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डाउनलोड करेंरायपुर. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मेगा रोड शो के जरिए शुक्रवार को कांग्रेस ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने इस रोड शो के बहाने एकजुटता दिखाने की कोशिश की वहीं सत्ताधारी दल भाजपा को अपनी जोरदार उपस्थिति का अहसास भी कराया। इस दौरान राहुल गांधी ने कई बार बस से उतरकर सुरक्षा घेरा तोड़ा आैर कार्यकर्ताआें के साथ गर्मजोशी से मिले।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा 50 किलोमीटर लंबे रोड शो के बाद समाप्त हुआ। दुर्ग से माना एयरपोर्ट तक कांग्रेस अध्यक्ष सड़क किनारे खड़े कार्यकर्ताआें से कई बार नीचे उतरकर मिले। बस में सवार राहुल गांधी सुरक्षा घेरा होने के बाद भी कार्यकर्ताआें द्वारा फेंके जा रहे फूल खुद कैच करते नजर आए। दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम में बूथ स्तर के नेताआें से सीधे संवाद करने के बाद राहुल गांधी शाम 4 बजे रोड शो के लिए बस में सवार होकर निकले। दुर्ग के पटेल चौक से रोड शो कुम्हारी टोल नाका होते हुए रायपुर पहुंचा। टोल नाके के बाद पांच सौ से ज्यादा एनएसयूआई के कार्यकर्ताआें ने राहुल गांधी का स्वागत किया। इसके बाद शुरू हुआ स्वागत का सिलसिला माना एयरपोर्ट तक चलता रहा।
हर उम्र के नेता दिखे जोश में
राहुल गांधी के स्वागत कार्यक्रम में युवाआें जोश के साथ सीनियर लीडर के चेहरे भी चमकते नजर आए। संकल्प यात्रा के लिए तैयार बस में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव, प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया आैर चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष डा. चरणदास महंत भी शामिल थे।
10 से ज्यादा बार तोड़ा सुरक्षा घेरा
राहुल गांधी ने इस दौरान 10 से ज्यादा बार सुरक्षा घेरा तोड़ा आैर कार्यकर्ताआें तक पहुंच गए। इस दौरान कई बार नेताआें आैर समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की भी होती रही। कई बार तो लोगों का उत्साह देख राहुल खुद उनसे हाथ मिलाकर आगे बढ़ते गए। उन्होंने पूरे समय मुस्कुराते हुए कार्यकर्ताआें के साथ सड़क के दूसरी आेर जा रहे कार्यकर्ताआें का भी
अभिवादन किया।
राजीव गांधी चौक में उतरे राहुल
राजीव गांधी चौक नलघर के पास राहुल गांधी बस से उतरे उन्होंने राजीव गांधी की प्रतिमा पर फूलमाल पहनाई आैर आगे बढ़ गए। यहां पर काफी संख्या में कांग्रेसी नेता मौजूद थे।
100 से ज्यादा स्थानों पर बरसीं फूलमालाएं
रोड शो के दाैरान राहुल गांधी के स्वागत में कार्यकर्ता फूल माला के साथ फूलों की पंखुड़ियां लेकर खड़े थे। इस दौरान फूल फेंककर उनका स्वागत किया गया।
इन सबने किया स्वागत
एनएसयूआई, युवक कांग्रेस, पीसीसी के नेताआें, निगम के नेताआें, समाजसेवी संगठनों, सतनामी समाज, बौद्ध समाज, आदिवासी समाज आैर अन्य समाज के प्रतिनिधियों ने जगह-जगह राहुल गांधी का स्वागत भी किया।
राहुल गांधी का रोड शो फीका रहा: डॉ. रमन
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भाजपा के रोड शो के मुकाबले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का रोड शो फ्लॉप रहा। डॉ. सिंह ने कोरिया में अपनी विकास यात्रा के दौरान कहा कि राहुल के रोड शो बारे में फोन लगा कर पूछा तो पता चला कि 300-400 लोग उनके रोड शो में शामिल हुए। वे कोरिया जिले के हमारे रोड शो में मिले जनउत्साह व समर्थन को देख लेते तो उनका भ्रम दूर हो जाएगा।
10 गुना ज्यादा भीड़ थी जोगी की सभा में: अमित
अजीत जोगी की पेंड्रा और राहुल गांधी की कोटमी की सभा को लेकर मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा की गई की तुलना पर मरवाही विधायक अमित जोगी ने कहा है कि हमारी सभा में उमड़ा जन सैलाब गोंडवाना-कांग्रेस-एकता परिषद के संयुक्त कार्यक्रम से तीन गुना नहीं बल्कि दस गुना बड़ा था। 14 साल सरकार में रहकर भी यहां भाजपा ने इतनी बड़ी सभा न कराई है न देखी है। अपने भाषण में मैंने कल ही कह दिया था।
राहुल चमचमाती सड़कें देखने निकले: कौशिक
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने राहुल गांधी के रोड शो पर कहा कि वे राज्य की चमचमाती सड़कों समेत हमने जो विकास किया है उसे देखने निकले हैं। और यहां का विकास देखकर उन्हें लग रहा होगा कि हम व्यर्थ में विकास को खोज रहे हैं। रोड शो के सहारे वे बिखरी कांग्रेस को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं ले रहे हैंैं। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में विकास यात्रा में सभाओं और रोड शो में जनसमर्थन देखने को मिल रहा है।
विश्लेषण : शिव दुबे
छत्तीसगढ़ में राहुल के दो दिन... कई राजनीतिक संदेश
कर्नाटक की उठापटक के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का दो दिनी मिशन-छत्तीसगढ़ कई मायनों में राजनैतिक संदेश दे गया। खासकर छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव की दृष्टि से उनका यह दौरा कांग्रेस की राजनीति को दिशा देने वाला कहा जा सकता है। कांग्रेस के लिए दो मुद्दे-विवाद ऐसे हैं जिन पर से परदा हटाकर कांग्रेस अध्यक्ष ने सीधा संदेश दिया है। पहला- प्रत्याशियों के नाम अगस्त में ही तय करने कर लेने का ऐलान सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है। क्योंकि कांग्रेस टिकट वितरण में ऐन वक्त पर ही फंसती रही है। प्रत्याशियों को पर्याप्त समय नहीं मिलने की बात अब तक कांग्रेस की हार के प्रमुख कारणों में से रही है। दूसरा मामला है- अजीत जोगी की कांग्रेस वापसी की अटकलों पर विराम लगाना। पिछले कुछ दिनों से ऐसा कहा जा रहा था कि चुनाव आते-आते जोगी की कांग्रेस में वापसी हो जाएगी। इससे प्रदेश कांग्रेस का एक खेमा न केवल चिंतित था। मोर्चे पर डटे नेताओं के सामने यह सवाल बार-बार आ रहा था। राहुल ने जोगी को मौकापरस्त बताते हुए उनके लिए कांग्रेस के दरवाजे बंद कर दिए हैं। यानी कांग्रेस के जोगी विरोधी नेताओं को सीधा संदेश है कि वे अपने काम पर फोकस करें।
इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा जिस तरह से राहुल ने उठाया और वादा किया कि कांग्रेस की सरकार आते ही उनके कर्ज माफ कर दिए जाएंगे, उससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि राज्य की 80 फीसदी आबादी से जुड़े इस मामले को कांग्रेस चुनाव तक लेकर जाएगी। आदिवासियों को साधना भी इसी की एक कड़ी है। महत्वपूर्ण यह है कि दो दिन के दौरे में राहुल के निशाने पर सबसे अधिक मोदी-भाजपा और अारएसएस ही रहे हैं। राज्य की भाजपा सरकार पर उनका निशाना सांकेतिक ही रहा। इसके विपरीत मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राहुल पर कटाक्ष करने में कोई कमी नहीं रखी। इससे साफ है कि राहुल के दौरे की धार कम करने का जिम्मा रमन ने ही संभाल रखा था। उन्होंने तो जोगी की सभा को राहुल की सभा से बड़ी करार देकर यह बताने में भी परहेज नहीं किया राहुल का छत्तीसगढ़ में प्रभाव ज्यादा चलेगा नहीं। लिहाजा बयानों से परे जाकर देखा जाए तो ऐसा पहली बार हुआ है कि भाजपा की संगठित चुनावी तैयारियों का जवाब देने के लिए कांग्रेस ने इस पैमाने पर बड़ी तैयारी की। अब तक राहुल कुछ घंटों के लिए यहां आते रहे हैं। पर दो दिन देकर राहुल ने इशारा किया है कि इस बार वे छत्तीसगढ़ को लेकर सीरियस हैं। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ में नेतृत्व को लेकर वे कोई भी विवाद आगे नहीं बढ़ने देंगे। सभी से साफ-साफ कह गए कि पहले सब मिलकर चुनाव लड़ें। विधायक अपना नेता चुन लेंगे। कुल मिलाकर राहुल के दौरे से पार्टी में चल रहे विवाद और संशय के माहौल में कमी आएगी, ऐसा माना जा सकता है। हालांकि चुनाव हो और कांग्रेस में विवाद न हो, यह सोचना थोड़ा यथार्थ से भागने जैसा होगा। पर माहौल बदलने का प्रयास दिखा तो जरूर...।
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