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पेराफेरी की लटकती तलवार से दून क्षेत्र में नहीं हो रहा विकास
चंडीगढ़ से करीब 20 किलोमीटर दूर पिंजौर का दून क्षेत्र जहां पर दर्जनों गांव हरियाणा के अंतर्गत पड़ते हैं इनमें से लगभग 4 दर्जन से ज्यादा ऐसे गांव हैं जिस पर पिछले करीब 65 वर्षों से पेराफेरी एक्ट की तलवार लटकी होने से वहां पर विकास नहीं हो पा रहा। इन गांवों पर दोहरी मार पड़ी हुई है जिसमें एक तो पेराफेरी एक्ट तो दूरी गांवों में पिछले करीब 110 साल से लाल डोरा ही नहीं बढ़ा। पूर्व सरपंच मंदीप हैपी, पूर्व बीडीसी जरनैल सिंह ने बताया कि दून क्षेत्र में पेराफेरी सबसे बड़ा ग्रहण लगा हुआ है। जिस कारण ग्रामीण व किसान अपनी ही जमीन पर झुगीनुमा घर तक नहीं बना सकते। यही नहीं खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए भी छोटा सा कमरा तक नहीं बना सकते। इसके अलावा ग्रामिणों की रोड किनारे भी जमीन है वो रोजी रोटी के लिए छोटी सी दुकान तक नहीं चला सकते। दून क्षेत्र व आसपास रोजगार के साधन न होने के कारण अधिकतर लोग खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं, लेकिन खेतीबाड़ी में भी इस महंगाई में अब घर चला पाना मुश्किल हो गया। अगर कोई अपनी जमीन पर एक कमरा भी बना लेता है तो उसे नोटिस देकर गिराने के लिए डीटीपी विभाग आ जाता है। स्थानीय लोगों ने लंबे अरसे से सरकार के आगे दून क्षेत्र के गांवों में पेराफेरी एक्ट समाप्त करने के लिए मांग की हुई है, लेकिन अभी तक किसी भी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
क्या है पेराफेरी एक्ट... 1952 में जब चंडीगढ़ बना था उस समय चंडीगढ़ से 10 मील एरिया में कोई भी अवैध निर्माण न करने के लिए पेरीफेरी एक्ट 1952 और हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट एक्ट 1975 बनाया गया था। ताकि चंडीगढ़ के आसपास हरियाली बनी रहे। शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने बताया कि 1952 में चंडीगढ़ बनाने के दौरान पेराफेरी एक्ट लगाया गया। उस समय इसमें कालका हल्के के 102 गांव इस एक्ट में आए। उसके बाद 1966 में हरियाणा और 1972 में जिला नगर योजनाकार विभाग ने हवाई सर्वे किया। जिसमें उन्होंने 52 गांव ओर इस एक्ट में ले लिए। जो कि विभाग की गलती से आए थे, इसी वजह से लोगों को समस्या पेश आई। इसके अलावा गांवों में पिछले करीब 110 साल से लाल डोरा भी नहीं बढ़ा। जबकि सयुंक्त पंजाब का आखिरी बन्दोबस्त जो कि 1902 से 1909 तक किया गया, इसी दौरान लाल डोरा बढ़ाया गया था। 2010 में भी विजय बंसल द्वारा लाल डोरा बढ़ाने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका नंबर 6169-2010 डाली गई। न्यायालय ने 24 मार्च 2014 को फैसला किया तब हरियाणा विधानसभा में बिल पास किया गया था कि गांव की फिरनी तक क्षेत्र को लाल डोरा माना गया है। यानी आबादी देह तक, लेकिन जिला पंचकूला के अधिकतर ग्रामीण इलाकों में फिरनी ही नहीं है। जिस कारण उनको इसका कोई लाभ नहीं है। अब इन इलाकों में लाल डोरा बढ़ा नहीं और पेराफेरी लागू होने के कारण कोई भी ग्रामीण अपनी भूमि पर आशियाना नहीं बना सका। समयानुसार बढ़ती आबादी के कारण पंजाब सरकार ने मोहाली, नयागांव, जीरकपुर, खरड़ व डेराबसी आदि तक व हरियाणा सरकार ने पंचकूला जैसे बड़े शहर विकसित कर दिए। जिसमें इन अधिसूचनाओं को रद्द किया जा चुका है।