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डाउनलोड करेंमॉस्को. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक दिन के रूस दौरे पर हैं। वो गर्मियों के लिए बेस्ट टूरिस्ट स्पॉट सोची में रूसी प्रेसिडेंट पुतिन से मुलाकात करेंगे। ये पूरी तरह से इन्फॉर्मल समिट यानी अनौपचारिक मुलाकात है, लेकिन कई मायनों में ये बहुत अहम भी है। इस दौरे के जरिए भारत जहां रूस से नजदीकी बढ़ाकर एक साथ चीन और पाकिस्तान को साधने की कोशिश करेगा। वहीं, ईरान पर लगे ताजा प्रतिबंध के बाद अमेरिका को लेकर नई रणनीति की रूपरेखा तैयार करेगा। इसके अलावा रक्षा, आतंकवाद, व्यापार और एटमी डील पर बातचीत की भी उम्मीद है। बता दें ये पीएम मोदी का चौथा रूस दौरा है। महज 24 दिन पहले मोदी ने चीन में राष्ट्रपति जिनपिंग से अनौपचारिक बातचीत की थी।
पाकिस्तान से रूस की नजदीकियां भारत की चिंता
- रूस और भारत की दोस्ती ने एक लंबा दौर देखा है, लेकिन इसमें पिछले काफी वक्त से एक शिफ्ट देखा जा रहा है। भारत के लिए ये बात चिंताजनक है कि रूस का झुकाव पाकिस्तान की तरफ बढ़ता जा रहा है।
- इतिहास रहा है कि मॉस्को ने यूनाइटेड नेशंस सिक्युरिटी काउंसिल में कश्मीर मुद्दे पर हमेशा नई दिल्ली को सपोर्ट किया है।
- हालांकि, अब दक्षिण एशिया में मास्को की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है।
- दिसंबर 2017 में इस्लामाबाद में पहली बार हुई छह देशों की स्पीकर कॉन्फ्रेंस के आखिर में जारी ज्वाइंट डिक्लियरेशन (संयुक्त घोषणा) में सभी ने कश्मीर पर पाकिस्तानी लाइन का सपोर्ट किया था।
- ये घोषणा पत्र अफगानिस्तान, चीन, ईरान, पाकिस्तान, रूस और तुर्की ने साइन किया था। इसका मकसद वैश्विक, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को सुनिश्चित कराना था।
- ऐसे में रूस को साथ लेकर भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा।
चीन को साधने की कोशिश
चीन भले ही पाकिस्तान के साथ है, लेकिन वो आतंकी गतिविधियों को सपोर्ट नहीं करता। इधर रूस का चीन पर अच्छा प्रभाव है, ऐसे में भारत रूस से हाथ मिलाकर चीन से अपने रिश्ते बेहतर कर सकता है।
सोची से अमेरिका को देंगे संदेश
- विदेश मामलों के जानकार रहीस सिंह के मुताबिक - आज दो पोल बन गए हैं, एक- एशिया-पैसिफिक में जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका। दूसरा- गल्फ में चीन, रूस, सीरिया, ईरान है। भारत को इसमें बैलेंस बनाना है, क्योंकि उसे किसी से लड़ना नहीं है। बढ़ती वैश्विक चुनौतियां भारत को रूस और चीन के साथ अपनी नीतियों को और बारीकी से समन्वित करने के लिए मजबूर कर रही हैं। इससे पहले भी तीनों राष्ट्रों ने सत्ता के वैश्विक संतुलन को बदले की व्यापक वास्तविकताओं के बीच अपने द्विपक्षीय संबंधों को जमीन देने की कोशिश की है। अमेरिका में ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद असमंजस की स्थिति बढ़ी है। अमेरिका ने रूस पर डिफेंस व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों की बात की है। इसका असर रूस से भारत को मिलने वाले हथियारों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में मोदी सोची में बैठकर अमेरिका को ये संदेश देने की कोशिश करेंगे कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए फैसले लेने में कोई दबाव स्वीकार नहीं करेगा।
रूस में भारत के राजदूत के पंकज सरन के मुताबिक, ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से अमेरिका का अलग होना अभी बहुत अहम मुद्दा है, जिससे भारत प्रभावित होता है। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है। दरअसल भारत तेल की बड़ी जरूरत ईरान से पूरी करता है। पर अभी ईरान पर लगे प्रतिबंध से हालात बदले हैं। ऐसे में भारत इसके लिए नई रणनीति की रूपरेखा पर बात कर सकता है।
इन मुद्दों पर भी चर्चा की उम्मीद
- सरन के मुताबिक, भारत और रूस दोनों ही लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहे हैं। ऐसे में इस्लामिक संगठनों के बढ़ते खतरे और आतंकवाद से मुकाबले पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा अफगानिस्तान-सीरिया जैसे देशों की स्थिति पर भी चर्चा हो सकती है।
एटमी डील पर बातचीत संभव
- सरन का कहना है कि इस बैठक में एटमी डील पर भी चर्चा की उम्मीद है। रूस भारत के कुडनकुलम में 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने में मदद कर रहा है। दोनों नेता बांग्लादेश के रूपपुर में एटमी प्लांट के लिए सहयोग बढ़ाने पर बातचीत कर सकते हैं।
अनौपचारिक बातचीत का फायदा
रहीस सिंह के मुताबिक - "दरअसल अनौपचारिक बातचीत किसी ट्रीटी या एग्रीमेंट का हिस्सा नहीं बनती। लेकिन इससे बातचीत के लिए एक बड़ा स्पेस बनता है। इससे हम कूटनीतिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। लंबे वक्त से भारत, रूस से कटा-कटा है। जितना हम अमेरिका के करीब आते गए, रूस दूर होता गया। लिहाजा प्रतिनिधिमंडल के साथ जाने के बजाय अनौपचारिक वार्ता करना ज्यादा सही लगता है। इसमें मुद्दे तय नहीं होते। लेकिन जब देशों के प्रमुख बैठते हैं तो बातचीत का माहौल तैयार होता है।"
मोदी का चौथा रूस दौरा
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी चौथी बार रूस के दौरे पर जा रहे हैं।
- "मोदी-पुतिन की यह मुलाकात बेहद अहम और कुछ हटकर है। दरअसल, पुतिन ने खुद मोदी को बुलाया है। वो भी तब जब उन्हें चौथी बार रूस का राष्ट्रपति बने हुए 2 हफ्ते हुए हैं।"
- "पुतिन ने इच्छा जताई है कि वे मोदी के साथ विदेश नीति, दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत से रिश्तों को मजबूती देने पर चर्चा करना चाहते हैं।"
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