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पेन किलर को ज्यादा खाने से किडनी पर पड़ता है असर

एक वर्ष पहले
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दर्द होने पर पेन किलर दवाएं खाना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे किडनी खराब हो सकती है। कई लोग बार-बार या कई सालों तक पेन किलर दवाएं खाते रहते हैं जोकि हेल्थ पर प्रतिकूल असर डालती है। कैमिस्ट के पास अपनी मर्जी से दवाएं लेकर खाने की बजाए डॉक्टर्स से कंसल्ट कर ही दवाएं लेनी चाहिए। मार्केट में ऐसी पेन किलर दवाएं भी उपलब्ध हैं जोकि शरीर के लिए सेफ हैं। ये दवाएं डॉक्टर्स की एडवाइज पर ही ली जानी चाहिए।

यह कहना है जाने-माने नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. नवजीत सिंह सिद्धू का। सेक्टर 10 के एक होटल में वर्ल्ड किडनी डे पर आयोजित अवेयरनेस प्रोग्राम में डॉ. नवजीत सिद्धू ने उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि जिम जाने वाले लोग मसल्स बनाने के लिए ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड्स या प्रोटीन लेते हैं। एक्सरसाइज भी ज्यादा करते हैं। इससे भी किडनी पर नेगेटिव असर पड़ता है। शराब व सिगरेट पीने से भी परहेज करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शुगर, ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों की किडनी जल्दी खराब होने के चांस ज्यादा रहते हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के प्रयास होने चाहिए। इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री भी मायने रखती है। अगर किसी के परिवार में पेरेंट्स की किडनी किन्हीं कारणों से जल्दी खराब हुई हो तो इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है।

उनका कहना है कि किडनी खराब होने पर दवाएं दी जाती है। वैक्सिनेशन से भी इलाज होता है। किडनी ज्यादा खराब होने पर डायलसिस की जरूरत पड़ती है। इसमें आर्टिफिशियल किडनी का इस्तेमाल करना पड़ता है। डायलसिस मशीन में मरीज का रक्त निकाला जाता है। इसे फिल्टर कर प्यूरीफाई किया जाता हैं और वापस शरीर में डाल देते हैं। अब लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से 65 साल की उम्र तक किडनी ट्रांसप्लांट संभव है।

डॉ. सिद्धांत बंसल ने कहा कि नॉर्थ इंडिया के मुकाबले साउंड इंडिया के लोग किडनी ट्रांसप्लांट व किडनी रोगों के इलाज को लेकर ज्यादा अवेयर हैं। साउथ इंडिया में हर माह करीब 400 से 500 किडनी ट्रांसप्लांट होती है जबकि नॉर्थ इंडिया में हर माह करीब पांच-छह ही किडनी ट्रांसप्लांट होती है। किडनी ट्रांसप्लांट में सक्सेस रेट 85 से 90 परसेंट हैं।

अब 65 साल की उम्र तक किडनी ट्रांसप्लांट संभव

डॉ. नवजीत सिद्धू का कहना है कि किडनी से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए लोगों को रेगुलर एक्सरसाइज करनी चाहिए। कोशिश होनी चाहिए कि शरीर का वजन सही रहे। बॉडी वेट न ज्यादा कम होना चाहिए और न ज्यादा। पानी ज्यादा से पीना चाहिए। हेल्दी डाइट लेनी चाहिए। खाने में नमक कम लेना चाहिए और पोटाशियम भी भोजन में नहीं लेना चाहिए। ऐसे में अन्नानास, पपीता और सेब फल खाना बेहतर हैं। प्रोटीन की मात्रा भी घटा देनी चाहिए। सिगरेट व शराब नहीं पीनी चाहिए। शुगर व ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखना चाहिए। वहीं, अब लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से 65 साल की उम्र तक किडनी ट्रांसप्लांट संभव है।

थोड़ा सा काम करने पर भी ज्यादा थकावट होती है

उनका कहना है कि किडनी खराब होने पर थोड़ा सा काम करने पर भी ज्यादा थकावट महसूस होती है। ऐसा महसूस होता है कि शरीर मे जान ही नहीं है। भूख कम लगती हैं। शरीर में सूजन भी आ जाती है। आंखों के पास का एरिया कुछ सूजा महसूस होता है। पैरों में सूजन रहती है। रात को बार-बार यूरीन आता है। स्किन ड्राई हो जाती हैं और खुजली होती है। शरीर में यह लक्षण दिखने पर डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। किडनी ज्यादा खराब होने पर सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। उल्टियां होने लगती है। हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और मामूली चोट पर ही फ्रेक्चर हो जाता है। कई बार ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।

डॉ. नवजीत सिंह सिद्धू
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