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डाउनलोड करेंपाकिस्तान में हिंसक घटनाओं और धांधली के आरोपों के बीच आम चुनावों के लिए वोट डाले जा रहे हैं.
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में पुलिस ने कहा है कि आवामी नेशनल पार्टी के दफ्तर के बाहर हुए धमाके में 11 लोग मारे गए हैं जबकि 40 से ज्यादा घायल बताए जाते हैं. तालिबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है.
तालिबान के प्रवक्ता एहसानुल्लाह एहसान ने कहा है, \"हम बहुत फ़ख़्र के साथ इस हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल करते है, इस हमले को हमने अंजाम दिया है और हम इसी तरह के और हमले करेंगे.\"
दूसरी तरफ जमाते इस्लामी ने कराची और हैदराबाद में चुनाव का बहिष्कार किया है जबकि मुत्तेहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने चुनावों में धांधली के आरोप लगाया है.
कराची में बीबीसी संवाददाता शाहजेब जिलानी के अनुसार कई उम्मीदवारों का कहना है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं.
शहर में मतदान केंद्रों के बाहर अब भी बहुत से लोग खड़े हैं. कुछ लोग तो छह-छह घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.
एमक्यूएम का कहना है कि सौ से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान पेटियां जानबूझ कर देर से पहुंचाई गईं. एमक्यूएम के अनुसार ये वही इलाके हैं जहां उसका सबसे ज्यादा असर है.
मतदाताओं में उत्साहउधर अफ़गानिस्तान की सीमा से लगने वाले इलाके में एक मतदान केंद्र पर हुई गोलीबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है.
कराची में सुबह भी गोलीबारी हुई थी, जो सेना के आने से रूक गई लेकिन फिर एएनपी के दफ्तर पर हमला हो गया.
इसके अलावा पेशावर में भी एक हमला हुआ है जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है. बलूचिस्तान के बारखान क्षेत्र में एक मतदान केंद्र पर राकेट दाग़े गए हैं.
लेकिन इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कई इलाकों में हिंसक घटनाओं के बावजूद देश भर में आम लोग बढ़ चढ़ कर चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं.
हालांकि तालिबान समेत कुछ चरमपंथी संगठनों ने लोगों को चुनाव प्रक्रिया से अलग रहने को कहा था.
मतदान केंद्रों पर कतारें लगी हैं
इस बार के चुनाव प्रचार में कई पार्टियों और उनके उम्मीदवारों को निशाना बनाया गया जिसमें कम से कम 110 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए.
चुनावों में मुख्य मुकाबला पीएमएल(एन) और क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी तहरीके इंसाफ के बीच बताया जाता है. पिछली सरकार का नेतृत्व करने वाली पीपीपी पार्टी को इन चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है.
तालिबान का सायातालिबान की तरफ से मतदान के दिन हमलों की धमकियों के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर दसियों हजार सैनिक तैनात किए गए हैं.
लेकिन चुनाव आयोग का कहना है कि मतदान को लेकर लोगों में गजब का उत्साह है और वो किसी तरह की धमकियों की परवाह नहीं कर रहे हैं.
मतदान शुरू होने से कई घंटों पहले ही पाकिस्तान ने ईरान और अफगानिस्तान से लगने वाली अपनी सीमाओं को बंद कर दिया ताकि विदेशी चरमपंथी देश में आकर कोई गड़बड़ी न कर सकें.
अधिकारियों का कहना है कि ये सीमाएं अगले दिनों तक बंद रहेंगी.
यूरोपीय संघ से आए चुनाव पर्यवेक्षकों ने कहा है कि इंतज़ाम पहले की तुलना में बेहतर हैं.
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