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इन 6 शहरों में जाते हैं तो बरतें खास सावधानियां, हवा हो रही जहरीली

वर्ल्ड अस्थमा डे पर हम आपको बता रहे हैं भारत के 6 ऐसे प्रदूषित शहर जहां अस्थमा और श्र्वास रोगियों को बरतनी चाहिए खास साव

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 02, 2018, 11:10 AM IST

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    दुनियाभर में अस्थमा के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। केवल भारत में ही इसके 3 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। ऐसे में प्रदूषण इसका कारक होने के साथ-साथ जानलेवा भी साबित हो सकता है। हम आपको बता रहे हैं भारत के 6 ऐसे प्रदूषित शहर जहां अस्थमा और श्वास रोगियों को बरतनी चाहिए खास सावाधानियां। दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा वाले शहरों में भारत के कई शहरों के नाम हैं। जहां साफ हवा का क्वालिटी इंडेक्स ( Air Quality Index) 0 से 50 के बीच होना चाहिए, वहां दिल्ली की हवा की क्वालिटी 400 के जानलेवा स्तर तक पहुंच जाती है। WHO ने जारी की रिपोर्ट...

    - पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी की गई 100 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में भारत के कई शहर भी शामिल हैं। भारत के टॉप-6 शहर जो इस लिस्ट में शामिल हैं, वो लोगों के लिए हवा में जहर परोस रहे हैं। इनमें सबसे पहले नंबर पर राजधानी दिल्ली है।

    क्यों जानलेवा है दिल्ली की हवा

    पर्टिकुलेट मीटर यानी PM। इसके मुताबिक दिल्ली की हवा में PM2.5 (microns) की रेंज 150 से ऊपर है इसका मतलब ये कि यहां हवा में PM2.5 माक्रोन्स की तादाद बहुत ज्यादा है। इस लिहाज से यहां की हवा की क्वालिटी 201 से 300 के बीच आती है, जो बेहद खतरनाक है। Air Quality Index सुरक्षित हवा 0 से 50 के बीच होती है। इसके बाद सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में फिरोजाबाद, अहमदाबाद, कानपुर, पटना, ग्वालियर और आगरा के नाम हैं।

    क्या है PM2.5
    PM2.5 में का मतलब है पर्टिकुलेट मीटर यानी जो कण के बारे में बताता है। वहीं इसके आगे लिखी संख्या इसका साइज बताती है। PM2.5 कण का मतलब प्रदूषण फैलाने वाले सबसे बारीक कण। ये कण इंसान के बाल के 3 प्रतिशत हिस्से बराबर बारीक होते हैं। ऐसे में आसानी से हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते है। यही कारण है कि PM2.5 को सबसे खतरनाक माना जाता है। पीएम 2.5 डीजल वाहनों से ज्यादा निकलता है जिसमें कार्बन होता है और यह कैंसर पैदा करने की क्षमता रखता है। अस्थमा के मरीजों के लिए ये जानलेवा है।

    इन शहरों में क्या है हाल
    फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश
    ये शहर रंगीन कांच की चूड़ियां बनाने के लिए मशहूर है। लेकिन ग्लास इंडस्ट्री के कारण यहां प्रदुषण भी काफी ज्यादा हो रहा है। हवा में जहरीली गैस मिलती जा रही है, जिसकी वजह से लोगों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कई अनऑथॉराइज़्ड फैक्ट्री भी चल रहे हैं, जो आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। पीएम2.5 की मात्रा 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 218.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाई गई।

    आगरा, उत्तर प्रदेशइस शहर में तो एसिड रेन की खबर भी आ चुकी है। माना जाता है कि प्रदूषण के कारण ताज महल पर भी असर पड़ रहा है। लोगों में जहां कई तरह की बीमारियां देखने को मिल रही है, वहीं ये शहर प्रदूषण के कारण अपनी हिस्टोरिकल वैल्यू भी खोता जा रहा है।


    ग्वालियर, मध्य प्रदेश छोटा सा शहर ग्वालियर भारत के प्रमुख शहरों से भी ज्यादा प्रदूषित माना गया है। यहां हवा में लगातार टोक्सिन की मात्रा बढ़ती जा रही है। लोगों में हार्ट अटैक के अलावा कई तरह की सांस-सम्बंधित बीमारियां देखने को मिल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस शहर में चलने वाली गाड़ियों में मात्र 25 प्रतिशत ही इको-फ्रेंडली है। WHO के हिसाब से यहां पीएम2.5 की मात्रा 144 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 329 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापी गर्इ है।

    पटना, बिहार बिहार की राजधानी पटना में जो हवा मौजूद है, वो किसी स्वस्थ इंसान को दिल और फेंफडों की बीमारी दे सकता है। WHO की लिस्ट में ये शहर दूसरे पायदान पर है। यहां मौजूद इंडस्ट्रीज से निकलने वाला धुआं लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारियों की चपेट में भेज सकता है। WHO के फिगर्स की माने तो यहां पीएम2.5 की मात्रा 149 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 164 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक बताई गई है। बता दें कि पहले इस शहर को चीनी मिल्स और उन्नत खेती के लिए विश्व में जाना जाता था लेकिन अब प्रदूषण के मामले में जाना जाता हैं ।

    कानपुर, उत्तर प्रदेश इस शहर में काफी धूल उड़ती है। डस्ट पार्टिकल्स के कारण शहर में सांस लेना काफी मुश्किल है। यहां चलने वाली गाड़ियों के अलावा ग्रीन हाउस गैसों की वजह से यहां की हवा में जहरीले पदार्थ काफी ज्यादा शामिल हो गए हैं। यहां रहने वाले लोगों में सांस से सम्बंधित बीमारियों में इजाफा हो रहा है। यहां पीएम2.5 की मात्रा 93 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि पीएम10 की मात्रा 211.67 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाई गई थी।।

    कैसे करें बचाव
    ऐसे प्रदूषण वाले शहरों में आम लोगों के मुकाबले अस्थमता के मरीजों को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। जिस शहर में पीएम 2.5 की रेंज बहुत ज्यादा है, वहां कॉटन मास्क सबसे अच्छा बचावा का तरीका है। ये जहरीले पार्टिकल्स को शरीर में जाने से रोकता है। बचाव के लिए एन-95 मास्क पहनने की सिफारिश की जाती है। एच1एन1 से बचने में इस मास्क का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, डॉक्टर्स की मानें तो ऐसे प्रदूषण में जितना बाहर जाने से बचा जा सके उतना बेहतर होता है।
    आगे की स्लाइड्स में देखें, पीएम 2.5 की रेंज और उसके स्वास्थ पर पड़ते प्रभाव...

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Web Title: Dangerous Cities For Asthama Paitent In India, These Precautions Should Be Taken
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