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शासन से मंजूरी नहीं, लोकायुक्त पुलिस के 250 प्रकरण अटके, जुड़े हैं भ्रष्टाचार संबंधी मामले

3 वर्ष पहले
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इंदौर.    राज्य लोकायुक्त पुलिस भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी संबंधित ढाई सौ मामलों में राज्य सरकार द्वारा अनुमति नहीं मिलने से अदालतों में चार्जशीट पेश नहीं कर पा रही है। इनमें 40 से अधिक मामले लोकायुक्त पुलिस इंदौर के हैं, जिनके चालान तो तैयार है किंतु अनुमति के अभाव में मामले कोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। भ्रष्टाचार संबंधी ये मामले प्रदेश के आईएएस अफसरों से लेकर पटवारी और भृत्यों तक से जुड़े हुए हैं।

 

भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरण दर्ज कर पूरी छानबीन के बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा चालान पेश किया जाता है। सरकारी कर्मचारी या अफसर के खिलाफ चालान राज्य सरकार द्वारा अनुमति  (अभियोजन स्वीकृति) के बाद ही अदालत में पेश किए जा सकते हैं। अनुमति नहीं मिलने के कारण पिछले चार-पांच साल में राज्यभर में ऐसे प्रकरणों की संख्या 250 तक पहुंच गई है। जानकारों के मुताबिक लोकायुक्त में दर्ज प्रकरणों में राजस्व विभाग पहले नंबर पर है। लोकायुक्त संगठन द्वारा चार सालों से लगातार अभियोजन स्वीकृति के लिए सामान्य प्रशासन विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। मंजूरी तो दूर विभाग की ओर से जवाब तक नहीं दिया जा रहा है। 

 

एक आईएएस पर 25 मुकदमे 
लोकायुक्त में एक आईएएस पर 25 प्रकरण दर्ज हैं। उन पर उज्जैन संभाग आयुक्त रहते हुए जमीनों के फर्जीवाड़े के आरोप लगे थे। वे वर्तमान में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पदस्थ हैं। लोकायुक्त ने 2014 में अभियोजन मंजूरी के लिए फाइल भेजी थी, किंतु अनुमति नहीं मिली। प्रकरणों में तीन तहसीलदार व 24 पटवारी आरोपी हैं। 

 

नौ साल से लटका है निगम इंजीनियर का केस 

 

लोकायुक्त पुलिस इंदौर के 40 से अधिक मामलों में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। इनमें नगर निगम इंदौर के इंजीनियर दिलीपसिंह चौहान के खिलाफ केस में नौ साल से अनुमति नहीं मिल सकी है।

 

केस हैं लंबित 
राजस्व विभाग77  
पंचायत, ग्रामीण विकास29  
अन्य निकाय31  
सामान्य प्रशासन27 
सहकारिता25 
वन विभाग12 
नगरीय प्रशासन11 
स्कूल शिक्षा विभाग09 
आदिम जाति कल्याण विभाग05 
वाणिज्यिक कर विभाग04 
 
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