पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंजालंधर. अब घर के बाहर कहीं भी गाड़ी खड़ी करने का भी नगर निगम आपसे चार्ज वसूलेगा। डेवलपमेंट के नाम पर रेवेन्यू बढ़ाने के लिए पंजाब सरकार ने शहरों-कस्बों के लिए पार्किंग पॉलिसी जारी की है। शहर में पार्किंग की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए निगम के फैसले का विरोध होना तय है। लोकल बॉडी डिपार्टमेंट का तर्क है कि रेजिडेंशियल एरिया में अॉन रोड पार्किंग पर फीस लगाने का उद्देश्य लोगों को कम कारें रखने के लिए प्रेरित करना है। साइकिल पर कोई पार्किंग फीस नहीं होगी। सड़कों पर पार्किंग खत्म कर गलियों में पार्किंग बनाना है, जिसके लिए लोगों को फीस देनी होगी। शहर में फ्री पार्किंग एरिया भी बनाए जाएंगे।
लागू कैसे होगी इसका कोई प्रारूप तय नहीं
लोकल बॉडी डिपार्टमेंट ने 31 अगस्त 2018 तक पॉलिसी पर रिजल्ट मांगा है। हाउस में पास होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। कमर्शियल और रेजिडेंशियल एरिया में पार्किंग पर विस्तृत पॉलिसी है, लेकिन ये लागू कैसे होगी इसका कोई प्रारूप तय नहीं है। वाहन की पार्किंग अगर तीन घटे से ज्यादा होगी तो इसे सड़क से दूर के पार्किंग प्लेस में शिफ्ट किया जाएगा।
तीन कमियां
1) 1.5 लाख से ज्यादा फोर व्हीलर और शहर में सिर्फ 12 पार्किंग प्लेस
2) 2 लाख गाड़ियों के लिए पार्किंग प्लेस की जमीन मिलना मुश्किल
3)12 लाख की आबादी से टैक्स रिकवरी में निगम फेल, नया सिस्टम कैसे चलाएगा
बिना प्लानिंग की पॉलिसी में यहां सुधार की गुंजाइश
1) मल्टीपल पार्किंग जोन तय होंगे, पेड पार्किंग, फ्री पार्किंग, नो पार्किंग एरिया होगा।
कमी- पहले बनाई पार्किंग मुश्किल से चल रही हैं। लोग इस्तेमाल नहीं करना चाहते।
2) पार्किंग में ऑटो, टैक्सी, ई-रिक्शा, साइकिल रिक्शा को पहल दी जाएगी।
कमी- सबसे बड़ी मुश्किल शहर के अवैध अ़ॉटो, जिन पर पुलिस आजतक कुछ नहीं कर सकी।
3) डिमांड के मुताबिक पार्किंग रेट, बेस प्राइज तय होगा। समय के हिसाब से चार्ज।
कमी- कहने में तो अच्छा, मगर ये व्यवस्था हकीकत में कैसे मेनटेन होगी पता नहीं।
4) पैनल्टी लगेगी। ट्रैफिक पुलिस अॉपरेटर की मदद करेगी, फीस लेगी।
कमी- शहर में ट्रैफिक सुचारु रखने के लिए तो पुलिस के पास मुलाजिम पहले से ही कम हैं।
5) तय समय के लिए गुड्स सप्लाई वाहनों को फीस से छूट दी जाएगी।
कमी- ज्यादातर गुड्स सप्लाई व्हीकल रात को पार्क होते हैं। दिन-रात कैसे काम होगा।
6) पार्किंग की आय से डेवलपमेंट होगी। नॉन मोटराइज्ड रोड और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर खर्च करेंगे।
कमी- पहले पार्किंग बनेंगी या पहले लोगों से फीस ली जाएगी।
7) रात में कमर्शियल व्हीकल्स के लिए रोड्स नोटिफाई होंंगी। पार्किंग फीस ली जाएगी।
कमी- सालों से कार बाजार मालिकों की मनमर्जी के खिलाफ आज तक कुछ नहीं किया गया।
8) पुराने शहर में हैवी व्हीकल्स बैन करेंगे। कब्जे हटाएंगे। कमर्शियल एक्टिविटी के लिए हलके वाहन को मंजूरी।
कमी- वोट की राजनीति के कारण ऐसा करना मुश्किल।
9) अस्पताल, स्कूल-कालेज और हेरिटेज बिल्डिंग के लिए सवारी उतारने-चढ़ाने के लिए जगह छोड़ेंगे।
कमी- ज्यादातर ने तो पार्किंग की जगह पर ही कब्जे कर रखे।
10) सांस्कृतिक, कम्युनिटी, धार्मिक, स्पोट्र्स सेंटर्स के पास पार्किंग की जगह तय होगी।
कमी- सबसे बड़ी जरूरत है जमीन, ज्यादातर ऐसी जगहों के पास खाली जगह ही नहीं है।
11) रिहायशी इलाकों में पार्किंग परमिट जारी मिलेंगे। फीस कमर्शियल एरिया से कम होगी। नई कॉलोनियों में पार्किंग रखेंगे।
कमी- पानी के बिल तो कोई देता नहीं, परमिट कौन लेगा।
12) सड़क की पार्किंग पर 3 घंटे से ज्यादा गाड़ी खड़ी नहीं होगी। वरना अॉफ रोड पार्किंग पर शिफ्ट किया जाएगा।
कमी- गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का खरता रहेगा।
एक्सपर्ट की नजर में...
जरूरत: सड़कों पर वाहनों की स्पीड काफी कम है और इसका कारण यही है कि सड़कों पर गाडिय़ां खड़ी रहती हैं। जालंधर में वाहनों की औसत स्पीड 26 किलोमीटर प्रति घंटा से कम है। 40 प्रतिशत सड़कें टू लेन हैं, जबकि फोर लेन सड़कें सिर्फ 6 प्रतिशत हैं। इससे भी ट्रैफिक जाम होता है।
रेवेन्यूू: रेवेन्य जेनरेट करके लोकल एरिया डेवलपमेंट पर खर्च होगा। किसी भी हालत में सबसिडी नहीं होगी। हर इलाके में सर्वे करके सरकारी जमीनों की निशानदेही होगी और उन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो सके।
बायलाज: पॉलिसी के लिए नगर निगम को बिल्डिंग बायलाज भी बदलने होंगे। मेन रोड की तरफ कमर्शियल बिल्डिंग का फ्रंट करने के लिए आगे जगह छोड़नी होगी। बिल्डिंग को पिछले दरवाजे से इस्तेमाल करना होगा। इसमें निगम को विरोध का समाना करना पड़ सकता है।
जनता के 3 सवाल...
1) गली में गाड़ी खड़ी करने की फीस क्यों दें?
2) कॉलोनियां डेवलप करते, पार्किंग नहीं बनाई। गलती निगम की, हम क्यों भुगतें?
3) पुराने बाजारों में पार्किंग प्लेस कैसे बनेंगे?
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.