुताबिक वेतन दिया जाए। आप यह बताएं की आप इस बारे में क्या कर रहें हैं?
आवाज उठाने पर कर्मचारियों को मिल रही निकाले जाने की धमकी
- याची के मुताबिक 2000 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाले 2 लाख से ज्यादा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को 7वें वेतन आयोग के मुताबिक वेतन नहीं दिया जा रहा है। कोई कर्मचारी आवाज उठाते हैं तो उन्हें निकाले जाने की धमकी दी जाती है। सरकार की सहमति के बाद 1 जनवरी 2016 से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को यहां लागू कर दिया गया है। अभी तक इन सिफारिशों को प्राइवेट स्कूलों में लागू नहीं किया गया है।
- सोशल ज्यूरिस्ट की तरफ से वकील अशोक अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में दिल्ली सरकार और एमसीडी सरकारी स्कूलों की तर्ज पर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के निर्देश दे।
6 हफ्ते में कोर्ट में देना होगा जवाब
एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच ने इस मामले में दिल्ली सरकार, तीनों एमसीडी व प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सभी को 6 हफ्ते में पक्ष कोर्ट में रखना है। सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
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