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मर्जर के 13 गांवों से हटी खरीद-फरोख्त पर रोक, हो सकेंगे रजिस्ट्री-नामांतरण

3 वर्ष पहले
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भोपाल.   राजधानी के 13 गांवों की 2800 एकड़ मर्जर प्राॅपर्टी पर खरीद-फरोख्त, नामांतरण, एनओसी और बिल्डिंग परमिशन पर लगी रोक हटा ली गई है। प्रमुख सचिव राजस्व अरुण पांडे ने इसके आदेश कलेक्टर सुदाम खाडे को जारी कर दिए हैं। इसके लिए 11 बिंदु तय किए गए हैं। कलेक्टर ने भी लोगों को मालिकाना हक देने के लिए एसडीए को मर्जर के गांवों में नामांतरण पर लगी रोक हटाने के आदेश दिए हैं। जिससे इन गांवों की करीब 7 एकड़ जमीन का विवाद सुलझ गया है। यह वह प्राॅपर्टी है, जो राजस्व रिकाॅर्ड में निजी दर्ज है, लेकिन मर्जर एग्रीमेंट के दायरे में आ रही थी। 

 

मार्च-2017 में तत्कालीन कलेक्टर ने राजस्व रिकाॅर्ड में दर्ज निजी जमीन को मर्जर एग्रीमेंट से जोड़कर लाउखेड़ी, बोरवन, बेहटा, हलालपुरा, शाहपुरा, कोटरा सुल्तानाबाद, सेवनिया गौड़, निशातपुरा, कोहेफिजा, नयापुरा, शहर भोपाल, धर्मपुरी, और छोला की प्रापर्टी की रजिस्ट्री, नामांतरण, एनओसी और बिल्डिंग परमिशन पर रोक लगा दी थी। जिसके तहत सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर के इस आदेश को खत्म कर दिया है।

 

तीन लाख लोगों को राहत की उम्मीद

सरकार के इस फैसले से 3 लाख लोगों को राहत मिल गई है। मर्जर प्राॅपर्टी को लेकर पहली बार 2002 में तत्कालीन कलेक्टर अनुराग जैन ने इन खसरों पर खरीद-फरोख्त पर रोक लगी दी थी। इसके बाद 2008 में तत्कालीन कलेक्टर को यह निर्देश दिए थे कि मर्जर मामले में नोटिस जारी कर मामले को सुलझाया जाए। इस दौरान कलेक्टर ने 1 हजार से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी कर दस्तावेज पेश करने के लिए कहा था। इसके बाद शासन ने 2012 में यह मामला कलेक्टर के पास भेज दिया।

 

 

कलेक्टर बोले- अनजान व्यक्ति को न दें दस्तावेज

जिला प्रशासन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले मर्जर प्रभावित क्षेत्र में कुछ भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं। घरों में जाकर लोगों से उनकी प्रॉपर्टी संबंधी दस्तावेज मांग रहे हैं। कलेक्टर ने लोगों से कहा है कि हमारी तरफ से किसी भी व्यक्ति को दस्तावेज एकत्रित करने के लिए नहीं कहा गया है। ऐसे लोगों से लोगों को सर्तक रहने की सलाह दी जा रही है।

 

जागीरदारी का केस कोर्ट में लड़ेगी सरकार
मर्जर प्राॅपर्टी के विवाद सुलझाने के दौरान टीटी नगर एरिया में करीब सात सौ एकड़ जमीन जागीरदारी एक्ट के तहत मिली है। जिसको लेकर कोर्ट में केस चल रहे हैं। इसको लेकर सरकार कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। यह प्राॅपर्टी मर्जर एग्रीमेंट में शामिल नहीं है।

 

काबिज लोगों से मांगे दस्तावेज
जिन के पास मर्जर प्रॉपर्टी पर काबिज होने के दस्तावेज हैं। वे रजिस्ट्री, जमीन खरीदने की रसीद, बिजली का बिल पेश कर सकते हैं। जिससे इन्हें मकान बनाने, लोन लेने सहित बिल्डिंग परमिशन लेने में आसानी होगी। 

 

कलेक्टर सुदाम पी खाडे ने कहा कि सरकार ने मर्जर प्राॅपर्टी को लेकर गाइडलाइन बनाई है, जिसके तहत सभी एसडीएम को अपने क्षेत्र में इस प्रापर्टी से जुड़े नामांतरण और एनओसी जारी करने निर्देश दिए गए हैं। 
 

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