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रिश्तों की गांठ खोल सकता है प्रधानमंत्री का नेपाल दौरा

भारत-नेपाल और चीन के बीच गलतफहमियां दूर करने के राजनयिक प्रयास तेज हुए हैं।

Bhaskar News | Last Modified - May 12, 2018, 01:00 AM IST

रिश्तों की गांठ खोल सकता है प्रधानमंत्री का नेपाल दौरा
उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीसरी नेपाल यात्रा में यह अच्छी तरह समझ सकेंगे कि भारत का यह पड़ोसी देश हमसे क्या चाहता है और नेपाल के कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली मोदी के समक्ष अपने देश और सरकार का मानस खोलकर रखेंगे। मोदी ने अपनी पहली यात्रा की तरह ही इस यात्रा को भी धार्मिक-सांस्कृतिक रंग देने की कोशिश की है। पहली यात्रा में उन्होंने पशुपतिनाथ में पूजा अर्चना की थी तो इस बार उन्होंने जानकी मंदिर में प्रार्थना के साथ और जनकपुर से अयोध्या की बस सेवा को हरी झंडी दिखाई। मोदी सरकार का लक्ष्य इस बस सेवा से भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों की प्राचीनता को रेखांकित करना है। अयोध्या और जनकपुर के इस पौराणिक रिश्तों के आख्यान से जो लोग परिचित हैं वे यह भी जानते हैं कि सीता को आजीवन हुए कष्ट के कारण मिथिलावासी अपनी बेटी अवध में नहीं भेजना चाहते। इसी पौराणिक ग्रंथि को आधुनिक संदर्भ में भारत और नेपाल के बीच सितंबर 2015 में हुई नाकेबंदी से जोड़कर देखा जाना चाहिए। नाकेबंदी नेपालियों ने ही की थी लेकिन, आरोप यही था कि यह सब भारत सरकार के इशारे पर हो रहा है। उससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई और नेपाल भारत की बजाय चीन पर अधिक निर्भर हो गया। मोदी का नेपाल दौरा तब पड़ी गांठ को खोल सकता है। इस बीच भारत-नेपाल और चीन के बीच गलतफहमियां दूर करने के राजनयिक प्रयास तेज हुए हैं। पिछले महीने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत आए थे तो भारत के प्रधानमंत्री मोदी चीन गए थे। इस बीच नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप गयाली भारत का दौरा करने के बाद सीधे चीन गए। तब चीन के विदेश मंत्री वांग ही ने कहा था कि भारत और चीन के सहयोग का स्वाभाविक फायदा नेपाल को मिलना चाहिए। ऐसे में मोदी को चाहिए कि वे नेपाली प्रधानमंत्री ओली के समृद्धि के नारे को अर्थ प्रदान करें। इस काम को करने के लिए जल विद्युत परियोजनाएं, जलमार्ग परिवहन, रेलवे लाइनों का विस्तार जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। मोदी की ही तरह ओजस्वी वक्ता और देश को नए-नए सपने दिखाने में माहिर ओली चाहते हैं कि समुद्र से कटे उनके देश का भी एक जहाजी बेड़ा हो, जिस पर नेपाल का ध्वज फहराता रहे। भारत को नेपाल से पौराणिक रिश्ता जोड़ने के साथ एक आधुनिक देश की इन भावनाओं को समझना होगा।

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