दूसरे प्रदेशों से घर लौटने वाले लोगों की नहीं हो रही कोरोना की जांच, सहमे हैं ग्रामीण, कर रहे बहिष्कार

Giridih News - वैश्विक महामारी कोरोना वायरस, कोविड-19 को लेकर पूरा देश लॉक डाउन हो चुका है। परिवहन सहित राज्यों की सीमाएं भी इसकी...

Mar 27, 2020, 07:37 AM IST
Rajdhanwar News - people returning home from other states are not being investigated for corona the villagers are scared boycotting

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस, कोविड-19 को लेकर पूरा देश लॉक डाउन हो चुका है। परिवहन सहित राज्यों की सीमाएं भी इसकी विभीषिका को देखते हुए सील कर दी गयी हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री ने अभिभाषण में अगले 21 दिनों तक तमाम लोगों को घरों में रहने का आदेश दिया है। इस दौरान वे मुख्य रूप से लोगों को सोशल-डिस्टेंसिंग का पालन करने को लेकर गंभीर रहने पर जोर दिया। हालांकि रविवार को लोगों ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्वयं स्फूर्त जनता कर्फ्यू में उनका अविस्मरणीय साथ दिया था। कोरोना वायरस के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए लोग भी सहमे हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ झारखंड सीमा से सटे राज्यों के लोग तरह-तरह के उपाय अपना कर घर पहुंच रहे। उनका न तो किसी प्रकार से जांच हो पा रहा और न ही वे किसी तरह से सतर्कता बरत रहे हैं। घर परिवार के भी लोग मोह माया के जाल में फंस कर सदस्यों को अपने बीच जगह दे रहे। ऐसे में लोग सरकारी निर्देश को भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रख रहे हैं। मुख्य रूप से इस मामले को गंभीरता से लिया जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री के पुनः देश के नाम संबोधन के बाद उनके 21 दिनों तक घरों में रह कर इसका मुकाबला करने के निर्देश को लोग पालन करते दिखे। हालांकि कुछ मनचले व गैर जिम्मेदाराना तरीके के लोग इस दौरान रास्ते पर दिखे पर प्रशासनिक कर्मियों ने उन्हें धारा 144 के अनुपालन के तौर-तरीके अच्छे से बतलाए पर बात इतने से खत्म नहीं होती है। इन सब के बीच घरों में कैद होने के बाद लोगों के सामने कई प्रकार की समस्याएं उठ खड़ी होने की स्थिति बन गयी है। लॉकडाउन देश हित में उठाया गया आवश्यक कदम है। इसके बाद लोगों को घरों में कैद रहना पड़ रहा है। ऐसे में रोज मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों के साथ समस्याएं गहरी पैठ बना रही हैं जो मुख्य रूप से नीचे के तबके से आते हैं। जितना कमाते थे उतना ही खाते थे। तीन-चार परिवार का बोझ एक अकेला पर होता था। अगर इनके खाने पीने की व्यवस्था पर बेहतर तरीके से कार्य न किया गया तो जल्द ही कई लोग कुपोषण सहित भुखमरी के शिकार हो सकते हैं। यह स्थिति गांवों में भी व्यापक रूप से आ सकती है। मंगलवार को प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद झारखंड के प्रवासियों में कौतुहल का विषय बना है। इन प्रवासी मजदूरों की स्थिति क्या करें, क्या न करें की असमंजस की स्थिति आ गयी है। प्रवासियों की बात करें तो झारखंड के मजदूरों का पलायन लगभग देश के सभी राज्यों की तरफ हुआ है। मुख्य रूप से गिरिडीह की जनसंख्या का कुछ हिस्सा राज्य से बाहर निवास करती है। इनमें से बहुतों के पास वहां रहने के लिए अपना कमरा तक नहीं है। वे किराया के कमरा या फिर किसी अन्य तरह की अस्थायी व्यवस्था के बदौलत वहां पर मजदूरी कर अपना व अपने परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में कुछ के पास बेगारी की समस्याएं आ गयी हैं जो उसे भुखमरी तक भी ले जा सकती है। वे अपने गृह जिला लौटने को बेताब हो गये हैं। जिनमें गिरिडीह के सभी प्रखंडों से लोग हैं। इस पर कुछ लोगों ने उनकी मनोदशा और स्थितियों को सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री तक भी पहुंचाने का प्रयास किया है। ऐसे में उन लोगों के सामने बहुत ही विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है। आवश्यक खाद्य सामाग्री की कालाबाजारी और मूल्य से अधिक दामों में बेचने का भी प्रकरण जोर पकड़ लिया है। लोगों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रेणीबद्ध आवश्यक सामग्री के मूल्यों में इजाफा देखा जा सकता है। कुछ दुकानदार धड़ल्ले से बिना किसी डर, भय के लोगों की स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। हालांकि लोग रोजमर्रा के जरूरत को ध्यान में रखते हुए वृद्धि दर पर भी सामग्रियां खरीदने को विवश हैं। जागरूकता का अभाव भी लोगों को मूल्य चुकाने के लिए विवश कर रहा है। प्रशासन इस पर नकेल कसने का अपना पूरा प्रयास कर लोगों को परेशानियों को दूर करने का कार्य करना प्रारंभ कर चुकी है। अगर प्रखंडों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिह्नित कर दुकानों को आवश्यक सामग्री के बेचने की जिम्मेदारी दी जाती है तो इससे लोगों को राहत मिल सकती है। बीते दिन से बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था से भी लोग परेशान हैं और जैसे-जैसे दिन बढ़ेगा, तापमान में वृद्धि के साथ पेयजल की समस्याओं से भी लोगों को दो-चार होना पड़ता है। डीसी ने वीडियो जारी कर सभी थोक, खुदरा विक्रेता दुकानदारों को स्पष्ट रूप से उचित मूल्य पर ही समानों की बिक्री का आदेश दिया है। किसी प्रकार का जमाखोरी, कालाबाजारी प्रकाश में आने पर विधि सम्मत कार्रवाई करने की भी बात कही है।

