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सुख-समृद्धि भरे जीवन के 5 मूल मंत्र, टल जाएंगे सारे दुःख और परेशानी

Dainik Bhaskar

Apr 28, 2018, 06:29 PM IST

सिर्फ पैसे से ही सुख नहीं मिलता है, कई बार हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने से भी हम शांति से जिंदगी गुजार सकते हैं।

सिर्फ पैसे से ही सुख नहीं मिलता है, कई बार हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने से भी हम शांति से जिंदगी गुजार सकते हैं। सिर्फ पैसे से ही सुख नहीं मिलता है, कई बार हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने से भी हम शांति से जिंदगी गुजार सकते हैं।
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रिलिजन डेस्क. जीवन में शांति और सुख ये दो ही हर इंसान की चाहत होती है। सिर्फ पैसे से ही सुख नहीं मिलता है, कई बार हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने से भी हम शांति से जिंदगी गुजार सकते हैं। पैसे से सिर्फ सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं। लेकिन, सुख मन की शांति से ही आता है। हमारे धर्म ग्रंथों ने मानव मन की शांति से कई तरह के सुख पाए जा सकते हैं।

हमारी ग्रंथ परंपरा में जो 18 महापुराण माने गए हैं, उनमें से एक है पद्मपुराण। ये भगवान विष्णु की लीलाओं पर आधारित महापुराण है। भागवत की तरह ही इसमें भी कृष्ण सहित सारे अवतारों की कहानियां हैं। ये महापुराण हमें कई तरह से जीने के सूत्र देता है। इसमें ऐसी कई नीतियों के बारे में बताया गया है जिनको अपनाने से हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। इसके लिए हमें इन नीतियों को अपने जीवन में उतारना होगा।

पद्मपुराण में एक श्लोक है जो हमें इस बारे में बताता है कि सुखी जीवन के लिए किन पांच बातों को हमें अपने व्यवहार में उतारना चाहिए -

न कुर्याच्छुष्कवैराणि विवादं न च पैशुनम्।

न संवसेत्सूचकेन न कं वै मर्माणि स्पृशेत्।।

1. बिना कारण किसी से दुश्मनी न करें

कई लोगों को बात-बात पर गुस्सा करने और बिना कारण ही दूसरों से लड़ने की आदत होती है। जिसकी वजह से कई बार बिना किसी ठोस कारण के ही दूसरों से दुश्मनी हो जाती है। यह आदत कई दुःखों और परेशानियों का कारण बन सकती है, इसलिए हमेशा ध्यान रखें बिना कारण किसी से भी लड़ाई करना या दुश्मनी करना आपके लिए घातक हो सकता है।

2. विवादों से दूर रहें

कई बार हम अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार के विवादों में इस तरह शामिल हो जाते है कि वह विवाद हमारा न होते हुए भी हमारा बन जाता है। ऐसे में खुद का कोई विवाद न होने पर भी आप दूसरों की नजर में उनके दुश्मन बन जाते हैं और कई परेशानियों के शिकार बन जाते हैं। इसलिए, कभी भी किसी अन्य व्यक्ति के विवाद में शामिल न हों, ऐसी बातों से हमेशा दूर ही रहें।

3. किसी के बारे में दूसरों से बुरा न कहें

दूसरों की बुराई करना, दूसरों को नीचा दिखाना कई लोगों की आदत होती है। आगे चलकर यही आदत बर्बादी का कारण बन जाती है। अन्य लोगों के सामने दूसरों को नीचा दिखाने के लिए अच्छे-बुरे में फर्क नहीं कर पाता और किसी भी हद तक जा सकता है। जिसकी वजह से खुद के लिए परेशानी के कारण खड़े कर लेता है। जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए इस आदत से दूर रहना चाहिए।

4. दूसरों की निंदा करने वाले के साथ न रहें

व्यक्ति के जीवन पर न की सिर्फ उसकी आदतें बल्कि उससे जुड़े सभी लोगों का व्यवहार और आदतें भी असर डालती हैं। किसी से भी दोस्ती करने से पहले उसकी आदतों और व्यवहार को अच्छी तरह से परख लेने में ही भलाई होती है। हमारी दोस्तों की बुरी आदत भी हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए कभी भी ऐसे किसी व्यक्ति की संगत न करें, जिसे दूसरों की बुराई या निंदा करने की आदत हो।

5. किसी को दुःख पहुंचाने वाली बात न करें

शब्द तीर की तरह होते है, एक बार मुंह से निकलने के बाद उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। इसलिए, हर किसी को अपनी बात बहुत ही सोच-समझ कर बोलनी चाहिए। अच्छी बातों से हम किसी के सबसे प्रिय बन सकते हैं और बुरे शब्दों से सबसे बड़े शत्रु। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि अापकी कही बात से किसी को भी ठेस या दुःख न पहुंचे। यही सुखी जीवन का राज है।

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सिर्फ पैसे से ही सुख नहीं मिलता है, कई बार हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने से भी हम शांति से जिंदगी गुजार सकते हैं।सिर्फ पैसे से ही सुख नहीं मिलता है, कई बार हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने से भी हम शांति से जिंदगी गुजार सकते हैं।
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