3 महीने के बच्चे का इलाज कराने उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे मां-बाप, अगले 5 महीनों तक वो वहीं रहा भर्ती, लेकिन नहीं बच सकी जान

बच्चे की मौत के बाद डॉक्टर ने बुला ली पुलिस, सामने आई मां-बाप की हैरान करने वाली करतूत

dainikbhaskar.com

Apr 17, 2019, 02:24 PM IST
parents who let baby son starve to death for religious reasons jailed

खबर जरा हटके डेस्क (मॉस्को). रूस में अपने 8 महीने के बच्चे को भूखा रखकर मारने के आरोप में कोर्ट ने एक महिला को 13 साल की सजा सुनाई है, वहीं बच्चे के पिता को 10 साल की सजा सुनाई गई है। इस छोटे से बच्चे को उसके मां-बाप ने सजा देने के मकसद से कई दिनों तक भूखा रखा, जिसके चलते उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। आरोपी पेरेंट्स के मुताबिव उन्होंने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार बच्चे को सजा दी थी। कोर्ट ने पाया कि बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद भी वे उसे लेकर हॉस्पिटल नहीं पहुंचे और ना ही उसे खाना दिया। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई।

पैदा होने के बाद से ही बच्चे को रखा गया भूखा...

- ये घटना पश्चिमी रूस के 'निज्नी नोवगोरोड' इलाके में दिसंबर 2017 में सामने आई थी। जब कुपोषण की वजह से 8 महीने के बच्चे की मौत हो गई थी। इससे पहले 5 महीने तक वो हॉस्पिटल में मौत से जूझता रहा। अब इस मामले में कोर्ट ने आरोपी मां इरिना व्लासोवा (36) और उसके पति एंड्रे ब्लासोवा (34) को सजा सुनाई है।
- बच्चे के मौत की कहानी जानने के बाद हर कोई हैरान रह गया। बच्चे के माता-पिता सजा देने के लिए उसे कई-कई दिन तक भूखा रखते थे। उनका कहना है कि उनके धार्मिक क्रियाकलापों में बच्चे को भूखा रखकर ही सजा दी जाती है।
- इरिना ने अप्रैल 2017 में अपने बेटे येरामिर को जन्म दिया था। तब उसका वजन करीब 4.2 किलोग्राम था। येरामिर के पैदा होने के बाद से ही इस कपल ने उसे बेहद कठिन डाइट देने का फैसला कर लिया।
- लोकल रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चे की मां उसे दिन में सिर्फ एक बार दूध पिलाती थी, और फिर सजा देने के लिए अगले कई दिनों तक उसे भूखा रखती थी। ये सजा उसे दुर्व्यवहार करने के लिए दी जाती थी।
- इस तरह भूखा रखे जाने की वजह से जल्द ही बच्चे का वजन गिरने लगा और वो कुपोषित होकर बीमार पड़ गया। लेकिन इसके बाद भी आरोपी मां-बाप ना तो उसे लेकर हॉस्पिटल गए और ना ही उसे ढंग से खाना देना शुरू किया।

तीन महीने बाद बिगड़ गई बच्चे की हालत

- तीन महीने तक ठीक से खाना नहीं मिलने के बाद एक दिन बच्चे की हालत बेहद बिगड़ गई और वो बेहोश होकर गया, तब जाकर आरोपी बाप ने एंबुलेंस को बुलाया और उसे लेकर हॉस्पिटल पहुंचे। जब वो वहां पहुंचे तब तक बच्चा कोमा में पहुंच चुका था और गंभीर रूप से कुपोषित था।
- जब बच्चा हॉस्पिटल पहुंचा तब उसका वजन गिरकर सिर्फ 2 किलो ही बचा था। जो कि जन्म के वक्त के मुकाबले आधा ही था। अगले पांच महीनों तक येरामिर हॉस्पिटल में ही रहा, जहां डॉक्टर्स ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन सारी कोशिशों के बाद भी वो उसे नहीं बचा सके। दिसंबर 2017 में उसकी मौत हो गई।
- बच्चे की मौत के बाद डॉक्टर्स ने आरोपी पेरेंट्स के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करा दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बच्चे के पेरेंट्स ने कहा कि उनके बेटे की मौत बीमारी की वजह से हुई है, हालांकि कोर्ट ने उसे नहीं माना।

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