• Aisha Kyun
  • ये परंपरा थी सबसे दर्दनाक, जिंदा पत्नी को पति के शव के जला देते थे...

ये परंपरा थी सबसे दर्दनाक, जिंदा पत्नी को पति के शव के साथ जला देते थे...

भारत में प्राचीन काल से ही कई प्रथाएं चली आ रही हैं। कुछ परंपराएं हमारे कल्याण, सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करती हैं,

धर्म डेस्क. उज्जैन

Feb 09, 2012, 11:06 AM IST
ये परंपरा थी सबसे दर्दनाक, जिंदा पत्नी को पति के शव के जला देते थे...

भारत में प्राचीन काल से ही कई प्रथाएं चली आ रही हैं। कुछ परंपराएं हमारे कल्याण, सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करती हैं, ऐसी परंपराएं आज भी प्रचलित हैं जबकि कुछ कुरीतियां समझी जाने वाली प्रथाएं बंद करा दी गई।
प्राचीन भारत में एक कुप्रथा प्रचलित थी कि पति की मृत्यु के बाद पत्नी को भी पति के शव के साथ दाहसंस्कार में जिंदा ही बैठा दिया जाता था। इस प्रकार विधवा स्त्री को अपने प्राण देना पड़ते थे। इस परंपरा को सती प्रथा के नाम से जाना जाता है। उस समय जीवित विधवा स्त्री को समाज में मान-सम्मान प्राप्त नहीं होता था।
शास्त्रों के अनुसार जब माता सती अपने पिता प्रजापति के दक्ष के यहां हवन कुंड में कूदकर अपनी प्राण न्यौछावर कर दिए थे। क्योंकि दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान किया गया था और माता सती उस अपमान को नहीं सह सकी और आग में कूदकर प्राण त्याग दिए। माता सती के नाम से ही सती प्रथा जुड़ी हुई थी। आज भी सती शब्द का उपयोग पविव्रता स्त्री के लिए किया जाता है।
इस कुप्रथा के चलते लंबे समय तक बड़ी संख्या में विधवा स्त्रियों द्वारा पति के अंतिम संस्कार के समय प्राण त्याग दिए। इस कुरीति को बंद कराने के लिए राजा राममोहन राय ने पहल की। राममोहन राय ने इस अमानवीय प्रथा को बंद कराने के लिए आंदोलन चलाए। यह आंदोलन समाचार पत्रों और जनमंचों के माध्यम से देशभर में चलाया गया। प्रारंभ में राममोहन राय को प्रथा के समर्थकों का क्रोध भी झेलना पड़ा लेकिन अंतत: यह कुप्रथा बंद करा दी गई।



X
ये परंपरा थी सबसे दर्दनाक, जिंदा पत्नी को पति के शव के जला देते थे...
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना