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डाउनलोड करेंजयपुर. पूर्व राजस्थान पुलिस कॉन्सटेबल मनोज कुमार रावत ने UPSC क्रैक कर अपनी फैमिली का नाम रोशन किया है। महज 19 साल की उम्र में पुलिस की नौकरी ज्वाइन कर फैमिली को सपोर्ट करने वाले रावत के दिमाग में हर दम यूपीएससी क्लीयर कर अफसर बनने का जुनून सवार रहता था। उन्होंने 29 साल की उम्र में तीसरे अटैम्प्ट में यह मुकाम हासिल किया। 35 मिनट तक चले फाइनल इंटरव्यू में उनसे उनके बैकग्राउंड से रिलेटेड कई सवाल हुए, लेकिन तीन सवालों के जवाबों से इंटरव्यू पैनल सबसे ज्यादा इम्प्रैस हुआ। रावत ने वही तीन सवाल DainikBhaskar.com के साथ शेयर किए हैं।
Q.1 - आपकी पहली जॉब कॉन्सटेबल की थी। फिर उसे छोड़कर आपने कम सैलरी वाली LDC जॉब क्यों ज्वाइन की थी?
मनोज रावत का आन्सर - सर, बचपन से मेरा सपना IPS अफसर बनने का था। इसके लिए मैंने रेग्यूलर एडमिशन छोड़कर प्राइवेट ग्रैजुएशन भी किया था, जिससे मेरे फेवरेट सब्जेक्ट्स मुझे मिल सकें। कॉन्सटेबल की जॉब में मुझे स्टडीज के लिए टाइम नहीं मिल पा रहा था। इसलिए मैंने दूसरा प्रॉफेशन ट्राय किया, जिससे मेरी रेग्यूलर इनकम तो बनी रहे, साथ ही पढ़ाई का भी टाइम मिले। इसलिए पैसे की परवाह किए बगैर मैंने LDC का एग्जाम दिया और सिलेक्ट हुआ। वहां मेरी सैलरी पहली जॉब के मुकाबले 3 हजार रुपए कम थी।
Q.2 - आप SC से हैं, आपके मुताबिक क्या प्रमोशन में रिजर्वेशन होना चाहिए?
मनोज रावत का आन्सर - बिल्कुल नहीं। प्रमोशन सिर्फ काबिलियत को देखकर होना चाहिए, किसी जाति-धर्म या किसी अन्य क्राइटीरिया के आधार पर नहीं। ऊंचे पद पर सिर्फ काबिल व्यक्ति को होना चाहिए।
Q.3 - एजुकेशन सिस्टम में क्या खामियां हैं, क्या चीज इसे कमजोर बना रही है?
मनोज रावत का आन्सर - वैसे कई खामियां हैं, लेकिन सबसे जरूरी है मूल्यों की कमी। आज के एजुकेटेड यूथ भी धरना-प्रदर्शन, क्राइम और अन्य नेगेटिव एक्टिविटीज में लिप्त हो रहे हैं। यह एजुकेशन सिस्टम में वैल्यूज की कमी की वजह से है। पढ़े-लिखे होने के बाद भी आज के युवा पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाते हैं, सामने हो रहे क्राइम को रोकने का प्रयास नहीं करते, या कुछ केसों में स्वयं उसमें शामिल होते हैं। इसके अलावा इंफ़्रास्ट्रक्चर की कमी, क्रिएटिविटी की जगह रट्टेबाजी को बढ़ावा, प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी और स्किल्स की कमी भी बड़ी खामियां हैं।
- रावत जयपुर के श्यामपुरा गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता इस गांव में सरकारी प्राइमरी टीचर थे।
- इन्होंने बताया, "मैं बचपन से पुलिस अफसर बनना चाहता था। मैं जब 8वीं में था तब सनी देओल की एक मूवी आई थी, इंडियन, जिसमें उन्होंने एक ईमानदार IPS का रोल निभाया था। मुझे उनका किरदार इतना अच्छा लगा कि मैंने उनके जैसा अफसर बनने की ठान ली।"
- रावत का यह जवाब मीडिया में आने के बाद खुद सनी देओल ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी थी। सनी देओल ने ट्विटर पर लिखा था, "कॉन्ग्रेट्स मनोज कुमार। मुझे उम्मीद है कि आप भी रियल लाइफ इंडियन्स को अपने सपने पूरे करने के लिए इंस्पायर करेंगे।"
- मनोज ने बताया, "शुरुआत में मुझ पर घर की जिम्मेदारियां थीं, लेकिन साल 2013 में छोटे भाई के कॉन्सटेबल बनने के बाद मैंने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। मेरा सिलेक्शन लोअर डिविजनल क्लर्क के पद पर हो गया था। जल्दी ही CISF में जॉब मिल गई, लेकिन मैं अंदर से संतुष्ट नहीं था। मैं सिविल सर्विसेस में जाना चाहता था। मैंने तीसरी सरकारी नौकरी छोड़ी तो सभी ने कहा कि क्यों इतना बड़ा रिस्क लेते हो, सरकारी नौकरी दोबारा मिलना आसान नहीं है, लेकिन मैंने सिर्फ अपनी सुनी।"
- रावत जेआरएफ क्वालिफाई कर चुके हैं और प्रेजेंट में दलित एम्पावरमेंट और सोशल जस्टिस पर पीएचडी कर रहे हैं।
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