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डाउनलोड करेंइंदौर. दो दिन पहले ही आपने अखबारों में पढ़ा होगा कि कैट के पास सुखनिवास गांव की ओर जाने वाली सड़क पर कोई जन्म के एक दिन बाद ही बच्चे को कंटीली झाड़ियों में फेंक गया था। वह तो शुक्र था कि एक राहगीर की नजर उस पर पड़ी। उसने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी, जिसके बाद बच्चे को एमवायएच में भर्ती कराया गया, वरना बच्चे की जान भी जा
सकती थी।
फिलहाल बच्चा स्वस्थ है, लेकिन ऐसी घटनाएं ना हों और कोई भी अनचाहे बच्चे को इस तरह ना छोड़े, इसलिए महिला बाल विकास विभाग ने आदर्श पालना योजना की शुरुआत की है। प्रयोग के तौर पर इंदौर संभाग में 19 और शहर में 8 स्थानों पर पालना घर शुरू किया गया है। इसमें बच्चा डालने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। उनसे पूछताछ भी नहीं होगी। वे पुलिस-कचहरी के झंझट में भी नहीं पड़ेंगे, यानी न तो समाज में महिला की बदनामी होगी और न ही बच्चे को नुकसान पहुंचेगा।
बेनाम बच्चे को गोद भी देगी सरकार
एकीकृत बाल विकास विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक राजेश मेहरा के मुताबिक, पालना योजना के तहत मिलने वाले बच्चे के स्वास्थ्य, भोजन, कपड़े से लेकर पढ़ाई तक का खर्च सरकार उठाएगी। बच्चा जब थोड़ा बड़ा हो जाएगा तो उसे जरूरतमंद निसंतान दंपती को गोद भी दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। विभाग की वेबसाइट ‘अनमोल’ पर बच्चे के संबंध में संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। गोद देने से पहले जिला बाल कल्याण समिति दंपती से मिलेगी। उनका पूरा स्टेटस जांचा जाएगा, यानी जब तय हो जाएगा कि बच्चा सुरक्षित हाथों में रहेगा, तभी दंपती को सौंपा जाएगा। मेहरा ने बताया कि इंदौर में 8 केंद्रों के अलावा आलीराजपुर में 3, धार में 1, झाबुआ में 2, खंडवा में 3, खरगोन में 1 और बुरहानपुर में 1 पालनाघर योजना शुरू की गई है। महीने के आखिर तक बड़वानी सहित 20 अन्य स्थानों पर भी पालना केंद्र शुरू किए जाएंगे।
इंदौर में यहां हैं पालना घर
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