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आर्थिक जगत में प्रमुख पदों पर 5 भारतीय महिलाएं, इनमें से 4 दक्षिण भारतीय

3 वर्ष पहले
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  • इस साल 500 अमेरिकी कंपनियों में से सिर्फ 24 में महिला सीईओ
  • फॉर्च्यून की लिस्ट में पिछले साल महिला सीईओ की संख्या 32 थी
  • एक रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्वे की कंपनियों के बोर्ड में सबसे ज्यादा 38.9% महिलाएं

बिजनेस डेस्क. ग्लोबल इकोनॉमी में भारतीय मूल की 5 महिलाएं प्रमुख पदों पर जिम्मेदारी निभा रही हैं। गीता गोपीनाथ हाल ही में आईएमएफ की प्रमुख अर्थशास्त्री चुनी गई हैं। वे जनवरी में पद संभालेंगी। इंद्रा नूई ने 12 साल तक अमेरिकी कंपनी पेप्सीको की सीईओ रहने के बाद 3 अक्टूबर को पद छोड़ा है। हालांकि, वे भी अगले साल तक कंपनी की चेयरमैन बनी रहेंगी। 

 

दिव्या सूर्यदेवरा ने एक सितंबर को जनरल मोटर्स की सीएफओ का पद संभाला था। वे जनरल मोटर्स ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल ऑटो सेक्टर में पहली महिला सीएफओ हैं। पद्मश्री वॉरियल पिछले 3 साल से चीन की कार कंपनी नियो में सीईओ (यूएस) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। लीना नायर मार्च 2016 में यूनीलीवर (यूके) की चीफ एचआर ऑफिसर बनीं। यह इत्तेफाक है कि इनमें से लीना (महाराष्ट्र) को छोड़ बाकी चारों मूल रूप से दक्षिण भारत से हैं।

1) गीता गोपीनाथ: आईएमएफ की पहली महिला चीफ इकोनॉमिस्ट

गीता गोपीनाथ (47) एक अक्टूबर को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की चीफ इकोनॉमिस्ट चुनी गईं। भारतीय मूल की गीता इस मुकाम तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला और दूसरी भारतीय हैं। उनसे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी आईएमएफ के प्रमुख अर्थशास्त्री रह चुके हैं।

 

गीता 2005 से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टडीज और इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर हैं। गीता एक मध्यमवर्गीय मलयाली परिवार से हैं। 8 दिसंबर 1971 को कोलकाता में उनका जन्म हुआ। 1980 में उनका परिवार मैसूर आ गया।

गीता के पिता टीवी गोपीनाथ के मुताबिक, जब वो मैसूर आए तो गीता को हिंदी और अंग्रेजी आती थी। इस बात की आशंका थी कि वह कन्नड़ सीख पाएगी या नहीं? लेकिन गीता और उसकी बहन अनीता ने तीन महीने में कन्नड़ सीख ली। गोपीनाथ के मुताबिक 2016 में गीता जब केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन की आर्थिक सलाहकार चुनी गईं, उस वक्त उन्हें मलयालम भाषा की थोड़ी बहुत समझ थी।

इंद्रा नूई (62) 2006 में अमेरिका की प्रमुख फूड एंड ब्रेवरेज कंपनी पेप्सीको की पहली महिला सीईओ चुनी गईं। बतौर सीईओ नूई के 12 साल के कार्यकाल में पेप्सीको के रेवेन्यू में 81% तक इजाफा हुआ। 2006 में कंपनी का सालाना रेवेन्यू 35 अरब डॉलर था। पिछले साल यह 65.5 अरब डॉलर रहा था। पिछले 11 साल में कंपनी के शेयरधारकों को 162% रिटर्न मिला। नूई ने इसी महीने 3 अक्टूबर को सीईओ का पद छोड़ दिया लेकिन अगले साल तक चेयरमैन बनी रहेंगी।

नूई भी दक्षिण भारत से ताल्लुक रखती हैं। 28 अक्टूबर 1955 को मद्रास (अब चेन्नई) के एक मध्यमवर्गीय परिवार में उनका जन्म हुआ था। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे समाज की रुढ़िवादी सोच से आगे बढ़कर कॉलेज की महिला क्रिकेट टीम और फीमेल रॉक बैंड में शामिल हुईं। 1976 में उन्होंने ग्रेजुएशन पूरी की। दो साल बाद कलकत्ता के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की। 23 साल की उम्र में नूई विदेश चली गईं।

इंद्रा नूई ने करियर की शुरुआत 1976 में मेटर बीयर्ससेल में बतौर प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर की। 1994 में नूई पेप्सीको के साथ बतौर सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (स्ट्रैटजिक प्लानिंग) जुड़ीं। 2001 में सीएफओ और 2006 में सीईओ बन गईं। एक साल बाद उन्हें पेप्सीको की चेयरमैन की जिम्मेदारी भी मिल गई।

 

