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ICU के बगल में कबाड़ भरा हुआ था, एक चिंगारी ने सांसत में डाली 70 मरीजों की जान

3 वर्ष पहले
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जयपुर. लालकोठी के जयपुर हॉस्पिटल में ऑपरेशन थिएटर के बगल में रखे कबाड़ ने 70 मरीजों की जान सांसत में डाल दी। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह रहा कि जिन कागजों और फाइलों को ओटी और आईसीयू से दूर ऑफिस में रखा जाना था, उनका ढेर ओटी के पास स्टोर में लगा रखा था। यहीं पर शॉर्ट-सर्किट की एक चिंगारी ने पूरे अस्पताल को धुएं के आगोश में ले लिया। अगर पुलिस, फायर ब्रिगेड की टीम मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और गम बूट पहनकर समय रहते आईसीयू और ओटी के मरीजों को बाहर नहीं निकालती तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। अस्पताल में हार्ट और अन्य गंभीर बीमारियों के 70 से ज्यादा मरीज भर्ती थे, जिन्हें पहले वहां से बाहर निकालकर सड़क पर पहुंचाया गया। यहां डॉक्टरोें ने गंभीर मरीजों की देखभाल जारी रखी और इसके बाद 20 एंबुलेंस ने 50 फेरे लगाकर मरीजों को एसएमएस व अन्य अस्पतालों में पहुंचाया। 

 

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1. फायरमैन ने दी आग की पहली सूचना
जयपुर अस्पताल में भर्ती फायरमैन गौरव शर्मा के दोनों पैरों पर प्लस्तर बंधा था। आग की सूचना इन्होंने ही सबसे पहले फायर ब्रिगेड को दी। बता दें कि गौरव अग्निशमन में सिविल डिफेंस का काम करते हैं। हाल ही एक सड़क दुर्घटना में उनके दोनों पर चोटिल हो गए थे।

 

2. बहन को गोद में  लेकर नीचे दौड़ा सोनू    
अस्पताल में आग लगते ही चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल में ज्यादातर लोग जहां बाहर की तरफ भाग रहे थे वहीं महुआ निवासी सोनू ने बहन निशा को बचाने के लिए जान जोखिम में डाल दी। बाहर से दौड़कर वह आईसीयू में पहुंचा और हार्ट के आॅपरेशन के बाद आईसीयू में भर्ती बहन को गोद में उठाकर नीचे ले आया।

 

परिजनों का हंगामा : हमारे मरीज कहां हैं?
अस्पताल से सुरक्षित निकालकर जब मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया तो वहां देरी से पहुंचे कई परिजनों ने हंगामा कर दिया। इनका कहना थाा कि हमें पता भी नहीं है कि हमारा मरीज कहां और किस हाल में है? इसके बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने उन्हें समझाकर मामला शांत करवाया।

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