बेघर लोगों की आवाज बुलंद करने के लिए शून्य से नीचे तापमान में सोए लाेग

Hamirpur News - बेघर लोगों को रैन बसेरा मिले इसको लेकर कुल्लू के भुंतर कस्बे में 70 से अधिक लोगों ने शून्य से नीचे तापमान में खुले...

Dec 09, 2019, 07:21 AM IST
Kullu News - people will sleep in temperatures below zero to raise the voice of homeless people
बेघर लोगों को रैन बसेरा मिले इसको लेकर कुल्लू के भुंतर कस्बे में 70 से अधिक लोगों ने शून्य से नीचे तापमान में खुले आसमान तले रात बिताई। बेघर यानि फुटपाथ, बस स्टैंड सहित गली मौहल्ले में सर्दी रातें बिताने वालों की आवाज बुलंद करने को लेकर विभिन्न संगठनों के लोगों ने एकजुट होकर वर्ल्ड बिग आउट स्लीप डे मनाया। सरकार और उसके हुकमरानों में बेघर लोगों के प्रति संवेदनशीलता पैदा हो। इतना ही नहीं इन्होंने आम जनता को भी एक जागरूकता का संदेश दिया है। बहरहाल, इस आयोजन में भुंतर कस्बे के ट्रक युनियन के पास 70 से अधिक लोगों ने बेघर लोगों की आवाज बुलंद करने के लिए शून्य से 1 डिग्री सैल्सियस तापमान में रात खुले आसमान तले बिताई।

इस आयोजन में सहारा, मानव सेवा और लोकतंत्र संगठनों के पदाधिकारियों महिमन चन्द्र, राजेन्द्र चौहान, पाबिंद्र कुमार, श्याम लाल हांडा, डिंपल, डीआर आनंद, राकेश शर्मा, माइकल, मेहता, दीपक कुमार, अरुण गर्ग भी शामिल रहे।

जिला कुल्लू के प्रदेश में 789 लाेग बेघर, अर्वन डिपार्टमेंट ने 2018 में किया था सर्वे

भुंतर कस्बे में वर्ल्ड बिग आउट स्लीप डे मनाया

बेघर लोगों की हकीकत...संदीप के अनुसार वास्तविकता देखी जाए तो बेघरों में सबसे बड़ा तबका उन लोगों का है जो विकास के नाम पर कहीं ना कहीं से उजाडे गए हैं जिनमें भी सबसे बड़ा तबका उनका है जिनकी उन स्थानों पर जमीनें ना के बराबर थी और खेती मजदूरी या कृषि से जुड़े हुए काम कर रहे थे। चाहे कोयला खदाने हों या बड़े बांध, या हवाई पट्टियां, सड़कें या अन्य बड़ी परियोजनाएं, इसके अलावा बाढ़, सूखा, और अब सरकारी आदेशों से जंगलों से उजाड़े जाने वाले आदिवासियों की संख्या है।

कई परिवार आसमान नीचे आए...कुल्लू की दर्जनों समाजिक संस्थाओं के साथ साथ कई लोगों का पूरा परिवार इस आयोजन में शामिल हुआ। जिसमें भंंुतर झुग्गी कालोनी के लोग भी शामिल रहे। जबकि आसपास की सामाजिक संस्थाओं से जुडे लोगों ने इस आयोजन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। ताकि बेघर लोगों को रैन बसेरा मिले।

देश के 26 शहरों में वर्ल्ड िबग स्लीप आउट डे का आयोजन: संदीप मिन्हास ने बताया कि बेघरों की आवाज को बुलंद करने के लिए इस तरह का कार्यक्रम भारत के लगभग 26 शहरों में किया गया। जबकि इस कार्यक्रम के तहत दुनिया भर के 10 लाख लोग खुले आसमान के नीचे सोए। आयोजन समन्वयक संदीप मिन्हास के अनुसार इसके आयोजन का मकसद सरकारों को बेघर लोगों के लिए ठोस कदम उठाने तथा आम समाज को इनके प्रति जागरूक व संवेदनशील होने के लिए किया गया।

रैन बसेरे को लेकर गंभीर नहीं कोई...हालांकि इन बेघर लोगों को फुटपाथ और बस स्टैंड आदि क्षेत्रों से रैस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए रैन बसेरे खोल रखे हैं लेकिन ये रैन बसेरे अक्सर खाली रहते हैं। प्रदेश में गिने चुने रैन बसेरे होंगे जहां इक्का दुक्का बेघर लोग ही रात बिताते हुए नजर आते हैं परंतु ज्यादातर लोग अभी भी फुटपाथ में नजर आते हैं।

प्रदेश में 789 लोग बेघर, कुल्लू में है दो दर्जन लोग...वर्ल्ड बिग स्लीप आउट डे आयोजन के समन्वयक संदीप मिन्हास के अनुसार वर्ष 2018 में अर्वन डिपार्टमेंट ने एक सर्वे किया था। जिसमें हालांकि हिमाचल प्रदेश में हजारों की संख्या में बेघर लोगों का आंकड़ा सामने आया था लेकिन हजारों के इस आंकड़े को फिल्टर करने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने बाद में प्रदेश भर में 789 बेघर लोगों का आंकड़ा पेश किया था। जिसमें कुल्लू जिला में करीब दो दर्जन बेघर लोग शामिल थे।

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