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घोर नक्सल इलाके में तेंदूपत्ता और महुआ बीन करती थीं गुजारा, अब बनीं नेशनल प्लेयर

3 वर्ष पहले
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बीजापुर। नक्सलियों का गढ़, जहां जन्म के साथ ही जिंदगी लाल झंडे के नीचे और बारूद के ढेर पर होती है। वहां दो जोड़ी आंखों में सपने पल रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के। तेंदू पत्ता और महुआ बीनकर रोटी का जुगाड़ करने वाली यहां की बेटियां अब देश के फलक पर चमक बिखेर रही हैं। इन दोनों ने महज कुछ ही महीनों में ऐसी प्रतिभा दिखाई है कि नक्सलवाद के गढ़ के नाम से फेमस बीजापुर में अब सुनीता और अरुणा का नाम सुनाई देने लगा है। 14 अप्रैल को बस्तर दौरे पर में पीएम मोदी इन दोनों होनहार बेटियों से मिलेंगे। 

 

कभी जंगल में तेंदू पत्ता और महुआ बीनती थीं

 

- सॉफ्टबॉल खिलाड़ी सुनीता हेमला और अरुणा पुनेम काे एशियन जूनियर चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। ये सब महज 8 माह के भीतर ही हो पाया है। 8 महीने पहले दोनों जंगल में महुआ बीनती थीं। तेंदूपत्ता इकट्‌ठा कर दो जून की रोटी का इंतजाम करती थीं।

- नक्सल इलाके में झोपड़ी में रहने वाली सुनीता और अरूणा की जिंदगी अचानक ही बदल गई। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला प्रशासन की एक पहल से 8 महीने पहले ही अगस्त में 10 खेलों की बोर्डिंग और डे-बोर्डिंग एकेडमी खोली गई और जल्दी ही यहां के खिलाड़ियों ने नेशनल और स्टेट लेवल में 46 मेडल जीत लिए।

- जिले के कलेक्टर की पहल पर यह एकेडमी खुली है। इसी एकेडमी में सुनीता और अरूणा को जौहर दिखाने का मौका मिला और उन्होंने स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप में कई मेडल अपने नाम किया। इसके बाद उनका सलेक्शन नेशनल टीम में हो गया। 

 

ऐसा है इनका प्रदर्शन 

 

- दोनों खिलाड़ियों को नेशनल चैंपियनशिप और कैंप में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम के लिए चुना गया है। अरुणा ने नवंबर में तिल्दा में हुए स्कूल गेम्स के स्टेट लेवल टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल और राजनांदगांव में हुए ओपन सब जूनियर टूर्नामेंट में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता।

- इसके अलावा वे दो नेशनल चैंपियनशिप में भी उतर चुकी हैं। वहीं सुनीता ने भी स्टेट चैंपियनशिप में दो मेडल अपने नाम किए हैं और नेशनल में भी उतर चुकी हैं। दोनों ही खिलाड़ी एकेडमी में सोपान कर्णेवार से कोचिंग ले रही है। 
- कोच सोपान ने बताया कि पिछले साल से शुरू हुई एकेडमी के कई खिलाड़ी नेशनल में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उम्मीद है कि एशियन चैंपियनशिप में दोनों खिलाड़ी अपने इस प्रदर्शन को बरकरार रखेंगी। - खिलाड़ी 15 अप्रैल को अनंतपुर में लगने वाले कैंप के लिए रवाना हाेंगे। टूर्नामेंट के मुकाबले 12 से 18 मई तक फिलिपींस में खेले जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को बीजापुर जा रहे हैं। इस दौरान वे एकेडमी के खिलाड़ियों से भी मुलाकात करेंगे। 


देश की पहली ऐसी स्पोर्ट्स एकेडमी है ये

 

- बीजापुर, नक्सल प्रभावित ऐसा पहला जिला है, जहां एक साथ 10 खेलों की एकेडमी हैं। छत्तीसगढ़ का खेल विभाग तो 17 साल में सिर्फ दो खेलों की डे-बोर्डिंग एकेडमी ही खोल सका है। बीजापुर की एकेडमी में फुटबॉल, वालीबॉल, बास्केटबॉल, साफ्टबॉल, बैडमिंटन, तैराकी, जूडो, कराते, तीरंदाजी और टेनिस की ट्रेनिंग दी जा रही है। 120 खिलाड़ियों को बोर्डिंग और 142 खिलाड़ियों को डे-बोर्डिंग में प्रवेश दिया गया है। कुल 262 खिलाड़ियों में 199 लड़के और 63 लड़कियां हैं। 

 

सभी मैदानों पर फ्लड लाइट्स 

 

- खिलाड़ियों को रोज छह घंटे की प्रैक्टिस कराई जाती है। यहां लगभग सभी मैदानों पर फ्लड लाइट्स है। इससे खिलाड़ी रात में भी प्रैक्टिस कर पाते हैं। साथ ही, बड़े इवेंट रात में कराए जा सकते हैं। डिप्टी कलेक्टर हेमंत बोआरे ने कहा कि लोग आज जिले को नक्सल क्षेत्र के तौर पर जानते हैं। पर कुछ सालों में इसकी पहचान खेलों से भी हो सकती है। 

 

अन्य जिलों से बुलाए गए कोच 

एकेडमी में हर खेल के मुख्य कोच के साथ एक असिस्टेंट कोच रखा गया है। मुख्य कोच जिले के बाहर के हैं। प्रैक्टिस के दौरान भी खिलाड़ियों को एकेडमी द्वारा दी गई जर्सी पहनना अनिवार्य है। जबकि आज भी कई जिलों के खिलाड़ी स्टेट चैंपियनशिप में बिना ड्रेस के ही उतरते हैं। 

 

नक्सली हिंसा से पीड़ित खिलाड़ियों को भी जगह 

 

एकेडमी में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके माता-पिता को नक्सलियों ने मार दिया है। उन्हें खेलों के जरिये अपना मुकाम तय करने का मौका दिया गया है। खिलाड़ियों के डाइट पर पूरा ध्यान है। उन्हें मौसमी फल, दूध, सलाद के साथ-साथ हफ्ते में दो बार चिकन भी दिया जाता है। 

 

 

कंटेंट : आनंद शुक्ला 

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