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पर्युषण पर्व शुक्रवार से, ये समय है तप का, इसे आध्यात्मिक दीपावली भी कहा गया है, आखिरी दिन हर छोटे-बड़े से मांगी जाती है गलतियों की माफी

क्या होता है पर्युषण का अर्थ, 8 कठिन नियमों के साथ की जाती है उपासना

Dainik Bhaskar

Sep 07, 2018, 05:25 PM IST
paryushan festival starts from 7th September 2018

रिलिजन डेस्क. जैन समाज का सबसे बड़ा पर्व पर्युषण शुक्रवार, 7 सितंबर से शुरू हो रहा है। श्वेतांबर जैन समाज इसे 8 दिन और दिगंबर समाज 10 दिन मनाता है। इस पर्व को आध्यात्मिक दीपावली भी कहते हैं। क्योंकि ये पूरा समय धर्म की सेवा और आत्म शुद्धि का माना गया है। इसमें जैन समाज के लोग ज्यादातर समय मंदिरों (उपाश्रयों) में बिताते हैं। इस दौरान हर व्यक्ति को 8 नियमों का पालन करना होता है। मान्यता है कि सालभर सांसारिक कामों में जो दोष लगते हैं, उनके निवारण के लिए इस पर्व के दौरान तप किया जाता है।


क्या होता है पर्युषण का अर्थ

पर्युषण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला परि जिसका अर्थ है चारों ओर से और उषण यानी धर्म की आराधना। इस तरह पर्युषण का अर्थ होता है चारों ओर से धर्म की आराधना। ये पर्व अंतरात्मा के जागरण का पर्व है। इस दौरान साधक अपनी शुद्धि करता है। इस दौरान हर उस सांसारिक काम से बचने की कोशिश करते हैं जिनसे दोष लगता है।


ये 8 नियम करने होते हैं पालन

पर्युषण के दौरान हर गृहस्थ को 8 नियमों का पालन करना होता है, जो इस पर्व का खास हिस्सा हैं। इन्हें हर हाल में पालन करना होता है, तभी पर्युषण पर्व सार्थक और सफल माना जाता है। ये 8 नियम हैं :

1. शास्त्रों का श्रवण यानी धर्म ग्रंथों को पढ़ना या सुनना,

2. यथाशक्ति तप यानी जितना आपसे हो सके उतना तप करें,

3. अभयदान यानी खुद को इतना सहज बना लें कि किसी को आपसे डर ना रहे,

4. सुपात्र दान यानी ऐसे लोगों को दान दें जो हर तरह से दान के योग्य हों,

5. ब्रह्मचर्य का पालन यानी वासना से दूर रहें,

6. आरंभ स्मारक का त्याग यानी पिछली बातों से मुक्ति,

7. संघ की सेवा यानी संतों और उपाश्रयों की सेवा करें, और

8. क्षमा याचना यानी अपनी गलतियों के लिए हर किसी से क्षमा मांगना।

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