पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंऊपर नज़र आ रही तस्वीर इंटरनेशनल न्यूयॉर्क टाइम्स के मलेशिया संस्करण में छपी है.
तस्वीर से ज़ाहिर है कि इसमें नज़र आ रहे सुअरों के चेहरों को \'सेंसर\' किया गया है यानी छिपाया गया है.
लेकिन ऐसा क्यों किया गया है, जबकि यही तस्वीर इंटरनेशनल न्यूयॉर्क टाइम्स के अन्य देशों में छपने वाले संस्करणों में बिना किसी \'सेंसरशिप\' के छपी है.
मलय मेल में छपी ख़बर के मुताबिक़, तस्वीर में सुअरों के चेहरे पर जो काला पर्दा सा नज़र आ रहा है, वो मलेशिया की प्रिंटिंग फर्म केएचएल का क़माल है.
ये तस्वीर अमरीका में सुअर पालन से जुड़ी एक ख़बर के साथ छपी थी.
प्रिंटिंग फर्म केएचएल के एक प्रतिनिधि का कहना है कि ऐसा सुअरों के संबंध में उनकी नीति की वजह से किया गया क्योंकि मलेशिया एक \'मुस्लिम मुल्क\' है.
सावधानीमलय मेल में छपी ख़बर के अनुसार, मलेशिया में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जो सुअरों की तस्वीर छापने पर पाबंदी लगाता हो.
लेकिन स्थानीय मीडिया बड़ी सावधानी बरतता है कि किसी वजह से मुसलमानों की भावनाएं आहत नहीं हों क्योंकि देश की दो-तिहाई आबादी मुसलमानों की है.
इस बारे में सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि इस तरह की तस्वीरें छापना क़ानून के विरुद्ध तो नहीं है, लेकिन प्रकाशकों को \'विभिन्न संस्कृतियों की संवेदनशीलता\' को ध्यान में रखना चाहिए.
ख़्याल भावनाओं कावैसे मलेशिया में इस बात का ख़ास ख़्याल रखा जा रहा है कि मुसलमानों की भावनाएं आहत ना हों.
बीते साल टेलीविज़न पर पोप फ्रांसिस के बारे में एक डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण से पहले चेतावनी जारी की गई थी.
इसी तरह जनवरी में ही एक भारतीय फिल्म से \'या अल्लाह\' शब्द को कथित तौर पर हटा दिया गया था.
कई वर्ष पहले साल 2005 में बच्चों की एक फिल्म को सिनेमाघरों में प्रतिबंधित कर दिया गया था क्योंकि इसका नाम, उस शब्द से मेल खाता था जिसका अर्थ मलय भाषा में सुअर होता है.
हालांकि दर्शकों की शिक़ायतों के मद्देनज़र बाद में इस प्रतिबंध को हटाना पड़ा था और बाद में यही फिल्म टेलीविज़न पर दिखाई गई थी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.