भारत में जन्मीं दिव्या सूर्यदेवरा (39) ने पिछले महीने ही अमेरिका की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स (जीएम) की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) का पद संभाला है। दिव्या ना सिर्फ जनरल मोटर्स, बल्कि ग्लोबल ऑटो सेक्टर में पहली महिला सीएफओ हैं। इससे पहले वे जीएम में वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट फाइनेंस) की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

 

दिव्या ने जीएम ग्रुप की यूरोपियन यूनिट ओपेल के विनिवेश, सेल्फ ड्राइविंग कार यूनिट क्रूज ऑटोमेशन के अधिग्रहण और लिफ्ट इंक स्टार्टअप में निवेश के दौरान अहम भूमिका निभाई। जापान के सॉफ्टबैंक ग्रुप से 2.25 अरब डॉलर का निवेश लाने और जीएम को प्रमुख एजेंसियों से ऊंची रेटिंग दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। इन्हीं काबिलियतों के दम पर वे जीएम की पहली महिला सीएफओ बनीं। दिव्या ने सितंबर 2004 में जनरल मोटर्स में सीनियर फाइनेंशियल एनालिस्ट की पोस्ट पर ज्वॉइन किया था। दिव्या 14 साल में सीएफओ के पद तक पहुंच गईं।

दिव्या का जन्म 1980 में चेन्नई में हुआ था। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में मास्टर डिग्री हासिल की। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के लिए 2001 में वे अमेरिका चली गईं। जनरल मोटर्स ज्वॉइन करने से पहले अगस्त 2003 से अगस्त 2004 तक उन्होंने यूबीएस इन्वेस्टमेंट बैंक में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर काम किया।

भारतीय मूल की पद्मश्री वॉरियर (57) 2015 से अमेरिका में चीन की कार कंपनी नियो की सीईओ (यूएस डिवीजन) हैं। 2015 में फोर्ब्स की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में उनकी 84वीं रैंक थी। 2013 और 2012 में भी उन्होंने इस लिस्ट में जगह बनाई थी। इससे पहले 2008 में वॉल स्ट्रीट जर्नल की 50 वुमन टू वॉच कैटेगरी में भी शामिल हो चुकी हैं।

 

आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में 1961 को पद्मश्री का जन्म हुआ था। वॉरियर ने 1982 में आईआईटी दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। अमेरिका का कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से 1984 में केमिकल इंजीनियरिंग में ही मास्टर्स डिग्री ली। इसके बाद मोटोरोला कंपनी से करियर की शुरुआत की। वे 23 साल तक मोटोरोला से जुड़ी रहीं। उनके कार्यकाल के दौरान 2004 में मोटोरोला को अमेरिका का नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी मिला। वॉरियर मोटोरोला में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (सीटीओ) और कंपनी के एनर्जी सिस्टम्स ग्रुप की कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट एंड जनरल मैनेजर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं।

लीना नायर (49) दुनिया की दूसरी बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनी यूनीलीवर (यूके) की चीफ एचआर ऑफिसर हैं। मार्च 2016 में उन्हें यह जिम्मेदारी मिली। लीना का जन्म महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 28 अक्टूबर 1969 को हुआ था। उन्होंने 1992 में जमशेदपुर के एक्सएलआरआई से पर्सनल मैनेजमेंट, ह्यूमन रिसोर्सेज में डिप्लोमा किया। अगस्त 2006 में उन्होंने यूनीलीवर की सब्सिडियरी हिंदुस्तान यूनीलीवर में जनरल मैनेजर के पद पर नौकरी ज्वॉइन की। अगले ही साल उन्हें एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और वीपी (एचआर), साउथ एशिया की जिम्मेदारी मिल गई।

 

लीना नायर हिंदुस्तान यूनीलीवर की सबसे कम उम्र की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बन गईं। नायर हिंदुस्तान यूनीलीवर की मैनेजमेंट कमेटी में शामिल होने वाली पहली महिला थीं। साल 2013 में उन्होंने लंदन जाकर यूनीलीवर के हेड ऑफिस में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (लीडरशिप एंड ऑर्गेनाइजेशन डवलपमेंट) की जिम्मेदारी संभाल ही। तीन साल बाद उन्हें चीफ एचआर ऑफिसर बना दिया गया।

इस साल फॉर्च्यून की 500 अमेरिकी कंपनियों की लिस्ट में सिर्फ 24 महिला सीईओ के नाम हैं। पिछले साल के मुकाबले यह 25% कम है। 2017 में 500 में से 32 कंपनियों का प्रतिनिधित्व महिलाएं कर रही थीं। पिछले 63 साल में यह संख्या सबसे ज्यादा है।

साल 1955 में पहली बार फॉर्च्यून-500 लिस्ट जारी की गई थी। फॉर्च्यून के मुताबिक इस साल महिला सीईओ की संख्या में कमी इसलिए आई क्योंकि 12 महिलाओं ने पिछले साल सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया। जबकि 4 नई महिला सीईओ लिस्ट में शामिल हुईं।

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