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डाउनलोड करेंइंदौर. हमें शिक्षित और संगठित होकर रहना चाहिए। जात-पात का अब वक्त नहीं है। कोई जाति पूछे तो सिर्फ यह कहना चाहिए कि मैं भारतीय हूं। डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर महू में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ये बातें कहीं।
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद हुई हिंसा का जिक्र किए बगैर उन्होंने कहा कि हमें शांति और अहिंसा के साथ काम करना चाहिए। डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवन मंत्र और भाषणों में हमेशा इसी का उल्लेख किया है। राष्ट्रपति ने भाषण की शुरुआत जय भीम के नारे से की। उन्होंने कहा कि जय भीम का मतलब डॉ. आंबेडकर की जयकार से है। उनके द्वारा किए गए कार्यों की जयकार से है।
राष्ट्रपति के संबोधन की पांच प्रमुख बातें
एक अनुयायी के रूप में
14 का अंक मेरे लिए खास, 14 अप्रैल के दिन मैं यहां आया। 14वां राष्ट्रपति भी बना हूं। मैंने पूछा था कि क्या कोई राष्ट्रपति यहां आया है? बताया गया कि आप पहले राष्ट्रपति होंगे तो मुझे खुशी हुई।
एक शिक्षक के रूप में
बच्चों और युवाओं के लिए उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जोर हमेशा शिक्षित होने पर रहा है। शिक्षा का मतलब केवल किताबी ज्ञान नहीं। हम जो पढ़ रहे हैं, समझ रहे हैं उसके मायने क्या हैं?
एक अभिभावक के रूप में
युवाओं से मेरी अपील है कि वह शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलें। किसी मामले में आपत्ति होने पर संविधान में अपनी बात और आपत्ति दर्ज कराने के रास्ते दिए गए हैं।
एक राष्ट्रपति की रूप में
मैं आप सब देशवासियों से अपील करता हूं कि आप जब भी दिल्ली आएं तो राष्ट्रपति भवन जरूर आएं। वह केवल मेरा निवास नहीं, बल्कि देश की धरोहर है। इस भवन को हर किसी व्यक्ति को देखना चाहिए। सभी के लिए राष्ट्रपति भवन खुला है।
एक विचारक के रूप में
आरबीआई की स्थापना, सरकारी क्षेत्र के कई कारखानों को शुरू करने, स्वदेशी उत्पादन में आंबेडकर का योगदान रहा।
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