--Advertisement--

5 प्वाइंट्स में जानें पेरेंट्स कैसे बनाएं बच्चों को जिम्मेदार और आत्मनिर्भर

बच्चों में संस्कार के साथ कुछ आदतें डालना भी ज़रूरी हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं।

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2018, 02:14 PM IST
कभी बच्चों से भी खाना बनवाएं, भले अभिभावक साथ मदद के लिए मौजूद रहें। इससे वे झूठा खाना छोड़ने से पहले याद रखेंगे कि यह काम आसान नहीं है। कभी बच्चों से भी खाना बनवाएं, भले अभिभावक साथ मदद के लिए मौजूद रहें। इससे वे झूठा खाना छोड़ने से पहले याद रखेंगे कि यह काम आसान नहीं है।

रिेलेशनशिप डेस्क. सभी माता-पिता अपने बच्चों की फ़िक्र करते हैं। लेकिन कई बार ज़रूरत से ज़्यादा देखभाल बच्चों के आत्मनिर्भर बनने में रोड़ा बन जाती है। बच्चों के सभी कार्य करने की बजाए, कुछ काम उन्हें ख़ुद करने की आदत डलवाने से उनमें आत्मविश्वास जागेगा और ज़रूरत पड़ने पर वे बिना किसी मदद के अपने काम कर सकेंगे। पूर्णिमा सहाय से जानते हैं ऐसा क्यों जरूरी है...


1. नाश्ता बनाना सिखाएं
कुछ मांएं बच्चों को इस डर से काम नहीं करने देतीं कि कहीं सामान न फैला दें, चोट न लग जाए। या लगता है कि बड़े हो जाएंगे तब सीख लेंगे। लेकिन जब वे बड़े होते हैं तो उन्हें काम करने की आदत ही नहीं होती। यहां बच्चों से खाना बनवाने की बात नहीं हो रही है बल्कि उन्हें थोड़ा बहुत नाश्ता आदि बनाना सिखाने की बात हो रही है। जब आप किचन में कुछ काम करें तो उनकी मदद लें जैसे- सब्ज़ी काटना, धुले बर्तन पोछकर जमाना, शाम की चाय बनाना या साथ में खड़े होकर देखने को कहें ताकि वे जान सकें कि खाना बनाना उतना आसान नहीं है जितना वे समझते हैं। इससे वे खाना बनाने वाले की मेहनत की कद्र करना सीखेंगे। कभी बच्चों से भी खाना बनवाएं, भले अभिभावक साथ मदद के लिए मौजूद रहें। इससे वे झूठा खाना छोड़ने से पहले याद रखेंगे कि यह काम आसान नहीं है।


2. ख़ुद जागना सिखाएं
सुबह का वक़्त ही ऐसा होता है जब बच्चे उठने में आलस करते हैं और उन्हें बार-बार आवाज़ लगाकर या माता-पिता को ख़ुद जाकर उठाना पड़ता है। अधिकतर बच्चे स्कूल जाने के लिए माता-पिता पर ही निर्भर होते हैं। इसकी वजह बचपन से डाली गई आदत है। यदि बच्चा 13-14 साल का है तो उसे ख़ुद जागने की आदत डलवाएं। वहीं अगर स्कूल के लिए तैयार होने की बात करें तो अधिकतर बच्चों को अभिभावक ही तैयार करते हैं। उन्हें होश सम्भालने पर ख़ुद अलार्म लगाने और ख़ुद तैयार होना भी सिखाएं। कई बार बच्चे हड़बड़ी में तैयार होकर बिना कुछ खाए सीधे भागते हैं। इस तरह की आदत डालने से वे ज़िम्मेदार बनेंगे और माता-पिता के लिए भी थोड़ी राहत होगी।

