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हाइपरटेंशन पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

3 वर्ष पहले
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हाइपरटेंशन पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर लोगों को इसके लक्षणों के बारे में जागरूक बनाने उद्देश्य से नोएडा स्थित मल्टी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल जेपी अस्पताल ने स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस मौके पर जेपी अस्पताल में कार्डियोलोजी विभाग की निदेशक डॉ. गुंजन कपूर ने कहा, \"\"हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जिसमें धमनियों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिसका असर धमनियों की दीवारों पर पड़ता है। आज भारत में स्ट्रोक के 29 फीसदी तथा हार्ट अटैक के 24 फीसदी मामलों का कारण हाइपरटेंशनहै। चूंकि हाइपरटेंशन के लक्षण शुरुआती अवस्था में दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे \'मूक हत्यारा\' भी कहा जा सकता है। स्ट्रोक के सामान्य लक्षण हैं, तेज सिर दर्द, बोलने में परेशानी, ठीक से दिखाई न देना, मतली, अपने आप को भ्रमित महसूस करना, चिंता या अचानक शरीर में कमजोरी महसूस करना या संतुलन न बना पाना।\"\"
जेपी अस्पताल में नेफ्रोलोजी एवं किडनी ट्रांसप्लान्ट के वरिष्ठ कंसलटेंट डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट ने कहा, \"\"ब्लड प्रेशर दुनिया भर में किडनी रोगों का दूसरा मुख्य कारण है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों एवं नमक के बढ़ते सेवन के कारण इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नमक का ज्यादा सेवन करने का बुरा असर खून ले जाने वाली धमनियों पर पड़ता है, जिसके चलते धमनियों की दीवारें मोटी हो जाती हैं। इससे धमनियों के भीतर की जगह सिकुड़ जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। धीरे धीरे धमनी इतनी संकरी हो जाती है कि अंग तक खून की आपूर्ति रुकने लगती है जिससे अंग को पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता।\"\"
ग्रामीण एवं शहरी आबादी में हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें खून की वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं। हृदय जब पम्प करता है तो यह दबाव खून की नलियों की दीवारों पर पड़ता है। दुनिया भर में हर तीसरा व्यक्ति हाइपरटेंशन से पीड़ित है, इसके कारण हर साल तकरीबन 94 लाख लोगों की मौत होती है। ध्यान देने योग्य बात तो यह है कि इनमें से बहुत से लोगों को कभी पता ही नहीं चला कि वे हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में तकरीबन 10.8 फीसदी मौतें तथा 4.6 फीसदी आजीवन अपंगताएं हाई ब्लड प्रेशर के कारण ही होती हैं।
--आईएएनएस
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