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सादे प्रभु

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 05:18 PM IST

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power gallery by Dr. Bharat Agarwal
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सुरेश प्रभु मोदी कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण मंत्री हैं। लेकिन वह कभी भी किसी वीआईपी की तरह व्यवहार नहीं करते हैं। जब भी वह मंत्रालय जाते हैं, तो सरकारी गाड़ी के बजाय ऑटो रिक्शा कर लेते हैं। हाल ही में अपनी पत्नी के साथ ऑटोरिक्शा में सवारी करते हुए उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो गई हैं। इतना ही नहीं, जब वह विमान में भोजन करते हैं, तो उसका भुगतान अपनी जेब से करते हैं। प्रधानमंत्री भी उनकी सरल जीवन शैली को पसंद करते हैं।

... जब चिड़िया चुग गई...
भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम हाल ही में चर्चा में थे। सवाल यह था कि उन्होंने नोटबंदी को दमनकारी कहा था या नहीं कहा था? प्रधानमंत्री इस अभिव्यक्ति से नाराज थे। सुना यह गया है कि अरविंद सुब्रमण्यम ने अरुण जेटली को फोन भी किया और एक नोट भेजकर भी यह स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी नोटबंदी को दमनकारी नहीं कहा था। उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि अचानक भारी धन जमा हो जाना दमनकारी था। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक पुस्तक के विमोचन समारोह में वह इसे स्पष्ट करेंगे। आज वह दिल्ली में थे, उन्होंने स्पष्ट भी किया, लेकिन जो नुकसान होना था, वह पहले ही हो चुका था।

अगला सीबीआई चीफ कौन!
अगला सीबीआई प्रमुख कौन होगा? अब यह लाख टके का सवाल बन चुका है। कानाफूसी के मुताबिक पहला नंबर एनआईए के वर्तमान महानिदेशक योगेश चंद्र मोदी, दूसरा नंबर मुंबई के पुलिस कमिश्नर सुबोध कुमार जायसवाल, तीसरा नंबर गुजरात पुलिस के महानिदेशक शिवानंद झा का है। इनमें से कोई भी छिपा रुस्तम हो सकता है। वरिष्ठता क्रम के लिहाज से श्रीमती रीना मित्रा, राजेश रंजन और रजनीकांत मिश्रा भी दौड़ में हैं। सीबीआई का काम फिलहाल नागेश्वर राव देख रहे हैं। संभवत: वही देखते रहें।

आधी रात की अधूरी कहानी
प्रधानमंत्री मध्यरात्रि में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के अदालत कक्ष में गए थे। यह बहुत असामान्य घटना थी। अब सुप्रीम कोर्ट में बहुत सारी गपशप चल रही है। दरअसल वहां एक वैश्विक न्यायपालिका सम्मेलन हो रहा था। सभी बिम्सटेक देशों- माने बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल के प्रधान न्यायाधीश वहां मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने (भारत के) प्रधान न्यायाधीश से कहा- वह उनकी अदालत का कमरा देखना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने उसे कभी नहीं देखा है। सुरक्षा कारणों से उन्होंने मध्यरात्रि का समय चुना था। कानाफूसी में कहा जाता है कि पीएम ने प्रधान न्यायाधीश से निजी बात की थी, लेकिन वहां मौजूद कुछ अन्य न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि कोई निजी बैठक या वार्तालाप नहीं हुआ था। यहां तक कि जब मोदी अदालत के कमरे में गए थे, तब भी वहां अन्य न्यायाधीश मौजूद थे।