3. अपना बैग ख़ुद जमाना सिखाएं
मांएं सुबह आनन-फानन में बच्चों का बैग लगाती हैं। ऐसा सिर्फ़ कुछ घरों में ही नहीं बल्कि अधिकतर घरों में यही स्थिति होती है। मां के बैग लगाने पर कई बार कुछ किताबें या कॉपियां घर पर ही छूट जाती हैं और बच्चे घर आकर शिकायत करते हैं कि आज फलां किताब नहीं रखी या पेन घर पर ही छूट गया था। स्कूल का बैग लगाने की आदत बच्चों को डलवाएं। उन्हें बताएं कि ये काम आपका नहीं बल्कि उनका है। कहीं घूमने भी जाना हो तो बच्चों को अपना बैग ख़ुद जमाने के लिए कहें। कपड़े तह करने के साथ टॉयलेटरीज़ (ब्रश, साबुन, शैम्पू आदि) भी ख़ुद रखने के लिए कहें।

4. साफ़-सफ़ाई का सबक
हर छोटे-मोटे काम की तरह ही बच्चों में कपड़े धोने की आदत भी डालना चाहिए। बच्चे जब छोटे हों तभी से उन्हें गंदे कपड़े अलग करने की आदत डलवाएं। घर में गंदे कपड़ों के लिए टब, बाल्टी या वॉशिंग मशीन हो तो उसमें डालने के लिए कहें। ऐसे में बच्चे शुरू से अपने कपड़ों के लिए ज़िम्मेदार बनेंगे। बड़े होने पर उन्हें अपने कपड़ों को ख़ुद धोने के लिए कहें। छोटे बच्चों को अपने झूठे बर्तन सिंक में रखने और खाना न छोड़ने की सीख दें। यदि बच्चे बड़े हैं तो कभी-कभी उन्हें अपने झूठे बर्तन ख़ुद साफ़ करने के लिए भी कहें। कुल मिलाकर बात यह है कि बच्चों को हर काम किया कराया मिल जाएगा तो वे ज़िम्मेदारी उठाना और मेहनत करना दोनों से दूर भागेंगे। जीवन में सफल होने के लिए इन दोनों ही गुणों की बेहद ज़रूरत होती है। इस मामले में यह भी याद रखने की ज़रूरत है कि निर्भर बच्चों को कोई पसंद नहीं करता। अगर उच्च शिक्षा या नौकरी के लिए वे किसी पीजी या साझे अपार्टमेंट में रहने जाएं और घर की ही तरह बेतरतीब रहेंगे, तो या तो उनके साथी या पीजी मालिक उनसे किनारा कर लेंगे या वे अभिभावकों में से किसी को कहेंगे कि वे साथ आकर रहें।

5. इन बातों का ध्यान रखें
बच्चों को घर के आस-पास के कार्यक्रमों में भाग लेना सिखाएं। एक-दूसरे की मदद का भाव बचपन से ही रहेगा तो बड़े होने पर उन्हें सामाजिक जीवन में कोई दिक़्क़त का सामना नहीं करना पड़ेगा। बच्चों को हमेशा साथ लेने-छोड़ने की आदत न डालें, बल्कि सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए कहें। इससे वे कहीं जाने के लिए किसी पर निर्भर न रहें।

स्कूल का बैग लगाने की आदत बच्चों को डलवाएं। उन्हें बताएं कि ये काम आपका नहीं बल्कि उनका है। स्कूल का बैग लगाने की आदत बच्चों को डलवाएं। उन्हें बताएं कि ये काम आपका नहीं बल्कि उनका है।
X
कभी बच्चों से भी खाना बनवाएं, भले अभिभावक साथ मदद के लिए मौजूद रहें। इससे वे झूठा खाना छोड़ने से पहले याद रखेंगे कि यह काम आसान नहीं है।कभी बच्चों से भी खाना बनवाएं, भले अभिभावक साथ मदद के लिए मौजूद रहें। इससे वे झूठा खाना छोड़ने से पहले याद रखेंगे कि यह काम आसान नहीं है।
स्कूल का बैग लगाने की आदत बच्चों को डलवाएं। उन्हें बताएं कि ये काम आपका नहीं बल्कि उनका है।स्कूल का बैग लगाने की आदत बच्चों को डलवाएं। उन्हें बताएं कि ये काम आपका नहीं बल्कि उनका है।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..