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पोप का अलविदा, माना मुश्किलों भर था सफर

9 वर्ष पहले
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अब \'अवकाशप्राप्त पोप\' कहलाएंगे बेनेडिक्ट सोलहवें

पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने माना है कि कैथोलिक चर्च के प्रमुख के तौर पर उनके आठ साल के कार्यकाल में कई तरह की चुनौतियां आईं, लेकिन ईश्वर ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्होंने हर दिन उसकी मौजूदगी को महसूस किया.

85 वर्षीय पोप गुरुवार को अपना पद छोड़ रहे हैं और बुधवार को उन्होंने बतौर पोप श्रद्धालुओं को आखिरी बार संबोधित किया.

इस अवसर पर वेटिकन के सेंट पीटर्स स्क्वैयर पर दसियों हजार लोग जमा हुए. पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि पोप की जिम्मेदारी \'एक भारी भार\' था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार किया क्योंकि उन्हें भरोसा था कि ईश्वर उनका मार्गदर्शन करेगा.

उनके कार्यकाल में कैथोलिक चर्च के पादरियों पर बाल यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे. साथ ही ऐसे गोपनीय दस्तावेज भी सामने आए जिनमें वेटिकन में भ्रष्टाचार और खींचतान होने की बात कही गई.

नहीं पहनेंगे लाल जूते

पोप ने श्रद्धालुओं का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने पोप का पद छोड़ने के उनके फैसला का सम्मान किया. उन्होंने कहा कि वो चर्च की भलाई के अपना पद छोड़ रहे हैं. मार्च में अगले पोप का चुनाव किया जाएगा.

पोप का पद छोड़ने के बाद बेनेडिक्ट सोहलवें \'अवकाशप्राप्त पोप\' कहलाएंगे. उनकी \'हिज़ होलीनेस\' की पदवी बरकरार रहेगी.

पोप के आखिरी संबोधन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े

वो अपने मूल नाम योसेफ रात्सिंगर के बजाय बेनेडिक्ट सोलहवें के नाम से ही जाने जाएंगे. लेकिन वो लाल जूते पहनने छोड़ देंगे.

वो गुरुवार को अपने ग्रीष्मकालीन आवास कासल गैंडोल्फ में चले जाएंगे जो रोम से 24 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है.

पोप ने वेटिकन में अपने अंतिम पल अपने आधिकारिक आवास में उन कार्डिनलों के साथ बिताए जिन्होंने आठ साल तक उनके साथ नजदीकी तौर पर काम किया.

पोप बेनेडिक्ट सोहलवें 1415 में ग्रेगोरी बारहवें के बाद पद छोड़ने वाले पहले पोप हैं.