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बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
ग्लोबल इनवायरनमेंट मेज़रमेंट इंडेक्स ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बीजिंग से अधिक है.
अमरीका स्थित इनवायरनमेंट प्रीफरेंस इंडेक्स (ईपीआई) के प्रमुख डॉ एंजल सू का कहना था कि संगठन किसी भी शहर को रैंकिंग नहीं देता है और उसके पास तुलना करने वाली सूचनाएं नहीं हैं.
2014 के ईपीआई के 178 देशों में भारत का नंबर 174 है वायु के स्तर के मामले में.
ईपीआई को येल और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता तैयार करते हैं.
ईपीआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और येल सेंटर फॉर इनवायरमेंटल लॉ एंड पॉलिसीमें कार्यरत एंजल सू का कहना था, \"ईपीआई शहरों को रैंकिंग नहींदेता ह और न ही उसके पास शहर आधारित सूचनाएं हैं. जिसकी तुलना हो सके.\"
कुछ संकेतों में दिल्ली में वायु का स्तर चीन की तुलना में खराब आया है लेकिन इस संबंध में पूरे आंकड़े उपलब्ध नहीं है जिससे कि दोनों शहरों की तुलना हो सके.
भारत एयर क्वालिटी वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिक डॉ गुफरान बेग ने भी रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि छोटे धूण कणों पीएम 2.5 की औसत सांद्रता दिल्ली में इस महीने बहुत ही कम रही है. यह सांद्रता इस महीने 210 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रही है.
आंकड़ों का खेलउधर दिल्ली में स्थित पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार दिल्ली में छोटे धूल कणों यानी पीएम 2.5 की सांद्रता बीजिंग में वर्ष 2013 में 250 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही है सर्दियों में भी यह 400 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं हुई है.
सीएसई के अनुसार दिल्ली में नवंबर 2013 के बाद से पीएम 2.5 की औसत सांद्रता 240 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही है जो सर्दियों में बढ़ कर 575 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक गई है.
पीएम 2.5 की सही सांद्रता वायु में 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए.
दिल्ली के अरबन एमिशन्स इंफो के निदेशक डॉ सरत गुट्टीकुंडा इन आकड़ों के खेल में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हैं.
वो कहते हैं, ‘’ भारत में प्रदूषण स्तर के खराब होने का तब तक इंतज़ार नहीं करना चाहिए कि वो बीजिंग से खराब हो जाए. दिल्ली की हवा खराब हो चुकी है बहुत ख़राब. हर साल इसकी हालत बेकार हो रही है और कार्रवाई किए जाने की ज़रुरत है.’’
दिल्ली में सर्दियों में घना कोहरा आम बात हो गई है. इस वर्ष तो कोहरे के कारण लोगों को कई दिनों तक खासी परेशानी रही है.
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