पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनई दिल्ली. पाकिस्तान में भारतीय राजनयिकों और दूतावास के अधिकारियों को सिख श्रद्धालुओं से मिलने से रोक दिया गया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंत्रालय ने कहा कि मानक प्रक्रिया ये है कि भारतीय उच्चायोग की कान्स्युलर और प्रोटोकॉल टीम को पाकिस्तान में जाने वाले दल के साथ अटैच कर दिया जाता है। इसके जरिए दल के दूतावास संबंधी और प्रोटोकॉल संबंधी कामों में मदद की जाती है। इसमें मेडिकल और फैमिली इमरजेंसी के दौरान मदद करना शामिल रहता है।
10 दिन की पाक यात्रा पर गए हैं 1800 सिख श्रद्धालु
- विदेश मंत्रालय ने बताया कि 12 अप्रैल को 1800 सिख श्रद्धालुओं का जत्था द्विपक्षीय समझौतों के तहत धार्मिक यात्रा के लिए पाकिस्तान गया था। ये लोग रावलपिंडी स्थित गुरुद्वारा पंजाब साहिब में बैसाखी मनाने के लिए गए थे। जब ये दल वाघा स्टेशन पर 12 अप्रैल को पहुंचा तो भारतीय राजनयिकों की टीम को उनसे नहीं मिलने दिया गया।'
- ये श्रद्धालु 21 अप्रैल को भारत लौटेंगे। अपनी 10 दिन की पाकिस्तान यात्रा के दौरान ये लोग सिखों के धार्मिक स्थलों पर जाएंगे। इनमें गुरुद्वारा जन्मस्थान ननकाना साहिब और डेरा साहिब भी शामिल है।
भारतीय उच्चायुक्त को बीच रास्ते से लौटाया
- मंत्रालय ने कहा, "दल के साथ टीम की एक और मीटिंग 14 अप्रैल को गुरुद्वारा पंजाब साहब में होनी थी। यहां पर भी टीम को जत्थे से मिलने की इजाजत नहीं दी गई। पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया गुरुद्वारा जा रहे थे। वे ईटीपीबी चेयरमैन के बुलावे पर जा रहे थे, लेकिन रास्ते मेंे ही उन्हें सुरक्षा कारणों की वजह से वापस लौटा दिया गया।"
भारत ने कहा- ये समझौतों का उल्लंघन
- मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार के इस व्यवहार को समझ से परे बताया है और कहा कि ये कूटनितिक अशिष्टाचार है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान वियना समझौते और धार्मिक स्थलों पर यात्रा के शिष्टाचार समझौते का उल्लंघन कर रहा है।
- बता दें कि दोनों ही देशों ने हाल ही में प्रतिनिधियों की परेशानियों को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.