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यहां कीचड़ को साफ कर पीने का पानी इकट्ठा करते हैं लोग, ऐसे है हालात

3 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा. गर्मी के साथ ही जिले में पानी का संकट गहरा गया है। जिले के नान कमांड क्षेत्रों के 130 गांवों में पेयजल स्रोत सूख चुके हैं। भास्कर ने हांदडियापाडा, नल्दा, मोहकमपुरा और डूंगरा क्षेत्र  के हालात देखे तो भयावह तस्वीर सामने आई। कहीं लोग कीचड़ का पानी पी रहे हैं तो कहीं पानी के लिए सुबह 5 बजे से कुएं के किनारे लाइन में लगना पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर तो कई किलोमीटर दूर चल कर एक मटका पानी लाना पड़ रहा है।

 

छोटी सरवा क्षेत्र की तेलनी नदी जो पूरी तरह सूख चुकी है। ग्रामीण तीन किलोमीटर चल कर उसके तल में गड्ढा खोद कर बूंद-बूंद पानी एकत्रित कर रहे हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने गांव से पलायन करना भी शुरू कर दिया है। अब वे चार महीने तक उन गांवों में अपने परिचितों के पास रहेंगे जहां पर पानी उपलब्ध है। हालात इतने विकट कि इन 130 गांवों के लोग पूरे सीजन में केवल एक बार ही फसल उगा पाते हैं। बाकी के समय पुरुषों को दूसरी स्थानों पर लोगों के खेतों में काम करके अपना पेट पालना पड़ रहा है। इस कारण बच्चों का स्कूल जाना भी छूट चुका है। जिले में सबसे अधिक परेशानी बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के आबापुरा, दानपुर, घोड़ी तेजपुर, कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुशलगढ़, सज्जनगढ़, मोहकमपुरा, बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र के गांगड़तलाई, डूंगरा, खेड़ा सहित कई 130 गांवों में है। 

 

ये तस्वीर हमें विचलित क्यों नहीं करती? आइए! मिलकर इसका समाधान तलाशें

 

यह तस्वीर स्तब्ध करने वाली है। माही की नगर में अगर इसे देख हम विचलित नहीं होते हैं तो हम भी मूक-तमाशा देखने वाली भीड़ का एक हिस्सा है। जिस शहर को राजस्थान का चेरापूंजी कहा जाता है। वहां से एेसी तस्वीर आना यकीनन चौंकाती है। यह तस्वीर है शहर से 25 किलोमीटर दूर नल्दा गांव की। यहां ग्रामीण कीचड़ के पानी को छानकर पी रहे हैं। यह पानी भी उन्हें उनके घर से दो किलोमीटर दूर पहाड़ी पार कर नसीब हो रहा है। हावड़ियापाड़ा में बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां पानी की मशक्कत में बीत जाती है।

 

यहां बरसाती नाले के पेंदे को खोदकर लोग पानी जुटाते हैं। करीब 20 से 25 गांवों में गर्मियों के यह 4 महीने पानी के आपातकाल की तरह है। बेशक पानी के इतने भयावह संकट से इन लोगों को मुक्ति मिल सकती है। शर्त यह है कि इन लोगों को पीने का पानी मिले इस ओर ईमानदार कोशिश होनी चाहिए। लेकिन त्रासदी यह है कि जिन नेता, अफसरों व संगठनों को इनका समाधान करना है, उनका ध्यान इस ओर नहीं है। आइए हम सब संकल्प लें कि पानी की बर्बादी रोकेंगे। नेता, प्रशासन और संगठन ठान ले तो यहां पानी पहुंचाना कोई दूर की बात नहीं है।

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