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बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
इमरान खान एक चुनावी रैली के दौरान गिर पड़े और घायल हो गए थे.
पाकिस्तान के सबसे अप्रत्याशित चुनाव, जिसका प्रचार अब लगभग आख़िरी दौर में है, एक ऐसी घटना घटी जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था.
मुल्क के राजनीतिक आकाश में तेज़ी से उभर रहे सितारे, इमरान ख़ान, एक चुनावी प्रचार के दौरान ऊंचाई से गिर पड़े और घायल हो गए.
मंच पर लिफ्ट के सहारे चढ़ने की तस्वीरें और वीडियो फुटेज पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर लगातार दिखाईं जाती रहीं.
उनके साथ हुई दुर्घटना ने जारी चुनाव प्रचार में एक नया मोड़ ला दिया.
इमरान ख़ान के मुख्य प्रतिद्वंदी बताए जाने वाले नवाज़ शरीफ़ ने एक दिन के लिए अपनी चुनावी रैलियों को रद्द करने कीघोषणा की है.
फूलों का गुलदस्तापाकिस्तान चुनाव
राष्ट्रपति असिफ़ अली ज़रदारी ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता अस्पताल में भेजा, जहां इमरान ख़ान सर में चोट और कई टांके लगने के बाद भर्ती हैं.
अचानक से ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी राजनीति में न्यायपूर्ण व्यवहार का बोलबाला हो गया है.
पिछले हफ़्तों में एक दूसरे पर हर तरह के आरोप लगा रहे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों ने अचानक से इसपर रोक लगा दी है.
सोशल मीडिया पर जहां इमरान ख़ान के समर्थक काफ़ी सक्रिय हैं, नवाज़ शरीफ़ की घोषणा पर उनकी तारीफ़े हुईं.
\'परिपक्वता का सबूत\', \'यही भाईचारे की भावना है\',\'बहुत अच्छे\' जैसे विश्लेषण ट्विटर पर देखने को मिले.
चुनाव के दौरान कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों और उम्मीदवारों पर हमले किए गए हैं.
लेकिन एक ऐसे मुल्क में जहां राजनीतिक बहस गर्मागर्म होती हैं, कुछ अन्य तरह की टिप्पणियां भी सोशिल मीडिया पर मौजूद थीं.
नंबर बढ़ाने की कोशिशएक ट्विट में संदेश था, \'सभी नंबर बढ़ाने में लगे हैं.\'
पाकिस्तानी लेखक अब्बास नासिर ने लिखा, \"ये राजनीतिक चाल है किसी तरह का भाई-चारा नहीं है. इसे इसी तरह देखा जाना चाहिए. शायद इसका फ़ायद भी हो जाए.\"
पाकिस्तानी मूल की कमिला शम्शी ने मुझे ट्विट भेजकर कहा, \"हमें ये पूछना होगा: जब उम्मीदवारों को मारा जा रहा था तो चुनावी प्रचारों पर क्यों रोक नहीं लगी.\"
उन्होंने ये संदेश कराची से भेजा था, जहां उम्मीदवारों पर लगभग रोज़ दिन हमले हो रहे हैं. पाकिस्तानी तालिबान ने इस चुनावों को इस्लाम विरोधी बताया है.
हालांकि इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ और नवाज़ शरीफ़ का दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ तालिबान के हिट-लिस्ट पर नहीं हैं.
हिंसात्मक हमलेजिस दिन इमरान ख़ान के लिफ्ट से गिरने की घटना हुई उसी दिन पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के एक उम्मीदवार के भाई को उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में बम हमले का निशाना बनाया गया. हमले में ज़हीर ख़ान और पांच अन्य की मौत हो गई.
लेकिन न तो इमरान ख़ान और ही नवाज़ शरीफ़ ने अपने विरोधी दलों पर हो रहे इस तरह के हिंसात्मक हमलों की कड़े तौर पर निंदा की है.
लेखक और पत्रकार अहमद रशीद का कहना है, \"तीन सूबों में हिंसा के घने साये में हैं लेकिन ये बदक़िस्मती है कि राजनीतिक दलों ने साथ आकर तालिबान के ख़िलाफ़ झंडा नहीं उठाया है.\"
जब मैंने इमरान ख़ान और नवाज़ शरीफ़ से ये सवाल किया कि जब दूसरे धमकियों की वजह से चुनाव प्रचार नहीं कर पा रहे जबकि उनके साथ इस तरह का कोई मामला नहीं तो दोनों का जवाब बस यूं ही सा था.
पीपीपी भी तालिबान के हिट-लिस्ट पर है.
इमरान ख़ान ने कहा कि वो तालिबान के समर्थक नहीं है. वो युद्ध के ख़िलाफ़ हैं और उन्हें लगता है कि तालिबान से बातचीत की जानी चाहिए.
नवाज़ शरीफ़ का कहना था कि उन्होंने हमलों में निशाना बनाए लोगों के ख़ानदान वालों के साथ हमदर्दी जताई है, और उनके दल को भी निशाना बनाया गया है.
बहसबहस ये है कि प्रचार पर तब क्या असर होगा जब सर पर पट्टी बांधे जब वो प्रचार में शामिल होंगे.
और क्या नवाज़ शरीफ़ की संवदेना उनके लिए फायदेमंद साबित हो पाएगी.
इमरान ख़ान ने अस्पताल से संदेश भिजवाया है, \"11 मई को अपनी लड़ाई समझो, ये सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं है, ये मुल्क की लड़ाई है.\"
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