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डाउनलोड करेंइंटरनेशनल डेस्क. सीरिया अपने ही लोगों की जान लेने के बाद अब अमेरिका समेत दुनिया के बाकी देशों के निशाने पर है। ये देश पिछले 7 सालों से सिविल वॉर की आग में झुलस रहा है। हालांकि, इस जंग की शुरुआत कुछ मुट्ठीभर बच्चों के अरेस्ट से शुरू हुई थी, जिसने सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद अब तक के सबसे बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया। इस जंग में अब तक 400000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
- 2011 से देशभर में शुरू हुए इस प्रदर्शन ने सीरिया में गृह युद्ध का रूप ले लिया। इस संघर्ष ने कभी वफादार मानी जाने वाली प्रेसिडेंट बशर अल-असद की आधी सेना को भी उनके खिलाफ कर दिया।
- सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए सीरियन आर्मी के अफसरों के एक ग्रुप ने आर्मी छोड़कर अपनी फ्री सीरियन आर्मी बना ली।
- प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग को लेकर हजारों की संख्या में जवानों ने सेना से अपना पद छोड़ दिया और असद सेना के खिलाफ गुरिल्ला वॉर छेड़ने की शपथ ले ली।
- इसके बाद शुरू हुए युद्ध ने देश को तबाह करके रख दिया। इस जंग के बीच देश के कई हिस्सों में कब्जा जमाने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस ने बाकी कसर भी पूरी कर दी।
- 2014 में वर्ल्ड बैंक ने अनुमान लगाया था कि हर चार में से पांच सीरियन गरीबी और बेरोजगारी में जी रहा है। 2011 में इनकी संख्या आबादी का 15 फीसदी थी, जो 2014 में 58 फीसदी हो गई।
- यूनाइटेड नेशन के मुताबिक, सीरिया से करीब 40 लाख लोगों को देश छोड़ना पड़ा। वहीं, करीब 75 लाख की आबादी देश में ही विस्थापितों की जिंदगी जी रही है।
आगे की स्लाइड्स में फोटोज में देखें पिछले सात साल में जंग के दौर के कुछ दर्दनाक पल..
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