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पेट के अलग-अलग हिस्से में होने वाला दर्द कई बीमारियों की ओर करता है इशारा, चाय, कॉफी और अल्कोहल से बचें

गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. रमेश रूप राय से जानते हैं पेट के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले दर्द बीमारियों के बारे में...

Dainik Bhaskar

Jul 09, 2018, 06:27 PM IST
Pain in different parts of the stomach leads to many diseases

हेल्थ डेस्क. पेट में दर्द के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन पेट के अलग-अलग हिस्सों में दर्द होना कई बीमारियों के होने के संकेत हैं। जैसे पेट के दाएं हिस्से के बीच दर्द हो तो ये गॉलब्लेडर स्टोन होने की ओर इशारा करते हैं। जयपुर के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. रमेश रूप राय से जानते हैं पेट के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले दर्द और बीमारियों के बारे में...

1. लक्षण: पेट के दाएं हिस्से के मध्य में दर्द।।
कारण व समाधान :
ऐसा गॉलब्लैडर में स्टोन (गॉलस्टोन) की समस्या के कारण हो सकता है। यह दर्द धीरे-धीरे पीठ तक पहुंच जाता है। यह समस्या महिला व पुरुष दोनों को प्रभावित करती है। लेकिन इसके अधिकांश मामले अधिक वजन वाली महिलाओं में पाए जाते हैं जिनकी उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक और जिनके दो से अधिक बने हुए हैं। ऐसे में डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। लेकिन यदि ऑपरेशन नहीं करवा पा रहें तो जब तक संभव हो तलाभुना व मसालेदार चीजों से परहेज करें। दिन में कम से कम 15 गिलास पानी पिएं।

2.लक्षण: पेट के मध्य भाग में दर्द।
कारण व समाधान :
यह पेट में अल्सर (पेप्टिक अल्सर) होने का लक्षण है। यह बैक्टीरियल इंफेक्शन या कई बार लगातार पेनकिलर्स टेबलेट लेने के कारण होता है। अक्सर खाना खाने के। तुरंत बाद या दो घंटे बाद या फिर भूखे रहने पर यह दर्द होता है। अक्सर ठंडा दूध या ठंडा पानी पीने से इस दर्द में राहत मिलती है। दर्द बढ़ने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

3. लक्षण: पेट के मध्य भाग से पीठ तक तेज व असहनीय दर्द।
कारण व समाधान :
यह लक्षण पेनक्रिएटाइटिस होने की ओर इशारा करता है। यह अधिक शराब पीने से होता है। कई सालों तक शराब पीने से धीरे-धीरे पेनक्रियाज (अग्न्याशय) प्रभावित होता है। शरुआती चरणों में इसके लक्षण सामने नहीं आते हैं। लेकिन समस्या बढ़ने पर धीरे-धीरे लक्षण सामने आते हैं। ऐसे में एल्कोहल से दूरी बनाएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें।

4. लक्षण : पेट दर्द, मल सख्त होने के साथ पेट का साफ न होना।
कारण व समाधान :
यह कब्ज़ के लक्षण हैं। अधिक तलाभुना, मसालेदार खाना, कोल्डड्रिंक्स पीना, जरूरत से अधिक भोजन लेना और तनाव में रहना इसके प्रमुख कारण हैं। कई बार पाचन के बाद बचा हुआ बेकार पदार्थ बड़ी आंत की ओर खिसक जाता है। लेकिन पाचन कमजोर होने पर यह पदार्थ सही वक्त पर बड़ी आंत में नहीं पहुंच पाता। नतीजतन सुबह पेट साफ नहीं होता और ऐसी स्थिति बनती है। ऐसे में दालें-राजमा, साबुत उड़द, मीट, अंडा व मछली से दूरी बनाएं। जूस के बजाय साबुत फल खाएं। पनीर, मक्खन व घी से बचें। ज्यादा पानी पिएं। खाने में फाइवर अधिक लें। दही नियमित खाएं। लहसुन, केला, अंगूर, पपीता खाएं।

5. लक्षण : बदहजमी, सीने में जलन, मुंह में खट्टा पानी
कारण व समाधान :
पेट से जुड़ी दिक्कतों से प्रभावित मरीजों में से 20 प्रतिशत लोग इसके शिकार होते हैं। इसे एसिडिटी (एसिड रिफ्लेक्स) कहते हैं। पाचनक्रिया में हमारा पेट एक एसिड स्रावित करता है जो पाचन के लिए बहुत ही जरूरी है। लेकिन कई बार यह एसिड आवश्यकता से अधिक मात्रा में बनता है, जिसके परिणामस्वरूप सीने में जलन और फैरिंक्स और पेट के बीच के पथ में पीड़ा और परेशानी का अहसास होता है। यह ज्यादातर खाली पेट रहने से ऐसा होता है। इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाते रहें। चटपटा, तीखा, मसालेदार भोजन न करें। सेब, केला और संतरा खाएं। फाइबरयुक्त चीजों को भोजन में शामिल करें। रात्रि में गरिष्ठ व कम वसायुक्त आहार करें।

ऐसे स्वस्थ रहेगा पेट

  • तली-भुनी चीजें हफ्ते में एक बार से ज्यादा न खाएं।
  • अधिक मसालेदार, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, टमाटर, सॉस, अचार, चटनी, सिरका से दूरी बनाएं।
  • अत्यधिक कॉफी, चाय और अल्कोहल से बचें। ये शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं।
  • जंक फूड व स्ट्रीट फूड से बचें।
  • खाने को चबाकर खाएं।
  • अधिक धूम्रपान भी पाचनतंत्र को प्रभावित करता है।

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