इमरान बाजवा खान की गुगली
भारतीय पत्रकारों की पिछली पाकिस्तान यात्रा के दौरान इमरान खान के साथ बातचीत के कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन पत्रकारों को जो वीजा दिया गया था, वह इस्लामाबाद तक का था। पाकिस्तानी सरकार उनकी मेजबान थी और पाकिस्तानी विदेश मंत्री द्वारा उनके लिए रात्रिभोज इस्लामाबाद में रखा गया था। लेकिन उस दिन पंजाब में ही काफी समय लग गया। भारतीय पत्रकार मध्यरात्रि में इस्लामाबाद पहुंचे, लेकिन पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि रात्रिभोज रद्द नहीं होगा। लिहाजा रात का खाना रात 1 बजे के बाद हुआ। पत्रकार रात 3 बजे के आसपास होटल पहुंचे। अगले दिन इमरान नमूदार हुए। बाकी सब ठीक था, लेकिन एक समस्या आ गई। इमरान के बाद पाकिस्तानी सेना के व्यक्ति ने ऑन रिकॉर्ड कहा कि मसूद अजहर आतंकवादी नहीं है। यह आग में घी डालने वाली बात हो गई। उत्तेजित भारतीय पत्रकारों ने कहा कि हम इसे ऑन रिकॉर्ड इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान ने फिर रवैया बदल लिया। कहा - नहीं, यह ऑन रिकॉर्ड नहीं है। लिहाजा निमंत्रित पत्रकारों में से किसी ने भी इसकी रिपोर्टिंग नहीं की। लेकिन भारत आकर हर व्यक्ति इसी की चर्चा कर रहा था। तो माने यह पाकिस्तान की सोची समझी रणनीति थी?

फिर कोलकाता
यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने हाल ही में अपने बेटे की शादी की पार्टी अशोका रोड के 5 नंबर बंगले में दी। विवाह कोलकाता में हुआ था। 3 दिन पार्टी चली। दरअसल बहू कोलकाता से है, हालांकि वह पंजाबी है। सिद्धार्थ की पत्नी नीता अब नोएडा में दंत चिकित्सक का काम करती हैं, हालांकि वह भी कोलकाता की रहने वाली हैं। सिद्धार्थनाथ सिंह भी कभी पश्चिम बंगाल के प्रभारी थे। माने परिवार का कोलकाता कनेक्शन बहुत मजबूत है। मेहमानों को न केवल सामिष-निरामिष, बल्कि कबाब और बिरयानी भी परोसा गया था।

क्या किस्मत है
उत्तरप्रदेश पुलिस के डीजी ओ.पी. सिंह भाग्यशाली हैं। हालांकि वे जनवरी 2018 में ही सीआईएसएफ डीजी का पद छोड़ चुके हैं, फिर भी सीआईएसएफ के 20 से अधिक जवान उनकी सेवा में आज भी तैनात हैं। दूसरे, चूंकि वे दिल्ली में उत्तरप्रदेश के स्थानीय आयुक्त कार्यालय में ओएसडी भी हैं, लिहाजा उनका दिल्ली में बंगला भी बना हुआ है। हालांकि आमतौर पर कोई बहुत जूनियर अधिकारी ही ओएसडी हुआ करता है।

पीएम ने सुलझाया विवाद
अरुण जेटली और राम जेठमलानी- यह दो कानूनी दिग्गज एक दूसरे को बहुत पसंद तो शायद कभी भी नहीं करते थे। इस बार अरुण जेटली और राम जेठमलानी के बीच विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री ने स्वयं हस्तक्षेप किया और अंततः सफल भी रहे।

देखते चलिए
क्या बीजेपी का कैडर और कार्यकर्ता भविष्य में राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेंगे? सुना तो ऐसा ही है।

यूपीए का ममता संकट
ममता बनर्जी विपक्षी एकता तो चाहती है, लेकिन इस एकता का नेतृत्व राहुल गांधी को सौंपे जाने के पक्ष में नहीं हैं। ममता बनर्जी अपने लिए यूपीए की सह संयोजक का पद चाहती है! संयोजक चंद्रबाबू नायडू होंगे, उन्हें एनडीए का अनुभव भी है। लेकिन यही पद पवार भी चाहते हैं। दीदी का इस पर बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।

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