सीमा सील के बावजूद मनकडीह में भी ट्रकों से पहुंचे लोग, नहीं हुई स्वास्थ्य जांच

चतरो | एक तरफ जहां स्थानीय प्रशासन द्वारा लगातार सीमाओं को सील किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति दूसरे राज्य से यहां नहीं पहुंच सकें। लेकिन लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर ट्रकों से आ रहे हैं। ऐसा ही एक नजारा देवरी थाना क्षेत्र के मनकडीहा गांव के पास गुरुवार को देखने को मिला जहां एक ट्रक में दर्जनों मजदूर सवार होकर गांव वापस आये। बताते चलें कि उक्त सभी मजदूर दूसरे राज्य में रह कर मजदूरी करता था लेकिन लॉक डाउन के बाद जब सरकार ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की उसके बाद से स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट है। बावजूद इसके जान जोखिम में डाल कर दर्जनों मजदूर एक-एक गांव में पहुंचना दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही विधि व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। सभी जगह चेक पोस्ट व नाकेबंदी के बावजूद भी आखिर दूसरे राज्य में रहने वाले मजदूर गांव कैसे पहुंच रहे हैं।

सुबह 6 बजे ट्रक से उतरे भारी संख्या में लोग

गिरिडीह | कोरोना वायरस के मद्देनजर पूरे देश को जहां लॉकडाउन किया गया है। उसके बावजूद भी दूसरे प्रदेश से ट्रक में भरकर लोग गिरिडीह पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोग जांच कराने सरकारी अस्पताल पहुंचे तो कुछ लोग चुपचाप अपने घर का रास्ता नाप ले रहे हैं। गुरुवार की सुबह 6 बजे के आसपास एक ट्रक में भरकर लोग जेसी बोस चौक स्थित बीटी फिल्ड में उतरे। जिसमें से कई लोग जांच के लिए सदर अस्पताल पहुंचे। ट्रक से उतरने वाले कई लोग छूपकर पेट्रोल पंप होते हुए बाइपास रोड में पैदल ही निकल लिये। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दिया। जानकारी मिलते ही पुलिस बल वहां पहुंची और भागने वाले कई लोगाें को समझा-बुझाकर जांच के लिए सदर अस्पताल भेजा।

लॉकडाउन के बाद प्रवासी मजदूरों के लौटने का सिलसिला है जारी

भास्कर न्यूज | बगोदर

देश व्यापी लॉक डाउन के मद्देनजर प्रवासी मजदूरों की वापसी का सिलसिला जारी है। गुरुवार को दो ट्रक और एक बस पर लद कर कोलकाता से बगोदर और आसपास के 70 से ज्यादा मजदूर बगोदर पहुंचे। बगोदर पुलिस प्रशासन ने मजदूरों को बगोदर सीएचसी पहुंचाया। जहां कतारबद्ध होकर 70 से ऊपर प्रवासी मजदूरों ने स्वास्थ्य की जांच कराई। स्वास्थ्य जांच के पश्चात आवश्यक दिशा-निर्देश के बाद उन्हें उनके पैतृक निवास भेज दिया गया। बताया जाता है कि दो ट्रक और एक बस को रिजर्व कर 70 से ज्यादा मजदूर गुरुवार सुबह बगोदर पहुंचे थे। इन पर स्थानीय पुलिस प्रशासन की नजर पड़ी। तत्पश्चात उन्हें सीएचसी ले जाया गया। बताते चलें कि सरकार की ओर से ट्रेन रद्द कर दी गई है। जो जहां हैं उन्हें वहीं रहने की अपील की गई है। मगर आर्थिक संकट व परेशानी के मद्देनजर मजदूर लौट रहे हैं। येन केन प्रकारेण बमुश्किल अत्यधिक किराया चुका कर जैसे-तैसे ट्रक और बसों में लद कर लौट रहे हैं।

कोलकाता से बगोदर लौटे मजदूर।

ट्रक से लौटे प्रवासी मजदूर।

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